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Karnal News: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के बढ़ेगी क्षमता
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। निगमायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने शनिवार की शाम को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। निस्तारण प्रक्रिया को धीमा बताते हुए सुगम स्वच्छता एजेंसी प्रतिनिधियों को प्लांट की कार्य क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कचरे का वैज्ञानिक निपटान तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 का पालन सुनिश्चित किया जाए।
निगम आयुक्त ने प्लांट में सबसे पहले सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा केंद्र (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) को देखकर उसकी प्रकिया को समझा। उसके बाद प्लांट में एकत्र कूड़े-कचरे में से सॉलिड पदार्थों को अलग करने वाली प्री-सैग्रीगेशन मशीन, पोस्ट सैग्रीगेशन और जैविक खाद बनाने वाले रिफाईनमेंट सेक्शन में लगी मशीनों की कारगुजारी को देखा।
सॉलिड वेस्ट प्लांट को चलाने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि व निगम के अधिकारियों से प्लांट की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि पोस्ट सैग्रीगेशन कचरे को एक दिन में ही खाद बनाने वाले रिफाइनमेंट सेक्शन में नहीं भेजा जाता, बल्कि इसे डि-कम्पोज़ की अवस्था में लाने के लिए कुछ दिनों तक परिसर में रखा जाता है। इस अवधि में इस पर केमिकल का स्प्रे किया जाता है, जिससे इसमें बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जो मिथेन के साथ मिलकर इसे कंपोस्ट में परिवर्तित होने योग्य बनाते हैं।
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निगमायुक्त ने आरडीएफ (रिफ्यूज़ड डिराईव्ड फ्यूल) सेक्शन को भी देखा। यहां प्री-सैग्रीगेशन से निकले कूड़े-कचरे में से बेकार रस्सी, कपड़ा, नारियल व लकड़ी के टूकड़े छांटे जाते हैं, जिन्हें आरडीएफ सेक्शन में लगी मशीनों में ले जाकर फ्यूल के बंडल बनाए जाते हैं, जो बायलरों, सीमेंट फैक्ट्रियों व ईंट के भठ्ठों में इस्तेमाल किए जाते हैं।
निगमायुक्त ने बताया कि असंध को छोड़कर करनाल जिले की छह नगरपालिकाओं तथा कुरुक्षेत्र, शाहबाद व लाडवा सहित कुल नौ शहरों का करीब 450 मीट्रिक टन रोजाना कचरा आता है, जिसका निस्तारण किया जा रहा है। इस कार्य में 100, 35, 16 व 4 एमएम 5 ट्रोमल मशीने कार्यरत हैं। सौ एमएम की एक ट्रोमल एमआरएफ सेंटर लगी हुई है। निगमायुक्त के साथ उप निगम आयुक्त अशोक कुमार, कार्यकारी अभियंता प्रियंका सैनी, सहायक अभियंता मदन मोहन गर्ग, मुख्य सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा तथा कनिष्ठ अभियंता राज कुमार मौजूद रहे।
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करनाल। निगमायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने शनिवार की शाम को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। निस्तारण प्रक्रिया को धीमा बताते हुए सुगम स्वच्छता एजेंसी प्रतिनिधियों को प्लांट की कार्य क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कचरे का वैज्ञानिक निपटान तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 का पालन सुनिश्चित किया जाए।
निगम आयुक्त ने प्लांट में सबसे पहले सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा केंद्र (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) को देखकर उसकी प्रकिया को समझा। उसके बाद प्लांट में एकत्र कूड़े-कचरे में से सॉलिड पदार्थों को अलग करने वाली प्री-सैग्रीगेशन मशीन, पोस्ट सैग्रीगेशन और जैविक खाद बनाने वाले रिफाईनमेंट सेक्शन में लगी मशीनों की कारगुजारी को देखा।
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सॉलिड वेस्ट प्लांट को चलाने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि व निगम के अधिकारियों से प्लांट की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि पोस्ट सैग्रीगेशन कचरे को एक दिन में ही खाद बनाने वाले रिफाइनमेंट सेक्शन में नहीं भेजा जाता, बल्कि इसे डि-कम्पोज़ की अवस्था में लाने के लिए कुछ दिनों तक परिसर में रखा जाता है। इस अवधि में इस पर केमिकल का स्प्रे किया जाता है, जिससे इसमें बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जो मिथेन के साथ मिलकर इसे कंपोस्ट में परिवर्तित होने योग्य बनाते हैं।
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निगमायुक्त ने आरडीएफ (रिफ्यूज़ड डिराईव्ड फ्यूल) सेक्शन को भी देखा। यहां प्री-सैग्रीगेशन से निकले कूड़े-कचरे में से बेकार रस्सी, कपड़ा, नारियल व लकड़ी के टूकड़े छांटे जाते हैं, जिन्हें आरडीएफ सेक्शन में लगी मशीनों में ले जाकर फ्यूल के बंडल बनाए जाते हैं, जो बायलरों, सीमेंट फैक्ट्रियों व ईंट के भठ्ठों में इस्तेमाल किए जाते हैं।
निगमायुक्त ने बताया कि असंध को छोड़कर करनाल जिले की छह नगरपालिकाओं तथा कुरुक्षेत्र, शाहबाद व लाडवा सहित कुल नौ शहरों का करीब 450 मीट्रिक टन रोजाना कचरा आता है, जिसका निस्तारण किया जा रहा है। इस कार्य में 100, 35, 16 व 4 एमएम 5 ट्रोमल मशीने कार्यरत हैं। सौ एमएम की एक ट्रोमल एमआरएफ सेंटर लगी हुई है। निगमायुक्त के साथ उप निगम आयुक्त अशोक कुमार, कार्यकारी अभियंता प्रियंका सैनी, सहायक अभियंता मदन मोहन गर्ग, मुख्य सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा तथा कनिष्ठ अभियंता राज कुमार मौजूद रहे।