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Karnal News: एनसीईआरटी की किताबें दरकिनार, निजी प्रकाशकों पर मेहरबान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Mar 2023 02:24 AM IST
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Bypassing NCERT books, mercy on private publishers
गगन तलवार
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करनाल। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में करीब एक सप्ताह का समय शेष है, अभी से स्कूलों की निजी पुस्तक प्रकाशकों पर मेहरबानी शुरू हो गई है। एनसीईआरटी की किताबों काे दरकिनार कर दिया गया है जबकि इन्हीं किताबों का लगाया जाना अनिवार्य है।

एनसीईआरटी की किताबों के अलावा निजी स्कूलों ने अपने स्तर पर निजी प्रकाशकों की किताबों के सेट भी तैयार कराए हैं। किताबों का प्रति सेट 500 रुपये कमीशन तय हुआ है, इतना ही नहीं पूरे स्कूल की किताबों पर 60 प्रतिशत तक का कमिशन अलग है, जिसका निजी प्रकाशक भुगतान कर रहे हैं। निजी स्कूलों में नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के कई विषयों की पुस्तकें निजी प्रकाशकों की रखी गई हैं। किताबों के सैंपल देखने के बाद इनका अधिकतम भुगतान मूल्य स्कूल और प्रकाशक की मनमर्जी से तय किया गया है। इनमें ज्यादातर किताबें ऐसी हैं, जो अपडेट नहीं है, पिछले कई वर्षों से एक ही पाठ्य सामग्री छप रही है। ऐसे में अभिभावकों की जेब पर भार पड़ने वाला है। उधर, शिक्षा विभाग का कहना है कि निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।
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स्कूल परिसर में किताबें की जा रही स्टॉक

शिक्षा विभाग के नियमानुसार किसी भी निजी स्कूल को परिसर में किताबें बेचने का नियम है न अनुमति। सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही स्कूल की लाइब्रेरी में रखी जा सकती हैं। ताकि जरूरतमंद विद्यार्थियों को उपलब्ध हो सकें। जानकारों का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबें इसलिए नहीं लगवाई जातीं, क्योंकि उसमें कमीशन नहीं बन पाता और प्रिंट रेट कम होता है। इन किताबों पर भी 15 प्रतिशत छूट देनी होती है।
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ऐसे कटती है अभिभावकों की जेब
निजी प्रकाशक की नर्सरी की एक किताब पर 220 रुपये का प्रिंट हैं। 50 प्रतिशत छूट पर 110 रुपये में ग्राहक को बेच सकते हैं जबकि दुकानदार इस पर महज 10 प्रतिशत तक ही छूट देगा। डीलर ने स्कूल को किताबें लगवाने के लिए पैसा दिया है। 10 प्रतिशत छूट के बाद 220 रुपये एमआरपी वाली किताब 198 रुपये में मिलेगी। इसी तरह नर्सरी की पांच किताबों के सेट की कीमत 300 या 400 होनी चाहिए, जिसे 800 या 1200 रुपये में बेचा जाएगा। --- (एक पुस्तक विक्रेता के मुताबिक)



केस स्टडी
केवल पैसे मांग रहे स्कूल खुद दे रहा किताबें-वर्दी

अभिभावक एकता संघ के महासचिव नवीन अग्रवाल और एडवोकेट संदीप राणा ने बताया कि कई नामी स्कूलों की छोटी कक्षाओं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए गए हैं। रिपोर्ट कार्ड के साथ ही विद्यार्थी के अगली कक्षा में ली जाने वाली फीस, दाखिला फीस, किताबें, वर्दी आदि के पूरे विवरण की पर्ची थमा दी गई है। अभिभावक को एकमुश्त भुगतान करना है। किताबें और वर्दी आदि के इंतजाम स्कूल करेगा। एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि ऐसे स्कूलों पर शिक्षा विभाग कार्रवाई करें।






हम स्कूलों की मनमानी नहीं होने देंगे। स्कूलों को केवल एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के ही निर्देश हैं। अभिभावक शिकायत करें, यदि कोई स्कूल नियम की अवहेलना करेगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी
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