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Karnal News: वट सावित्री व्रत कर सुहागिनें मांगेगी पति की दीर्घायु
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- आज सुबह 11.35 बजे से कल दोपहर 1.13 बजे तक रहेगी ज्येष्ठ पूर्णिमा
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। वट वृक्ष की पूजा का हिंदू धर्म में बहुत महत्व हैं। वट के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। 10 जून को सुबह महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी और वट वृक्ष की पूजा करेंगी। वट सावित्री व्रत को प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखतीं हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 11 जून को दोपहर एक बजकर 13 मिनट पर होगा। वट पूर्णिमा का व्रत 10 जून को रखा जाएगा।
श्री बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस व्रत को रखने से महिलाएं अपने पति के लिए सौभाग्य और समृद्धि लाने में सक्षम होती हैं। वट वृक्ष का तना विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है और भगवान शिव बरगद के पेड़ के ऊपरी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र पेड़ के नीचे पूजा करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्री कर्णेश्वरम महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित षष्टी बल्लभ ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह सावित्री ने अपने समर्पण से अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाई थीं, उसी तरह इस शुभ व्रत को रखने वाली विवाहित महिलाओं को एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। वट वृक्ष की पूजा का हिंदू धर्म में बहुत महत्व हैं। वट के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। 10 जून को सुबह महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखेंगी और वट वृक्ष की पूजा करेंगी। वट सावित्री व्रत को प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखतीं हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 11 जून को दोपहर एक बजकर 13 मिनट पर होगा। वट पूर्णिमा का व्रत 10 जून को रखा जाएगा।
श्री बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस व्रत को रखने से महिलाएं अपने पति के लिए सौभाग्य और समृद्धि लाने में सक्षम होती हैं। वट वृक्ष का तना विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है और भगवान शिव बरगद के पेड़ के ऊपरी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र पेड़ के नीचे पूजा करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। श्री कर्णेश्वरम महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित षष्टी बल्लभ ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह सावित्री ने अपने समर्पण से अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाई थीं, उसी तरह इस शुभ व्रत को रखने वाली विवाहित महिलाओं को एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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