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Karnal News: एमटीपी किट खरीद बेच व सेवन करना अपराध नहीं, मामले की सभी आरोपी बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमराज की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम 1971 के तहत दर्ज मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले में एक दंपती और केमिस्ट नरेश कुमार आरोपी थे। आदेश के अनुसार आरोपी महिला ने गर्भवती होने पर पहले से दो बच्चों को देखते हुए अपने पति की मदद से एमटीपी की दवाइयां खरीदी और उनका सेवन किया। इससे प्रेग्नेंसी समाप्त हुई। बाद में सुमन को ब्लीडिंग की समस्या हुई, जिस पर उन्होंने अस्पताल जाकर जांच करवाई। चिकित्सकों ने मामले को पुलिस के पास दर्ज करवा जांच शुरू करवाई।
जांच के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लिया और मेडिकल रिकॉर्ड जब्त किए। जांच पूरी होने पर चालान अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों को पेश किया, जिनमें पुलिस अधिकारी और चिकित्सक शामिल थे। ट्रायल में आरोपियों ने सभी आरोपों का खंडन किया और कोई रक्षा पक्ष पेश नहीं किया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एमटीपी अधिनियम केवल पंजीकृत चिकित्सक और अस्पतालों पर लागू होता है और वयस्क महिला अपनी सहमति से प्रेग्नेंसी समाप्त करा सकती है।
मामले में महिला एक वयस्क थीं और उन्होंने सहमति दी थी। इसके अलावा, आरोपी केमिस्ट नरेश कुमार के खिलाफ भी कोई ठोस सबूत नहीं था। हाईकोर्ट के पहले के निर्णयों के आधार पर एमटीपी किट बेचना अपराध नहीं है। इसलिए अदालत ने एसडीजेएम शाहाबाद के चार नवंबर 2022 के निर्णय में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी। सभी आरोपी बरी किए गए। अदालत ने उनकी जमानती बांड 50 हजार रुपये निर्धारित की और छह महीने तक लागू रहने का आदेश दिया।
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कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमराज की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम 1971 के तहत दर्ज मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले में एक दंपती और केमिस्ट नरेश कुमार आरोपी थे। आदेश के अनुसार आरोपी महिला ने गर्भवती होने पर पहले से दो बच्चों को देखते हुए अपने पति की मदद से एमटीपी की दवाइयां खरीदी और उनका सेवन किया। इससे प्रेग्नेंसी समाप्त हुई। बाद में सुमन को ब्लीडिंग की समस्या हुई, जिस पर उन्होंने अस्पताल जाकर जांच करवाई। चिकित्सकों ने मामले को पुलिस के पास दर्ज करवा जांच शुरू करवाई।
जांच के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लिया और मेडिकल रिकॉर्ड जब्त किए। जांच पूरी होने पर चालान अदालत में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों को पेश किया, जिनमें पुलिस अधिकारी और चिकित्सक शामिल थे। ट्रायल में आरोपियों ने सभी आरोपों का खंडन किया और कोई रक्षा पक्ष पेश नहीं किया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एमटीपी अधिनियम केवल पंजीकृत चिकित्सक और अस्पतालों पर लागू होता है और वयस्क महिला अपनी सहमति से प्रेग्नेंसी समाप्त करा सकती है।
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मामले में महिला एक वयस्क थीं और उन्होंने सहमति दी थी। इसके अलावा, आरोपी केमिस्ट नरेश कुमार के खिलाफ भी कोई ठोस सबूत नहीं था। हाईकोर्ट के पहले के निर्णयों के आधार पर एमटीपी किट बेचना अपराध नहीं है। इसलिए अदालत ने एसडीजेएम शाहाबाद के चार नवंबर 2022 के निर्णय में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी। सभी आरोपी बरी किए गए। अदालत ने उनकी जमानती बांड 50 हजार रुपये निर्धारित की और छह महीने तक लागू रहने का आदेश दिया।
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