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Karnal News: डेरे की जमीन के विवाद में दोनों पक्ष आमने-सामने
Sun, 05 Apr 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 05 Apr 2026 01:28 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। माता गेट स्थित डेरा बाबा परमाहंस पुरी की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। डेरे के महंत रमन पुरी ने आरोप लगाया है कि अखाड़ा संचालक द्वारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
महंत रमन पुरी ने चेतावनी दी है कि यदि मामला नहीं सुलझा तो वे 25 अप्रैल को बड़ा निर्णय लेंगे। उन्होंने बताया कि अखाड़ा संचालक को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। महंत का यह भी आरोप है कि फोन पर बातचीत के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और धमकी दी गई।
महंत के समर्थन में बाबा बिहारी दास मठ के महंत त्रिवेणी दास भी सामने आए हैं। उन्होंने अखाड़ा संचालक को चेतावनी देते हुए कहा कि डेरे की जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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वहीं दूसरी ओर, अखाड़ा संचालक हरिसिंह पहलवान ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह जमीन पट्टी अफगान की है और पिछले करीब 100 वर्षों से यहां अखाड़ा संचालित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि जमीन उनके नाम पर है और यहां खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। हरिसिंह पहलवान ने बताया कि अखाड़े के खर्च और बिजली आदि के लिए ही यहां दुकानें बनाई गई हैं। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हैं, जिससे विवाद बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
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कैथल। माता गेट स्थित डेरा बाबा परमाहंस पुरी की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। डेरे के महंत रमन पुरी ने आरोप लगाया है कि अखाड़ा संचालक द्वारा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
महंत रमन पुरी ने चेतावनी दी है कि यदि मामला नहीं सुलझा तो वे 25 अप्रैल को बड़ा निर्णय लेंगे। उन्होंने बताया कि अखाड़ा संचालक को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। महंत का यह भी आरोप है कि फोन पर बातचीत के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और धमकी दी गई।
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महंत के समर्थन में बाबा बिहारी दास मठ के महंत त्रिवेणी दास भी सामने आए हैं। उन्होंने अखाड़ा संचालक को चेतावनी देते हुए कहा कि डेरे की जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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वहीं दूसरी ओर, अखाड़ा संचालक हरिसिंह पहलवान ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह जमीन पट्टी अफगान की है और पिछले करीब 100 वर्षों से यहां अखाड़ा संचालित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि जमीन उनके नाम पर है और यहां खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। हरिसिंह पहलवान ने बताया कि अखाड़े के खर्च और बिजली आदि के लिए ही यहां दुकानें बनाई गई हैं। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हैं, जिससे विवाद बढ़ने की आशंका बनी हुई है।