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Karnal News: सावधान, सीवरेज के पानी में उगाई सब्जियां स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Oct 2025 01:35 AM IST
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Beware, vegetables grown in sewage water are dangerous for health
देव शर्मा
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करनाल। पिछले कई सालों से शहरों के आसपास के खेतों में सब्जियों की खेती बढ़ गई है। ये दूरस्थ खेतों से अधिक हरीभरी और चमकीली होती हैं। इसकी मुख्य वजह है सीवर के पानी से सिंचाई होना। इस पानी में कार्बनिक पदार्थों के साथ साथ नाइट्रोजन, पोटास, फास्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह सब्जियां उगाने के लिए अच्छी बात है। लेकिन इस पानी में भारी धातुएं, विषैले तत्वों के साथ विषाणुओं की उपस्थिति भी अधिक होती है। ऐसे में इन सब्जियों को खाने से मानव स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुंचता है। वैज्ञानिक इन सब्जियों को खाने के प्रति सावधान करते हैं।
वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि शहरों के आसपास उपचारित सीवरेज के पानी से पैदा होने वाली सब्जियों को बाजार से लाने के बाद उन्हें हल्के नमक पड़े गुनगुने पानी में जरूर डालें। दो से तीन बार धोएं, इसके बाद पकाएं। ऐसा करने से सब्जियों के खराब असर को कम किया जा सकता है। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल के वैज्ञानिक डॉ. एसके दुबे ने बताया कि जिस तरह देश में शहरीकरण बढ़ रहा है, उसी हिसाब से सीवरेज भी लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार व कई राज्य सरकारों ने सीवरेज को उपचारित कर सिंचाई योग्य बनाने के लिए बड़े-बड़े ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए हैं। परेशानी ये है कि ट्रीटमेंट प्लांट तो लग गए, लेकिन उनसे निकलने वाले उपचारित पानी की जांच को महत्व नहीं दिया जा रहा है। कैसा पानी निकल रहा है, इसकी निगरानी नहीं हो रही है। परिणाम ये है कि सीवरेज का पानी ज्यों का त्यों ही आगे बढ़ रहा है।
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डॉ. दुबे ने बताया कि सीवरेज के पानी में शौचालयों से निकलने वाले पानी की मात्रा अधिक होती है। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटास जैसे कई कार्बनिक तत्वों के साथ विषैले तत्वों व विषाणु भी बहुतायत में होते हैं। यही कारण है कि सीवरेज वाटर से सिंचित सब्जियां अधिक हरी-भरी और चमकीली होती हैं। यदि इन्हीं खेतों में चारा बोया जाता है, तो वह भी हराभरा होता है लेकिन पशु इस चारे को खाने से परहेज करते हैं। इस बारे में उन्होंने शोध किया है। चारे की पत्तियों में खतरनाक कीटाणु, विषाणु मिले। सब्जियों में ई. कोलाई (एस्चेरिचिया कोलाई) और फीकल कोलीफ़ॉर्म और अन्य विषाणु पाए गए। लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं होती और आदत के अनुसार बाजार में जाकर अधिक हरीभरी और चमकीली सब्जियों को खरीदते हैं।
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मानकों का किया जाए पालनडॉ. एसके दुबे ने बताया कि कच्ची खाई जाने वाली सब्जियां गाजर, मूली आदि और पत्ते वाली सब्जियां जैसे पालक, हरा धनिया, मूली आदि सीधे सीवरेज पानी के संपर्क में आते हैं। इस कारण इनमें ई. कोलाई (एस्चेरिचिया कोलाई) और फीकल कोलीफ़ॉर्म की मात्रा अधिक होती है। ये आमतौर पर जानवरों और मनुष्यों के मल में पाए जाते हैं। इससे मानव स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है। इस समस्या से तभी निजात पाई जा सकती है जब शहरों से निकलने वाले सीवरेज जल को पूर्णरूप से एसटीपी से गुजारा जाए, साथ ही एसटीपी में मानकों के आधार पर उपचारित करके ही छोड़ा जाए। एसटीपी से निकलने वाली की मानीटरिंग नियमित तरीके से की जानी चाहिए।
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