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Karnal News: मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से बचा सकती है जौ की रोटी
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- भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का दावा, जौ में गेहूं से कहीं अधिक पोषक तत्व शामिल
देव शर्मा
करनाल। मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से बचाने में जौ की रोटी कारगर साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जौ के नियमित खानपान से दूर होने के कारण लोगों को कई नई बीमारियों ने घेरा है। अब एक बार फिर मोटे अनाज की शृंखला में जौ की पैदावार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यदि जौ की रोटी, पूड़ी व अन्य व्यंजनों के रूप में नियमित भोजन में शामिल किया जाए तो कई बीमारियों से निजात पाई जा सकती है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के प्रधान वैज्ञानिक (जौ सुधार) डॉ.लोकेंद्र कुमार ने बताया कि 1965-66 के बाद हरितक्रांति आई तो देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड तोड़ हुआ। इसमें आईआईडब्ल्यूबीआर का अहम स्थान है, क्योंकि कई नई गेहूं की किस्में संस्थान ने दीं, लेकिन आगे बढ़ने की दौड़ में जौ पीछे छूट गया है, रकबा घटता चला गया। हालांकि पिछले साल से अब रकबा बढ़ने लगा है। हरियाणा में 2021-22 में 3.29 हजार हेक्टेयर था जो कि 2022-23 में बढ़कर 15.3 हजार हेक्टेयर हो गया। देशभर में जौ का रकबा 453.32 हजार हेक्टेयर था, जो 2022-23 में 617.59 हजार हेक्टेयर हो गया है। इसी के अनुपात में 13.71 लाख टन से बढ़कर 16.87 लाख टन पहुंच गई है। 2023-24 में जौ के रकबा में कम से कम 10 प्रतिशत इजाफा होने की संभावना है।
जौ की अपेक्षा गेहूं में पाये जाने वाले पोषक तत्व
तत्व गेहूं जौ-
- ग्लूटेन 4 प्रतिशत 8 प्रतिशत
- वीटा ग्लूकॉन 1.6 प्रतिशत 8 प्रतिशत
- प्रोटीन 12 प्रतिशत 15 प्रतिशत
- आयरन 40 पीपीएम 50 पीपीएम
- कैल्शियम 40 पीपीएम 50 पीपीएम
जौ के पोषण तत्व बीमारियों से करते हैं बचाव
ग्लूटेन की अधिकता आंतों को नुकसान पहुंचाती है, रक्त में वैक्ट्रीरिया, वायरस सीधे प्रवेश हो जाते हैं। जौ में वीटा क्लोकॉन की कम मात्रा आंतों को स्वस्थ रखती है, तीन सूक्ष्म फैटी एसिड बनते हैं, ब्यूटारिट, एसिटेट और प्रोपियोनेट, जो स्वास्थ्य के अमृत के समान होते हैं। जो मधुमेह को होने नहीं देते। मोटापा (कोलेस्ट्रॉल), कैंसर, हृदय रोगों से बचाव के साथ-साथ लिवर को संरक्षण प्रदान करते हैं। ये न्यूरोप्रोटेक्टिव भी होते हैं, इम्युनिटी बढ़ाकर करीब 24 बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके साथ-साथ मानव शरीर में जो खुशी प्रदान करने वाला हार्मोन सेरोटेनिन को भी बढ़ाता है।
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- डॉ. लोकेंद्र कुमार, प्रधान वैज्ञानिक (जौ सुधार), भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल
संस्थान ने इस साल जो नई किस्म की पहचान की है, उसका बीज तो 2024 में मिल पाएगा, लेकिन जौ की एक पुरानी किस्म गीतांजलि का बीज दिया गया है। जौ की बिजाई का सर्वोत्तम समय से 10 से 20 नवंबर माना जाता है, लेकिन पूरे नवंबर भी इसकी बिजाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जौ भोजन की थाली से बाहर होने के कारण लोगों के शरीर में कई बीमारियों ने प्रवेश किया है, अब एक बार फिर इसे भोजन की थाली में लाना आवश्यक है।
- डॉ. ओमबीर सिंह, प्रधान अन्वेषक जौ सुधार, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र, करनाल
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देव शर्मा
करनाल। मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से बचाने में जौ की रोटी कारगर साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जौ के नियमित खानपान से दूर होने के कारण लोगों को कई नई बीमारियों ने घेरा है। अब एक बार फिर मोटे अनाज की शृंखला में जौ की पैदावार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यदि जौ की रोटी, पूड़ी व अन्य व्यंजनों के रूप में नियमित भोजन में शामिल किया जाए तो कई बीमारियों से निजात पाई जा सकती है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के प्रधान वैज्ञानिक (जौ सुधार) डॉ.लोकेंद्र कुमार ने बताया कि 1965-66 के बाद हरितक्रांति आई तो देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड तोड़ हुआ। इसमें आईआईडब्ल्यूबीआर का अहम स्थान है, क्योंकि कई नई गेहूं की किस्में संस्थान ने दीं, लेकिन आगे बढ़ने की दौड़ में जौ पीछे छूट गया है, रकबा घटता चला गया। हालांकि पिछले साल से अब रकबा बढ़ने लगा है। हरियाणा में 2021-22 में 3.29 हजार हेक्टेयर था जो कि 2022-23 में बढ़कर 15.3 हजार हेक्टेयर हो गया। देशभर में जौ का रकबा 453.32 हजार हेक्टेयर था, जो 2022-23 में 617.59 हजार हेक्टेयर हो गया है। इसी के अनुपात में 13.71 लाख टन से बढ़कर 16.87 लाख टन पहुंच गई है। 2023-24 में जौ के रकबा में कम से कम 10 प्रतिशत इजाफा होने की संभावना है।
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जौ की अपेक्षा गेहूं में पाये जाने वाले पोषक तत्व
तत्व गेहूं जौ-
- ग्लूटेन 4 प्रतिशत 8 प्रतिशत
- वीटा ग्लूकॉन 1.6 प्रतिशत 8 प्रतिशत
- प्रोटीन 12 प्रतिशत 15 प्रतिशत
- आयरन 40 पीपीएम 50 पीपीएम
- कैल्शियम 40 पीपीएम 50 पीपीएम
जौ के पोषण तत्व बीमारियों से करते हैं बचाव
ग्लूटेन की अधिकता आंतों को नुकसान पहुंचाती है, रक्त में वैक्ट्रीरिया, वायरस सीधे प्रवेश हो जाते हैं। जौ में वीटा क्लोकॉन की कम मात्रा आंतों को स्वस्थ रखती है, तीन सूक्ष्म फैटी एसिड बनते हैं, ब्यूटारिट, एसिटेट और प्रोपियोनेट, जो स्वास्थ्य के अमृत के समान होते हैं। जो मधुमेह को होने नहीं देते। मोटापा (कोलेस्ट्रॉल), कैंसर, हृदय रोगों से बचाव के साथ-साथ लिवर को संरक्षण प्रदान करते हैं। ये न्यूरोप्रोटेक्टिव भी होते हैं, इम्युनिटी बढ़ाकर करीब 24 बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके साथ-साथ मानव शरीर में जो खुशी प्रदान करने वाला हार्मोन सेरोटेनिन को भी बढ़ाता है।
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- डॉ. लोकेंद्र कुमार, प्रधान वैज्ञानिक (जौ सुधार), भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल
संस्थान ने इस साल जो नई किस्म की पहचान की है, उसका बीज तो 2024 में मिल पाएगा, लेकिन जौ की एक पुरानी किस्म गीतांजलि का बीज दिया गया है। जौ की बिजाई का सर्वोत्तम समय से 10 से 20 नवंबर माना जाता है, लेकिन पूरे नवंबर भी इसकी बिजाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जौ भोजन की थाली से बाहर होने के कारण लोगों के शरीर में कई बीमारियों ने प्रवेश किया है, अब एक बार फिर इसे भोजन की थाली में लाना आवश्यक है।
- डॉ. ओमबीर सिंह, प्रधान अन्वेषक जौ सुधार, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र, करनाल