फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Azad overpowered the parties, defeated the giants

Karnal News: दलों पर भारी पड़े आजाद, दिग्गजों को दी शिकस्त

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2024 03:49 AM IST
विज्ञापन
Azad overpowered the parties, defeated the giants
- पार्टियों का भरोसा हारे पर जनता का जीते, नीलोखेड़ी से सर्वाधिक पांच, करनाल और इंद्री में दो-दो बार निर्दलीय जीते
विज्ञापन

- अब तक हुए 13 में से सात चुनावों में जीते आजाद प्रत्याशी, 1968 और 2000 में पांच में से दो-दो सीटों पर कब्जा
फ्लैश बैक
गगन तलवार
करनाल। हरियाणा गठन के बाद से हुए अब तक के चुनावों में सात बार ऐसा हुआ जब जिले की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। ये राजनीतिक दलों के दिग्गजों को पटखनी देकर विधानसभा पहुंचे। इनमें तीन नेता ऐसे रहे, जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो आजाद मैदान में उतरे।
खास बात यह है कि अब तक नौ बार आजाद विधायक बने प्रत्याशियों में से तीन ने पहली बार चुनावी मैदान में ताल ठोकते हुए जीत दर्ज की। बाद में उन्हें पार्टियों ने टिकट दिया। वहीं तीन प्रत्याशियों ने पार्टी का भरोसा टूटने के बाद बगावत करके चुनाव लड़ा तो जनता के भरोसे उन्होंने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को हरा दिया।
विज्ञापन

जिले में 1967 से लेकर अब तक हुए विधानसभा चुनावों में सात बार ऐसा हुआ है, जब निर्दलीय जीते। 1968 और 2000 का चुनाव ऐसा रहा जब पांच सीटों में से दो पर निर्दलीय जीते। सबसे ज्यादा नीलोखेड़ी में पांच बार तो वहीं इंद्री और करनाल से दो-दो बार आजाद प्रत्याशी चुने गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंद्री में दोनों बार भीमसेन मेहता व नीलोखेड़ी में चंदा सिंह और जय सिंह के सिर दो-दो बार जीत का ताज सजा। इनके समर्थन से बनी प्रदेश सरकार में इन्हें मंत्री और चेयरमैन जैसे पद नवाजे गए। 2019 में जीते धर्मपाल गोंदर वन विकास बोर्ड के चेयरमैन और इससे पहले भीमसेन मेहता मंत्री रहे।




तीनों विधानसभा क्षेत्रों में आजाद प्रत्याशियों के रोचक मुकाबले



करनाल विधानसभा क्षेत्र

- शांति आजाद जीतकर बनीं कांग्रेस का भरोसा : 1968 में शांति देवी ने क्षेत्र के पहले विधायक जनसंघ के राम लाल को 7.33 प्रतिशत मतों के अंतर से हराया। 1972 में जनसंघ के रामलाल ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ी शांति देवी को 2.16 प्रतिशत वोटों के अंतर से पटखनी दी। 1982 में भाजपा के रामलाल को हराकर कांग्रेस की शांति ने 23.66 प्रतिशत के अंतर से जीतकर वापसी की।

- पार्टी ने नकारा तो आजाद जीते जयप्रकाश : 1991 में कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने जयप्रकाश ने 1996 में हार के बाद 2000 में आजाद चुनाव लड़ा। वे 4.43 प्रतिशत के अंतर से भाजपा के सतीश कालड़ा से जीते। जबकि पहली बार विधायक बनने पर भाजपा के चेतनदास को 27.86 प्रतिशत वोट के अंतर से हराया था।

- दो बार दूसरे नंबर पर रहे जयप्रकाश : 2005 में आजाद मैदान में उतरे जयप्रकाश को कांग्रेस की सुमिता सिंह ने 33.82 और 2014 में भाजपा के मनोहर लाल ने 45.64 प्रतिशत वोट के अंतर से पटखनी दी।







नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र

- आजाद जीते पर पार्टी से हारे चंदा : 1967 के चुनाव में जनसंघ के साहिब राम से 4.18 प्रतिशत के अंतर से हारे आजाद प्रत्याशी चंदा सिंह को 1968 में 21.55 के अंतर से जीत मिली। 1972 के चुनाव में वे कांग्रेस की टिकट पर उतरे और महज 0.87 प्रतिशत के अंतर से हारे। इसके बाद 1982 में फिर आजाद लड़ विधायक रहे कांग्रेस के शिव राम को 7.34 के अंतर से हराया।

- आजाद जीते तो मिला हाथ का साथ : 1987 और 1991 में आजाद प्रत्याशी जय सिंह जीते। 1987 में लोकदल के देवी सिंह को 5.50 और 1991 में जनता पार्टी के ईश्वर सिंह को 18.41 प्रतिशत के अंतर से हराया। इसके बाद 1996 और 2005 में वे कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते।

- गोंदर ने बागी होकर कमल को दी शिकस्त : 2019 में भाजपा से बागी होकर आजाद मैदान में उतरे धर्मपाल गोंदर 1.66 प्रतिशत के अंतर से चुनाव जीते। उन्होंने विधायक भाजपा के भगवानदास कबीरपंथी को हराया।




3. इंद्री विधानसभा क्षेत्र

दो बार आजाद जीते और दो बार हारे भीम : 1996 और 2000 के चुनाव में आजाद प्रत्याशी भीमसेन जीते। 1996 में उन्होंने कांग्रेस के देसराज को 4.38 प्रतिशत के अंतर से और 2000 के चुनाव में इनेलो के बालकिशन को महज 0.87 के अंतर से हराया। 2005 के चुनाव में भीमसेन आजाद मैदान में उतर कांग्रेस के राकेश कुमार से 17.01 प्रतिशत और 2009 में इनेलो के अशोक कश्यप से 8.15 प्रतिशत वोट के अंतर से हारे। 1991 में अपने पहले चुनाव में एचवीपी की जानकी देवी को टक्कर देते हुए भी महज 0.62 प्रतिशत वोट के अंतर से हारे।

- 2019 में पूर्व विधायक राकेश कांबोज ने भी भाजपा के रामकुमार कश्यप को टक्कर दी थी और 5.23 प्रतिशत के अंतर से हारकर दूसरे नंबर पर रहे।





जय सिंह के नाम बड़ी तो भीम के नाम छोटी जीत का रिकॉर्ड

चुनाव
विस क्षेत्र
विजेता
जीते
प्रतिशत

1968 नीलोखेड़ी
चंदा सिंह
6538
04.18

1968
करनाल
शांति प्रसाद
2363
07.33

1982 नीलोखेड़ी
चंदा सिंह
3733
07.34

1987 नीलोखेड़ी
जय सिंह
3686
05.50

1991 नीलोखेड़ी
जय सिंह
12819
18.41

1996
इंद्री
भीम सेन
4232
04.38

2000
इंद्री
भीम सेन
834
00.87

2000
करनाल
जयप्रकाश
3733
04.43

2019 नीलोखेड़ी
धर्मपाल गोंदर
2222
01.66



एक नजर-

- तीन नेता टिकट पर हारे तो बाद में आजाद लड़कर पहुंचे विधानसभा

- तीन नेता आजाद जीते पर टिकट लेकर लड़ने पर हारे

- असंध, घरौंडा, जुंडला और इंद्री से कभी आजाद नहीं जीते

- चंदा सिंह, जय सिंह और भीम सेन दो-दो बार निर्दलीय जीते
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed