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Karnal News: नाम की ऑटोमैटिक व्यवस्था.. अब भी पटवारियों के भरोसे इंतकाल, 7692 फाइलें अटकीं
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गगन तलवार
करनाल। राजस्व सुधारों के तहत लागू की गई ऑटो म्यूटेशन (ऑटोमैटिक इंतकाल) व्यवस्था केवल नाम की ऑटोमैटिक नजर आ रही है। क्योंकि इस व्यवस्था में भी इंतकाल का काम पटवारियों के भरोसे है। ऐसे में इंतकाल की 7692 फाइलें अटकी हुई हैं। इससे न केवल आम लोगों को तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बल्कि बैंकिंग और लोन संबंधी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
बड़ी बात तो यह है कि इनमें से 5825 मामले अभी एंट्री लेवल पर ही हैं यानी पटवारियों के लॉगइन पर हैं और उन्होंने इन्हें देखा भी नहीं है। ऐसे में रजिस्ट्री के बाद तुरंत एक क्लिक से इंतकाल की प्रक्रिया शुरू करने वाला पोर्टल भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। जबकि सरकारी व्यवस्था के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद इंतकाल की प्रक्रिया अब डिजिटल सिस्टम के जरिए अधिकतम 10 से 11 दिनों में स्वत: पूरी होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में अधिकांश फाइलें पटवारियों के पास ही अटकी हैं।
आंकड़ों पर निगाह डालें तो जिले में कुल आठ तहसील और उपतहसील हैं, इनमें से महज 993 मामले ही पटवारियों की ओर से प्रविष्टि की गई है, इनमें से 303 का सत्यापन सीआरओ स्तर पर हो चुका है और महज 571 को स्वीकृति मिली है। अन्य सभी फाइलें अभी प्रक्रिया शुरू होने के इंतजार में हैं।
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ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था
ऑटो म्यूटेशन एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें रजिस्ट्री के बाद इंतकाल की फाइल स्वत: सिस्टम के जरिए अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ती है। इसका मकसद है कि कोई भी फाइल एक स्तर पर लंबित न रहे और निर्धारित समय में अंतिम निर्णय हो जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने का दावा किया जा रहा है।
नई व्यवस्था-
- रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन पटवारी के लॉग इन में रहेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए 4 दिन का समय दिया जाएगा।
- 5वें दिन यदि पटवारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो म्यूटेशन स्वत: कानूनगो के लॉगइन में चली जाएगी। कार्रवाई के लिए 2 दिन का समय दिया जाएगा।
- 7वें दिन म्यूटेशन स्वत: सीआरओ के लॉगइन में फॉरवर्ड हो जाएगी। यहां कार्रवाई के लिए 4 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
- 11वें दिन तक यदि निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो म्यूटेशन स्वत: जमाबंदी में शामिल हो जाएगी।
-- --
स्थिति : करनाल तहसील में सर्वाधिक 2001 मामले लंबित, उपतहसीलों के भी खराब हालात
तहसील
लंबित
पटवारी
प्रविष्टि
सत्यापित
स्वीकृत
करनाल
2001
1542
284
69
106
असंध
1972
1386
467
62
57
घरौंडा
1082
843
88
34
117
इंद्री
689
513
53
08
115
निगदू
565
436
13
60
56
नीलोखेड़ी
496
409
08
00
79
बल्ला
478
372
29
63
14
निसिंग
409
324
51
07
27
कुल
7692
5825
993
303
571
सरकार का उद्देश्य राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों को राहत देने के लिए किया जा रहा है, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रारंभिक चरण में तकनीकी समस्या आ रही है, उसे तुरंत दूर किया जाएगा। - डॉ. आनंद शर्मा, डीसी
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करनाल। राजस्व सुधारों के तहत लागू की गई ऑटो म्यूटेशन (ऑटोमैटिक इंतकाल) व्यवस्था केवल नाम की ऑटोमैटिक नजर आ रही है। क्योंकि इस व्यवस्था में भी इंतकाल का काम पटवारियों के भरोसे है। ऐसे में इंतकाल की 7692 फाइलें अटकी हुई हैं। इससे न केवल आम लोगों को तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बल्कि बैंकिंग और लोन संबंधी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
बड़ी बात तो यह है कि इनमें से 5825 मामले अभी एंट्री लेवल पर ही हैं यानी पटवारियों के लॉगइन पर हैं और उन्होंने इन्हें देखा भी नहीं है। ऐसे में रजिस्ट्री के बाद तुरंत एक क्लिक से इंतकाल की प्रक्रिया शुरू करने वाला पोर्टल भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। जबकि सरकारी व्यवस्था के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद इंतकाल की प्रक्रिया अब डिजिटल सिस्टम के जरिए अधिकतम 10 से 11 दिनों में स्वत: पूरी होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में अधिकांश फाइलें पटवारियों के पास ही अटकी हैं।
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आंकड़ों पर निगाह डालें तो जिले में कुल आठ तहसील और उपतहसील हैं, इनमें से महज 993 मामले ही पटवारियों की ओर से प्रविष्टि की गई है, इनमें से 303 का सत्यापन सीआरओ स्तर पर हो चुका है और महज 571 को स्वीकृति मिली है। अन्य सभी फाइलें अभी प्रक्रिया शुरू होने के इंतजार में हैं।
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ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था
ऑटो म्यूटेशन एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें रजिस्ट्री के बाद इंतकाल की फाइल स्वत: सिस्टम के जरिए अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ती है। इसका मकसद है कि कोई भी फाइल एक स्तर पर लंबित न रहे और निर्धारित समय में अंतिम निर्णय हो जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने का दावा किया जा रहा है।
नई व्यवस्था-
- रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन पटवारी के लॉग इन में रहेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए 4 दिन का समय दिया जाएगा।
- 5वें दिन यदि पटवारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो म्यूटेशन स्वत: कानूनगो के लॉगइन में चली जाएगी। कार्रवाई के लिए 2 दिन का समय दिया जाएगा।
- 7वें दिन म्यूटेशन स्वत: सीआरओ के लॉगइन में फॉरवर्ड हो जाएगी। यहां कार्रवाई के लिए 4 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
- 11वें दिन तक यदि निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो म्यूटेशन स्वत: जमाबंदी में शामिल हो जाएगी।
स्थिति : करनाल तहसील में सर्वाधिक 2001 मामले लंबित, उपतहसीलों के भी खराब हालात
तहसील
लंबित
पटवारी
प्रविष्टि
सत्यापित
स्वीकृत
करनाल
2001
1542
284
69
106
असंध
1972
1386
467
62
57
घरौंडा
1082
843
88
34
117
इंद्री
689
513
53
08
115
निगदू
565
436
13
60
56
नीलोखेड़ी
496
409
08
00
79
बल्ला
478
372
29
63
14
निसिंग
409
324
51
07
27
कुल
7692
5825
993
303
571
सरकार का उद्देश्य राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों को राहत देने के लिए किया जा रहा है, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रारंभिक चरण में तकनीकी समस्या आ रही है, उसे तुरंत दूर किया जाएगा। - डॉ. आनंद शर्मा, डीसी