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Karnal News: 20 लाख की रिश्वत मांगने में कंपनी निदेशक समेत तीन की अग्रिम जमानत खारिज
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20 लाख की रिश्वत मांगने में कंपनी निदेशक समेत तीन की अग्रिम जमानत खारिज
मधुबन स्थित एफएसएल की उप निदेशक भी हैं आरोपी, मामला उजागर होने के बाद गईं छुट्टी पर
निविदा आवंटित करने के लिए मध्यस्थता कर रही कंपनी की ओर से मांगी गई थी रकम
11 लाख का हो चुका था भुगतान, पूरी रकम के लिए उपनिदेशक की ओर से दबाव बनाने का आरोप
डीएनए पीसीआर किट की खरीद में भ्रष्टाचार का है मामला, फिलहाल की जा रही जांच पड़ताल
संजू कुमार
करनाल। डीएनए पीसीआर किट की खरीद के लिए निविदा आवंटित करने के एवज में 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपियों में दिल्ली की माइजेन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, सेल्स मैनेजर और एक अन्य शामिल हैं। विदित हो कि इसमें मधुबन स्थित एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की उप निदेशक डॉ. अनीता कादियान भी आरोपी हैं। इस मामले में कुछ दिन पहले एंटी करप्शन ब्यूराे ने उप निदेशक और कंपनी संचालकों समेत चार लोगों पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
विदित हो कि गुरुग्राम की थर्मा फिशर कंपनी को निविदा आवंटित करने के लिए मध्यस्थता कर रही कंपनी के संचालकों की ओर से मधुबन स्थित एफएसएल की उपनिदेशक के नाम पर 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। आरोप है कि मध्यस्थता कर रही दिल्ली की कंपनी संचालकों द्वारा उपनिदेशक को 11 लाख रुपये दिए जा चुके थे, जबकि उप निदेशक की ओर से पूरी रकम एडवांस में देने का दबाव बनाया जा रहा था।
मामले में शिकायतकर्ता कोई और नहीं बल्कि डीएनए विभाग की न्याय वैदिक प्रयोगशाला के सहायक निदेशक डाॅ. राजीव क्वात्रा ही थे। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और विभाग के निदेशक को शिकायत प्रेषित की थी। इसके बाद गृहमंत्री के निर्देश पर एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराई गई। इस दौरान शिकायतकर्ता ने एसआईटी टीम को रिकार्डिंग और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। जांच के दौरान मध्यस्थता करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपने बयान में डिप्टी डॉयरेक्टर को रिश्वत देने की बात से इनकार किया था। जांच से संतुष्ट न होने के बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद उपनिदेशक और मध्यस्थता करने वाली कंपनी के निदेशक नीरज, ऑपरेशन सेल्स मैनेजर बृज सिंह, एक अन्य कंपनी के प्रतिनिधि चंद्रभानू के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज किया था। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले में मध्यस्थता करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। उधर, सूत्रों का कहना है कि मामला उजागर होने के बाद मधुबन स्थित एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की उप निदेशक डॉ. अनीता कादियान करीब एक माह की छुट्टी पर चली गई हैं।
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- डीएनए पीसीआर किट खरीद के मामले में दिल्ली की कंपनी संचालकों की ओर से अग्रिम जमानत के लिए करनाल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद मंगलवार को आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को न्यायलय ने खारिज कर दिया है।
- जंगबहादुर सिंह, एडीए करनाल न्यायालय
संवाद
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मधुबन स्थित एफएसएल की उप निदेशक भी हैं आरोपी, मामला उजागर होने के बाद गईं छुट्टी पर
निविदा आवंटित करने के लिए मध्यस्थता कर रही कंपनी की ओर से मांगी गई थी रकम
11 लाख का हो चुका था भुगतान, पूरी रकम के लिए उपनिदेशक की ओर से दबाव बनाने का आरोप
डीएनए पीसीआर किट की खरीद में भ्रष्टाचार का है मामला, फिलहाल की जा रही जांच पड़ताल
संजू कुमार
करनाल। डीएनए पीसीआर किट की खरीद के लिए निविदा आवंटित करने के एवज में 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपियों में दिल्ली की माइजेन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, सेल्स मैनेजर और एक अन्य शामिल हैं। विदित हो कि इसमें मधुबन स्थित एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की उप निदेशक डॉ. अनीता कादियान भी आरोपी हैं। इस मामले में कुछ दिन पहले एंटी करप्शन ब्यूराे ने उप निदेशक और कंपनी संचालकों समेत चार लोगों पर केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
विदित हो कि गुरुग्राम की थर्मा फिशर कंपनी को निविदा आवंटित करने के लिए मध्यस्थता कर रही कंपनी के संचालकों की ओर से मधुबन स्थित एफएसएल की उपनिदेशक के नाम पर 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। आरोप है कि मध्यस्थता कर रही दिल्ली की कंपनी संचालकों द्वारा उपनिदेशक को 11 लाख रुपये दिए जा चुके थे, जबकि उप निदेशक की ओर से पूरी रकम एडवांस में देने का दबाव बनाया जा रहा था।
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मामले में शिकायतकर्ता कोई और नहीं बल्कि डीएनए विभाग की न्याय वैदिक प्रयोगशाला के सहायक निदेशक डाॅ. राजीव क्वात्रा ही थे। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और विभाग के निदेशक को शिकायत प्रेषित की थी। इसके बाद गृहमंत्री के निर्देश पर एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराई गई। इस दौरान शिकायतकर्ता ने एसआईटी टीम को रिकार्डिंग और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। जांच के दौरान मध्यस्थता करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपने बयान में डिप्टी डॉयरेक्टर को रिश्वत देने की बात से इनकार किया था। जांच से संतुष्ट न होने के बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद उपनिदेशक और मध्यस्थता करने वाली कंपनी के निदेशक नीरज, ऑपरेशन सेल्स मैनेजर बृज सिंह, एक अन्य कंपनी के प्रतिनिधि चंद्रभानू के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज किया था। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले में मध्यस्थता करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। उधर, सूत्रों का कहना है कि मामला उजागर होने के बाद मधुबन स्थित एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की उप निदेशक डॉ. अनीता कादियान करीब एक माह की छुट्टी पर चली गई हैं।
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- डीएनए पीसीआर किट खरीद के मामले में दिल्ली की कंपनी संचालकों की ओर से अग्रिम जमानत के लिए करनाल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद मंगलवार को आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को न्यायलय ने खारिज कर दिया है।
- जंगबहादुर सिंह, एडीए करनाल न्यायालय
संवाद