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Karnal News: करोड़ों खर्च कर दर्शनीय बना प्राचीन पंचदेव तीर्थ
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मूनक। पौराणिक मान्यताओं वाला पाढा गांव का पंचदेव तीर्थ 29 एकड़ में फैला है। यह कुरुक्षेत्र के 48 कोस की परिक्रमा में शामिल है। करोड़ों रुपये खर्च करके हरियाणा सरकार ने इसे दर्शनीय बना दिया है। मान्यता ये है कि तीर्थ कुंड में स्नान करने से चर्मरोग ठीक हो जाते हैं।
करनाल शहर से 29 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर में भगवान शिव के दरबार हैं। बताते हैं कि यहां कालांतर में शिव के साथ साथ सूर्य, शक्ति, विष्णु एवं गणेश के मंदिर स्थापित थे, जो किन्हीं कारणों से लुप्त हो गए हैं। इसी कारण यह स्थान पंच देवों का स्थान रहा है। मौजूदा समय में ये एक शिव प्राचीन मंदिर है। मां दुर्गा, भगवान परशुराम का भी मंदिर इस स्थान पर बना हुआ है। बताते हैं कि पंचदेव तीर्थ में रामकुंडी, श्योरगढी एवं डेरा संतराम भी है, जो कभी तीन प्रमुख देवताओं के उपासना सफल रहे होंगे।
मूनक खंड के सरपंच प्रधान दीपक पाढा ने बताया कि इस तीर्थ पर ब्रह्म सरोवर की तरह आरती होती है। लक्ष्य ये है कि हम सभी तीर्थ को हरा भरा बनाएं और घाटों पर लाइट लगाएंगे। इसमें महिलाओं का घाट अलग बना हुआ है। इसकी चारों तरफ पत्थर लगवा कर पक्का कराएंगे ताकि मिट्टी का कटाव न हो और कुछ दूरियों पर चेयर लगाएंगे। यह हमारे गांव की शोभा है जितना हो सकेगा इसका कार्य किया जाएगा।
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कार्तिक माह में किया जाता है स्नान
गांव निवासी राजेश ने बताया कि मान्यता है कि इसके जल में नहाने से चर्म रोग की बीमारियां दूर होती हैं। इसमें जल की व्यवस्था सोडी माइनर से सीधा कनेक्शन है। यह जल साफ व स्वच्छ है, जो कुरुक्षेत्र तीर्थ की मान्यता है। वहीं, इस तीर्थ की भी मान्यता है। यहां पर कार्तिक मास में महिलाएं गीत गाती हुई आती हैं और इसमें पूरा महीना स्नान करती हैं और सूर्य से अर्घ्य देकर अपने परिवार के कष्टों को दूर करने की कामनाएं करते हैं।
ग्रामवासी अनिल कुमार पंच ने बताया कि जनसंपर्क विभाग की तरफ से हरियाणवी संस्कृति के कार्यक्रम किए गए और हर रोज आरती भी की जाती है। इसमें डेरा सतनाम, रामकुंडी, श्योरगढी सभी का अपना महत्व है। इसके नजदीक श्मशान घाट भी हैं यहां पर मनुष्य के मृत्यु के बाद फूल नहीं उठाए जाते और पंचतीर्थ में ही प्रवाहित किए जाते हैं। सुबह शाम पुरुष महिलाएं बच्चे इसके चारों तरफ घूमते हैं और शहर भी करते हैं।
करनाल शहर से 29 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर में भगवान शिव के दरबार हैं। बताते हैं कि यहां कालांतर में शिव के साथ साथ सूर्य, शक्ति, विष्णु एवं गणेश के मंदिर स्थापित थे, जो किन्हीं कारणों से लुप्त हो गए हैं। इसी कारण यह स्थान पंच देवों का स्थान रहा है। मौजूदा समय में ये एक शिव प्राचीन मंदिर है। मां दुर्गा, भगवान परशुराम का भी मंदिर इस स्थान पर बना हुआ है। बताते हैं कि पंचदेव तीर्थ में रामकुंडी, श्योरगढी एवं डेरा संतराम भी है, जो कभी तीन प्रमुख देवताओं के उपासना सफल रहे होंगे।
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मूनक खंड के सरपंच प्रधान दीपक पाढा ने बताया कि इस तीर्थ पर ब्रह्म सरोवर की तरह आरती होती है। लक्ष्य ये है कि हम सभी तीर्थ को हरा भरा बनाएं और घाटों पर लाइट लगाएंगे। इसमें महिलाओं का घाट अलग बना हुआ है। इसकी चारों तरफ पत्थर लगवा कर पक्का कराएंगे ताकि मिट्टी का कटाव न हो और कुछ दूरियों पर चेयर लगाएंगे। यह हमारे गांव की शोभा है जितना हो सकेगा इसका कार्य किया जाएगा।
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कार्तिक माह में किया जाता है स्नान
गांव निवासी राजेश ने बताया कि मान्यता है कि इसके जल में नहाने से चर्म रोग की बीमारियां दूर होती हैं। इसमें जल की व्यवस्था सोडी माइनर से सीधा कनेक्शन है। यह जल साफ व स्वच्छ है, जो कुरुक्षेत्र तीर्थ की मान्यता है। वहीं, इस तीर्थ की भी मान्यता है। यहां पर कार्तिक मास में महिलाएं गीत गाती हुई आती हैं और इसमें पूरा महीना स्नान करती हैं और सूर्य से अर्घ्य देकर अपने परिवार के कष्टों को दूर करने की कामनाएं करते हैं।
ग्रामवासी अनिल कुमार पंच ने बताया कि जनसंपर्क विभाग की तरफ से हरियाणवी संस्कृति के कार्यक्रम किए गए और हर रोज आरती भी की जाती है। इसमें डेरा सतनाम, रामकुंडी, श्योरगढी सभी का अपना महत्व है। इसके नजदीक श्मशान घाट भी हैं यहां पर मनुष्य के मृत्यु के बाद फूल नहीं उठाए जाते और पंचतीर्थ में ही प्रवाहित किए जाते हैं। सुबह शाम पुरुष महिलाएं बच्चे इसके चारों तरफ घूमते हैं और शहर भी करते हैं।