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Karnal News: सदा खुश रहो मेरी प्यारी बहन, तेरी रक्षा करूंगा मैं बन धरती गगन...
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- जिमखाना क्लब में आयोजित कारवाने-अदब में रचनाकारों ने पेश की अपनी रचनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिमखाना क्लब में रविवार को कारवाने-अदब करनाल (शायरों की अदबी संस्था) की महफिल सजी। जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी। अंजू शर्मा ने कहा, रे हठ को पूरा करने, यमराज धरा पर आते हैं...। कवि डाॅ. एसके शर्मा ने कहा, तुझे अपने दिल में छिपा के रखूं ये है तमन्ना मेरी, तुझे हर फिक्रो गम से बचा कर रखूं ये है तमन्ना मेरी...।
कवि भारत भूषण वर्मा ने कहा, भाई-बहन के प्यार का रिश्ता है अनमोल, ‘भूषण’ इसके मोल को सका है तोल...। कवि ओम बनमाली ने कहा, भीलनी के झूठे बेर, आज के रावण भी खाते हैं...। कवि जितेंद्र ने कहा, वशिष्ठ झूठ बोलत पाप लगत, देवत झूठे ज्ञान ...। कवि डॉ. कमर रईस ने कहा, तू डरना वक्त से हर वक्त, न जाने कब वो क्या कर दे...।
कवि सुरेश राणा ने कहा, गर हो मुहब्बत तो जताया कर, नशीले नयनों में डूब जाया कर..। कवि जगमाल राणा ने कहा, इश्क वाले जफा से डरते हैं...। कवि शकील जठेड़ी ने कहा, जितना पावन बहन-भाई का प्यार...। कवि इकबाल पानीपती ने कहा, हाले दिल रकीबो को यार क्या सुनाएं हम...।
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कवि हरबंस ने कहा, कैसे-कैसे ख्याल आने लग गए...। कवि कमलेश कुमार ने कहा, इंसान ने इंसान का ये क्या सिला दिया...। कवि मनोज ने कहा, जीरो डिग्री सेल्सियस पर ढाल बना रहे हैं नौजवान...। कवि रामेश्वर ने कहा, जब अंधेरे ने मेरा जीना मुहाल कर दिया...। कवि प्रवीण ने कहा, सदा खुश रहो मेरी प्यारी बहन, तेरी रक्षा करूंगा मैं बन धरती गगन...। कवि धर्मेन्द्र ने कहा, कर रहा क्यूं आदमी अभिमान, जब ठिकाना आखिरी श्मशान है...।
कवि कृष्ण कुमार ने कहा, सच बोला, भरे बाजार बोला...। कवि महावीर शास्त्री ने कहा, मैंने हर दौर में हर नस्ल के काबिल देखे...। कवि सरोज सिंह ने कहा, टूटे दिल में रवां रवां कर देंगे...। कवि राजन गांधी ने कहा, जिंदगी क्या है इक कहानी है...। कवि प्रेमपाल ने कहा बेशक शब्दों का अभाव है मेरे पास...। कवि आशीष बैंसन ने कहा, आग लगी जब घर पर, सोचा के सब जल गया..। महफिल की अध्यक्षता अंबाला से पहुंचे ओम बनमाली, दिल्ली से पहुंचे शैलेंद्र कुमार रहे। आशीर्वचन आचार्य महावीर शास्त्री ने दिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिमखाना क्लब में रविवार को कारवाने-अदब करनाल (शायरों की अदबी संस्था) की महफिल सजी। जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी। अंजू शर्मा ने कहा, रे हठ को पूरा करने, यमराज धरा पर आते हैं...। कवि डाॅ. एसके शर्मा ने कहा, तुझे अपने दिल में छिपा के रखूं ये है तमन्ना मेरी, तुझे हर फिक्रो गम से बचा कर रखूं ये है तमन्ना मेरी...।
कवि भारत भूषण वर्मा ने कहा, भाई-बहन के प्यार का रिश्ता है अनमोल, ‘भूषण’ इसके मोल को सका है तोल...। कवि ओम बनमाली ने कहा, भीलनी के झूठे बेर, आज के रावण भी खाते हैं...। कवि जितेंद्र ने कहा, वशिष्ठ झूठ बोलत पाप लगत, देवत झूठे ज्ञान ...। कवि डॉ. कमर रईस ने कहा, तू डरना वक्त से हर वक्त, न जाने कब वो क्या कर दे...।
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कवि सुरेश राणा ने कहा, गर हो मुहब्बत तो जताया कर, नशीले नयनों में डूब जाया कर..। कवि जगमाल राणा ने कहा, इश्क वाले जफा से डरते हैं...। कवि शकील जठेड़ी ने कहा, जितना पावन बहन-भाई का प्यार...। कवि इकबाल पानीपती ने कहा, हाले दिल रकीबो को यार क्या सुनाएं हम...।
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कवि हरबंस ने कहा, कैसे-कैसे ख्याल आने लग गए...। कवि कमलेश कुमार ने कहा, इंसान ने इंसान का ये क्या सिला दिया...। कवि मनोज ने कहा, जीरो डिग्री सेल्सियस पर ढाल बना रहे हैं नौजवान...। कवि रामेश्वर ने कहा, जब अंधेरे ने मेरा जीना मुहाल कर दिया...। कवि प्रवीण ने कहा, सदा खुश रहो मेरी प्यारी बहन, तेरी रक्षा करूंगा मैं बन धरती गगन...। कवि धर्मेन्द्र ने कहा, कर रहा क्यूं आदमी अभिमान, जब ठिकाना आखिरी श्मशान है...।
कवि कृष्ण कुमार ने कहा, सच बोला, भरे बाजार बोला...। कवि महावीर शास्त्री ने कहा, मैंने हर दौर में हर नस्ल के काबिल देखे...। कवि सरोज सिंह ने कहा, टूटे दिल में रवां रवां कर देंगे...। कवि राजन गांधी ने कहा, जिंदगी क्या है इक कहानी है...। कवि प्रेमपाल ने कहा बेशक शब्दों का अभाव है मेरे पास...। कवि आशीष बैंसन ने कहा, आग लगी जब घर पर, सोचा के सब जल गया..। महफिल की अध्यक्षता अंबाला से पहुंचे ओम बनमाली, दिल्ली से पहुंचे शैलेंद्र कुमार रहे। आशीर्वचन आचार्य महावीर शास्त्री ने दिए।