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Karnal News: पढ़ाई के साथ बच्चों के मन की भी होगी परख, सीबीएसई स्कूलों के शिक्षक साल में दो बार लेंगे प्रशिक्षण

Mon, 02 Mar 2026 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Mon, 02 Mar 2026 02:23 AM IST
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Along with studies, the minds of children will also be tested, teachers of CBSE schools will undergo training twice a year.
करनाल। जिले के सीबीएसई स्कूलों में अब केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा परिणाम पर ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी बराबर ध्यान दिया जाएगा। सभी शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी वर्ष में कम से कम दो बार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेष प्रशिक्षण लेंगे।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निर्देशों के बाद स्कूलों ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। इसमें विद्यार्थियों के व्यवहारिक संकेतों को समझने, संवाद कौशल विकसित करने और संवेदनशील परिस्थितियों में सही प्रतिक्रिया देने के सही तरीके सिखाए जाएंगे। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया है। इसके तहत तनाव, अवसाद, नशे की प्रवृत्ति और आत्मघाती विचारों जैसे गंभीर मुद्दों को शुरुआती स्तर पर पहचानकर बच्चों को सुरक्षित और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। हर विद्यालय मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों, कार्यशालाओं और सहायता मामलों का संकलित विवरण तैयार कर बोर्ड को भेजेगा।
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- अभिभावकों के लिए भी होंगे जागरूकता कार्यक्रम

विद्यालयों में अभिभावकों के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम होंगे। प्रत्येक स्कूल मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों का वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करेगा, जिसमें प्रशिक्षण सत्र, रेफरल मामलों और लाभांवित विद्यार्थियों का विवरण शामिल होगा। साथ ही खेल, कला, व्यक्तित्व विकास गतिविधियों और नियमित करियर काउंसलिंग को भी शैक्षणिक ढांचे का हिस्सा बनाया जाएगा। रिपोर्ट अभिभावकों के साथ साझा की जाएगी। अब पेरेंट्स-टीचर मीटिंग सिर्फ रिपोर्ट कार्ड तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि मन की रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी। जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए काउंसलर से निजी मुलाकात की व्यवस्था रहेगी। परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया का समय-समय पर आकलन किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव कम हो और सीखने की प्रक्रिया संतुलित रहे।
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स्कूलों में नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे, जहां शिक्षक विद्यार्थियों के भावनात्मक संकेतों को समझेंगे और उनका अनावश्यक शैक्षणिक दबाव कम करने का प्रयास करेंगे। - डॉ. राजन लांबा, जिला प्रधान, सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स, करनाल
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