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जीवित महिला का बना दिया मृत्यु प्रमाण पत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 02:15 AM IST
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alive women make death certificate
एक जीवित महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। जब महिला अपना बीपीएल कार्ड और फैमिली आईडी बनवाने के लिए गई तो उसे देखकर सीएचसी संचालक भी चौंक गया। वह बोला रिकार्ड के अनुसार तो आपकी मौत हो चुकी है। यह सुनकर महिला भी परेशान हो गई। बाद में जांच की गई तो पता चला कि निजी अस्पताल में उसकी बहन की मौत हो गई थी, लेकिन गलती से महिला का डिटेल दर्ज हो गया। इसके बाद नगर निगम ने भी मृतक की जगह उसकी बहन का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया। अब इसे ठीक कराने के लिए महिला और उसका पति चार साल से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
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जनकपुरी निवासी महिला के पति कुलदीप ने बताया कि उसकी शादी घोघड़ीपुर निवासी तन्नू के साथ हुई है। उसकी पत्नी की एक बहन तानिया थी, जो चार साल पहले बीमार हो गई थी और उपचार के दौरान निजी अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई थी। उस समय उसके ससुर प्रवीण भी उसी निजी अस्पताल में सफाई कर्मचारी थे। आरोप है कि निजी अस्पताल की लापरवाही से तानिया के स्थान पर उसकी पत्नी तन्नू का नाम दर्ज हो गया। उस दौरान किसी ने ध्यान नहीं दिया। घटना के छह-सात माह बाद जब तन्नू और वे एक सीएचसी में बीपीएल कार्ड और फैमिली आईडी बनवाने के लिए गये तो वहां बताया गया कि रिकार्ड के अनुसार तन्नू की मौत हो चुकी है। जब उन्होंने आनलाइन देखा तो वहां भी तन्नू की मौत दर्शाया गया था। इसके बाद उसने अपने ससुर से बात की तो उसने बताया कि तानिया की मौत हुई थी, जिसके बाद गलती से तन्नू का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हो गया है।
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कुलदीप ने आरोप लगाया कि उसके ससुर उसी प्राइवेट अस्पताल में काम करते थे जिसमें तानिया की मौत हुई है। उसके ससुर ने वहां से काम छोड़ दिया। यही कारण है कि डॉक्टर ने जानबूझकर उसकी पत्नी का नाम फाइल में लिखा है। उसका कहना है कि अब इसे ठीक कराने के लिए वह ठोकरें खा रहा है। इसके लिए वह चंडीगढ़ भी गया था, लेकिन वहां डाक्टर की रिपोर्ट और पुरानी फाइल मांगी जा रही है, जो निजी अस्पताल की ओर से नहीं दी जा रही है।
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12 हजार रुपये मांगने का लगाया आरोप
महिला के पति ने प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर पर आरोप लगाते हुए बताया कि जब वह फाइल लेने डॉक्टर के पास गया तो डॉक्टर ने 12 हजार रुपये मांगे। साथ ही कहा कि बिना रुपये नाम नहीं ठीक होगा। इस कारण वह चार साल से धक्के ही खा रहे हैं।

नगर निगम में किसी की भी मृत्यु होने पर पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन देना होता है। यदि किसी की मृत्यु अस्पताल में होती है तो डाक्टर जो नाम लिखकर देता है, उसी पर रजिस्ट्रेशन होता है, यदि मृत्यु घर पर होती है तो मृतक के परिजन जो नाम लिखवाते हैं, उसी नाम का रजिस्ट्रेशन होता है, उसी नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होता है। इसमें निगम की कोई गलती नहीं है। यदि कोई प्रमाण पत्र गलत जारी हुआ है तो इसकी अभिलेखों का निरीक्षण कर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-डा. रमेश शर्मा, रजिस्ट्रार नगर निगम करनाल
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