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करनाल और पानीपत में 100 करोड़ से बना एग्रो मॉल होगा नीलाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Oct 2021 02:42 AM IST
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Agro malls built in Karnal-Panipat will be auctioned with 100 crore rupees
किसानों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से करीब सौ करोड़ रुपये की लागत से करनाल और पानीपत में तैयार एग्रो मॉल सात साल बाद भी अपने मकसद में सफल नहीं हो सके। प्रशासनिक अनदेखी के कारण शीशमहलनुमा इमारतें खस्ता होने लगीं हैं। करनाल में तो एग्रो मॉल का कार्य पूरा भी नहीं हुआ था कि फर्श टूटने लगा है।
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हरियाणा राज्य विपणन बोर्ड ने अब इन एग्रो मॉल को नीलाम करने का निर्णय लिया है, ताकि इन स्थानों पर कोई बड़ा शॉपिंग मॉल बन सके। करनाल में इसे जमीन सहित नीलाम किया जाना है, जिसका बाजार मूल्य करीब 137 करोड़ रुपये रखा गया है। नीलामी तिथि 18 नवंबर रखी गई है। इसकी तैयारियों के लिए शुक्रवार को मार्केटिंग बोर्ड पंचकूला के मुख्य वित्त लेखाकार (सीएफए) राजेश सांगवान ने अधिकारियों की टीम के साथ निरीक्षण किया। रखरखाव में लापरवाही मिलने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।
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हरियाणा सरकार ने करनाल, पानीपत, पंचकूला में औसतन करीब 50-50 करोड़ (जमीन अलग) व रोहतक में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से एग्रो मॉल बनाए गए थे। यहां पहुंचे सीएफए राजेश सांगवान ने बताया कि उद्देश्य था कि किसानों को सभी सुविधाएं एक छत के नीचे मिल जाए। करनाल एग्रो मॉल में 80 दुकानें, 40 कार्यालय बनाए गए थे लेकिन यहां न तो कोई कंपनी कार्यालय के लिए आई न कोई दुकान किसी ने ली। पंचकूला व रोहतक में तो एग्रो मॉल चल रहा है लेकिन करनाल और पानीपत के एग्रो मॉल को अब नीलाम करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इनकी पूरी मरम्मत तो नहीं कराई जाएगी लेकिन छुटपुट मरम्मत के लिए कहा गया है। इसके बाद खुली बोली लगाकर इसे नीलाम किया जाएगा। करनाल एग्रो मॉल की नीलामी की तिथि 18 नवंबर रखी गई है। इसे जमीन सहित नीलाम किया जाएगा। प्रयास होगा कि यहां कोई शॉपिंग कांप्लेक्स बन जाए।
2014 में हुआ था उद्घाटन
करनाल के एग्रो मॉल को तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार द्वारा 47.28 करोड़ रुपये (सिविल एवं इलेक्ट्रिक कार्य) की लागत से 3.92 एकड़ भूमि पर बनवाया था। भूमि तो 1992 में अधिगृहीत की गई। शिलान्यास 17 सितंबर 2008 और उद्घाटन एक अगस्त 2014 में किया गया था। ऐसे ही एग्रो मॉल पानीपत, पंचकूला और रोहतक में भी बनवाए गए थे, लेकिन 2014 में सरकार बदलने के बाद मार्केटिंग विभाग भी इस एग्रो मॉल को भूल गया। सात साल बाद भी अपने उद्देश्य में यह सफल नहीं हो पाए। पिछले साल जब यह मुद्दा अमर उजाला ने उठाया तो उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने मामले को गंभीरता से लेकर निरीक्षण भी किया। मार्केटिंग विभाग ने कुछ समय तक दौड़भाग की लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब एग्रो मॉल की फर्श टूटने लगी है, बिजली के उपकरण चोरी हो चुके हैं। अंदर भारी गंदगी है।

एग्रो मॉल को प्रदर्शनी केंद्र बना दिया जाए तो बेहतर
एचएसआईआईडीसी इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन करनाल के प्रधान मनोज अरोरा का कहना है कि एग्रो मॉल काफी शानदार है, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, इसलिए इसे प्रदर्शनी केंद्र बनाया जाना चाहिए। करनाल एग्रो, एग्रीकल्चरल इंप्लीमेंट्स, फार्मा आदि का बड़ा हब है। लेकिन पूरे करनाल में कहीं भी कोई एग्जिविशन केंद्र नहीं है। बाहर से कोई वायर्स आता है तो एक दो कंपनियों के पास जाता है फिर चला जाता है। बाहरी वायर्स की बात तो दूर शहर के अन्य उद्यमियों को ही यह जानकारी नहीं हो पाती है कि करनाल में क्या बन रहा है । जब भी कोई कंपनी प्रदर्शनी लगाती है तो टेंट लगाना पड़ता है। यदि एग्रो मॉल को प्रदर्शनी केंद्र बना दिया जाए, तो करनाल की कई इंडस्ट्रीज को एक नई दिशा मिल सकती है।
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