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कृषि से खत्म हो सकती है देश में बेरोजगारी : श्याम
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि देश में कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में बेरोजगारी की समस्या को जड़ से मिटा सकता है लेकिन ये तब होगा, जब हम लोग खेती को सबसे पहले स्थान पर रखेंगे। ये विचार उन्होंने वीरवार को करनाल में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) के प्रथम स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि आज खेती के पिछड़ने का कारण है कि हम कृषि को प्रथम स्थान पर नहीं रखते। हरियाणा राज्य में खेती का बहुत स्कोप हैं। देश को सातवें बागवानी विश्वविद्यालय के रूप में एमएचयू को प्रधानमंत्री ने ही हरियाणा को उपहार दिया था, अब प्रधानमंत्री ही नौ दिसंबर को पानीपत से इसके मुख्य कैंपस निर्माण का शिलान्यास करेंगे।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल का मुख्य भवन करीब 65 एकड़ में लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। ये करनाल के लिए बड़ी सौगात होगी।
उन्होंने एमएचयू के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा को प्रथम स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये यूनिवर्सिटी किसानों और युवाओं के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की परंपरागत खेती से किसानों को मुनाफा नहीं हो रहा है, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भी हो रहा है। इससे देश और प्रदेश में पानी की गंभीर समस्या दिखाई देने लगी है। गेहूं और धान की खेती से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं।
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कृषि मंत्री ने लोगों को खाद्यान्नों की समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि पहले लोग मोटे अनाज की रोटी खाते थे, तो बीमारियां न के बराबर थी, लेकिन आज गेहूं और चावल प्रमुखता के साथ खाते हैं और गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। उन्होंने मोटे अनाज उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि गेहूं सबसे ज्यादा नुकसान देता है जबकि मोटा अनाज से स्वास्थ्य को फायदा होता है।
बागवानी विश्वविद्यालय का नाम वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप कैसे पड़ा, इसके बारे में बताते हुए कृषिमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के नाम का प्रस्ताव स्वयं उन्होंने दिया था, जिस पर ये नाम रखा गया। क्योंकि महाराणा प्रताप प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे, उनका नाम देश में ही नहीं बल्कि विश्वभर में बड़े आदर के साथ लिया जाता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल इंद्री के भाजपा विधायक रामकुमार कश्यप ने कहा कि पहले गेहूं की रोटी को लग्जरी माना जाता था।
कभी कभार ही गेहूं की रोटी नसीब हो पाती थी, लेकिन उस वक्त लोग मोटे अनाजों की खेती करते थे, यही उनके मुख्य आहार थे। एमएचयू के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, विशिष्ट अतिथि इंद्री विधायक राम कुमार कश्यप को स्मृति चिन्ह देकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। कृषिमंत्री ने खेलकूद आदि प्रतियोगिताओं आदि में बेहतर करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और ट्राफी देकर सम्मानित किया।
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करनाल। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि देश में कृषि ही एक ऐसा क्षेत्र है, जो देश में बेरोजगारी की समस्या को जड़ से मिटा सकता है लेकिन ये तब होगा, जब हम लोग खेती को सबसे पहले स्थान पर रखेंगे। ये विचार उन्होंने वीरवार को करनाल में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) के प्रथम स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि आज खेती के पिछड़ने का कारण है कि हम कृषि को प्रथम स्थान पर नहीं रखते। हरियाणा राज्य में खेती का बहुत स्कोप हैं। देश को सातवें बागवानी विश्वविद्यालय के रूप में एमएचयू को प्रधानमंत्री ने ही हरियाणा को उपहार दिया था, अब प्रधानमंत्री ही नौ दिसंबर को पानीपत से इसके मुख्य कैंपस निर्माण का शिलान्यास करेंगे।
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महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल का मुख्य भवन करीब 65 एकड़ में लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। ये करनाल के लिए बड़ी सौगात होगी।
उन्होंने एमएचयू के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा को प्रथम स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये यूनिवर्सिटी किसानों और युवाओं के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की परंपरागत खेती से किसानों को मुनाफा नहीं हो रहा है, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भी हो रहा है। इससे देश और प्रदेश में पानी की गंभीर समस्या दिखाई देने लगी है। गेहूं और धान की खेती से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं।
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कृषि मंत्री ने लोगों को खाद्यान्नों की समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि पहले लोग मोटे अनाज की रोटी खाते थे, तो बीमारियां न के बराबर थी, लेकिन आज गेहूं और चावल प्रमुखता के साथ खाते हैं और गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। उन्होंने मोटे अनाज उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि गेहूं सबसे ज्यादा नुकसान देता है जबकि मोटा अनाज से स्वास्थ्य को फायदा होता है।
बागवानी विश्वविद्यालय का नाम वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप कैसे पड़ा, इसके बारे में बताते हुए कृषिमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के नाम का प्रस्ताव स्वयं उन्होंने दिया था, जिस पर ये नाम रखा गया। क्योंकि महाराणा प्रताप प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे, उनका नाम देश में ही नहीं बल्कि विश्वभर में बड़े आदर के साथ लिया जाता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल इंद्री के भाजपा विधायक रामकुमार कश्यप ने कहा कि पहले गेहूं की रोटी को लग्जरी माना जाता था।
कभी कभार ही गेहूं की रोटी नसीब हो पाती थी, लेकिन उस वक्त लोग मोटे अनाजों की खेती करते थे, यही उनके मुख्य आहार थे। एमएचयू के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, विशिष्ट अतिथि इंद्री विधायक राम कुमार कश्यप को स्मृति चिन्ह देकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। कृषिमंत्री ने खेलकूद आदि प्रतियोगिताओं आदि में बेहतर करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और ट्राफी देकर सम्मानित किया।