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निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाने वाले स्कूलों पर हो कार्रवाई : कैलाश
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। प्रदेश के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी और एससीईआरटी और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की ओर से प्रकाशित एवं निर्धारित पुस्तकें लागू करवाने के लिए एडवोकेट कैलाश चंद ने शिक्षा विभाग मुख्यालय पंचकूला, सीबीएसई, एससीईआरटी समेत सभी जिलों के उपायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हरियाणा शिक्षा नियमावली 2003 संशोधित नियम 10 सरकार ने वर्ष 2021 में लागू किया था। इसमें निर्देश थे कि प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में कक्षा पहली से कक्षा 12वीं तक के बच्चों को एनसीईआरटी, एससीईआरटी या संबंधित बोर्ड से मान्यता प्राप्त किताबें ही पढ़ाई जा सकती हैं।
निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं पढ़ाई जा सकतीं। इस कानून को बने तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश के स्कूलों में निजी स्कूलों की ओर से नियम कानून के खिलाफ निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रहीं हैं। निजी स्कूलों की ओर से इस कानून की धज्जियां उड़ाने में प्रदेश के राजकीय अधिकारी भी सहयोगी बन रहे हैं। उन्होंने कहा है कि नए सेशन से किसी भी स्कूल में निजी पब्लिशर्स की किताबें न लागू हों इसके लिए सरकार और प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।
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करनाल। प्रदेश के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी और एससीईआरटी और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की ओर से प्रकाशित एवं निर्धारित पुस्तकें लागू करवाने के लिए एडवोकेट कैलाश चंद ने शिक्षा विभाग मुख्यालय पंचकूला, सीबीएसई, एससीईआरटी समेत सभी जिलों के उपायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हरियाणा शिक्षा नियमावली 2003 संशोधित नियम 10 सरकार ने वर्ष 2021 में लागू किया था। इसमें निर्देश थे कि प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में कक्षा पहली से कक्षा 12वीं तक के बच्चों को एनसीईआरटी, एससीईआरटी या संबंधित बोर्ड से मान्यता प्राप्त किताबें ही पढ़ाई जा सकती हैं।
निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं पढ़ाई जा सकतीं। इस कानून को बने तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश के स्कूलों में निजी स्कूलों की ओर से नियम कानून के खिलाफ निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रहीं हैं। निजी स्कूलों की ओर से इस कानून की धज्जियां उड़ाने में प्रदेश के राजकीय अधिकारी भी सहयोगी बन रहे हैं। उन्होंने कहा है कि नए सेशन से किसी भी स्कूल में निजी पब्लिशर्स की किताबें न लागू हों इसके लिए सरकार और प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।
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