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नगर निगम ने सील की प्रापर्टी
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करीब 30 करोड़ रुपए के ईडीसी (एक्सट्रनल डेवलपमेंट चार्ज) और आईडीसी (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज) नहीं देने और बिना बिल्डिंग प्लान के अवैध रूप से किए गए निर्माण के मामले में नगर निगम ने यूएलबी (अर्बन लोकल बाडी) के डायरेक्टर बलकार सिंह के आदेश पर गांव फूसगढ़ के पास स्थित जेडी यूनिवर्सल कालोनी के ग्रुप हाउसिंग के फ्लैटस को सील कर दिया गया। इसके साथ ईडब्लूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लिए आरक्षित प्लाटों के स्थान पर बनाए गए मंदिर को भी सील कर दिया। यह कार्यवाही ड्यूटी मेजिस्ट्रेट हवा सिंह पूनिया की निगरानी में की गई और इस दौरान नगर निगम के डीटीपी मोहन सिंह समेत पुलिस बल मौजूद रहा।
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2015 में जेडी यूनिवर्सल इंफ्रा लिमिटेड कंपनी की ओर से टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत करीब 24 एकड़ में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। नियमों के तहत कंपनी को यह प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा किया जाना था, लेकिन कंपनी ऐसा नहीं कर पाई। इसके साथ ही कंपनी ने ईडीसी और आईडीसी जमा नहीं कराया। कंपनी पर 30 करोड़ रुपए की देनदारी है। पिछले दिनों अर्बन लोकल बाडी के डायरेक्टर की ओर से राशि जमा कराने को लेकर नोटिस भी जारी किया गया था। नोटिस में कहा गया था कि कंपनी ने नियमों के खिलाफ अवैध निर्माण भी कर दिया। साथ ही ईडब्लूएस के प्लाटों के स्थान पर कंपनी द्वारा अवैध रूप से गौरव धमीजा मैसोनिक टैंपल और पालीक्लीनिक बना दिया गया। इसके अलावा, बिना अनुमति के ही 1.46 एकड़ में ग्रुप हाउसिंग साइट को जेडी यूनिवर्सस इंफ्रा लिमिटेड से मैसर्ज एजीज वैल्यू होम प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर करा लिया और बिना बिल्डिंग प्लान के निर्माण कर दिया। सोमवार सुबह नायब तहसीलदार हवा सिंह को इसके लिए ड्यूटी मेजिस्ट्रेट लगाया गया। साथ ही निगम के डीटीपी मोहन सिंह, इंस्पेक्टर विकास अरोड़ा, राजेश तंवर समेत अन्य स्टाफ सदस्यों के पुलिस बल मौजूद रहा। निगम की टीम द्वारा अवैध रूप से गरीबों के लिए आरक्षित प्लाटों के स्थान पर बनाए गए मंदिर को सील किया गया। इसके साथ ही ग्रुप हाउसिंग के निर्माणाधीन फ्लैटस को सील कर दिया गया। डीटीपी मोहन सिंह ने बताया कि बार बार नोटिस देने के बाद भी संबंधित कंपनी ने राशि जमा नहीं कराई थी, इसके अलावा अवैध निर्माण भी किया गया था। इसी के चलते डायरेक्टर और निगम आयुक्त राजीव मेहता के आदेश पर फ्लैट और मंदिर को सील किया गया है।
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नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2015 में जेडी यूनिवर्सल इंफ्रा लिमिटेड कंपनी की ओर से टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत करीब 24 एकड़ में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। नियमों के तहत कंपनी को यह प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा किया जाना था, लेकिन कंपनी ऐसा नहीं कर पाई। इसके साथ ही कंपनी ने ईडीसी और आईडीसी जमा नहीं कराया। कंपनी पर 30 करोड़ रुपए की देनदारी है। पिछले दिनों अर्बन लोकल बाडी के डायरेक्टर की ओर से राशि जमा कराने को लेकर नोटिस भी जारी किया गया था। नोटिस में कहा गया था कि कंपनी ने नियमों के खिलाफ अवैध निर्माण भी कर दिया। साथ ही ईडब्लूएस के प्लाटों के स्थान पर कंपनी द्वारा अवैध रूप से गौरव धमीजा मैसोनिक टैंपल और पालीक्लीनिक बना दिया गया। इसके अलावा, बिना अनुमति के ही 1.46 एकड़ में ग्रुप हाउसिंग साइट को जेडी यूनिवर्सस इंफ्रा लिमिटेड से मैसर्ज एजीज वैल्यू होम प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर करा लिया और बिना बिल्डिंग प्लान के निर्माण कर दिया। सोमवार सुबह नायब तहसीलदार हवा सिंह को इसके लिए ड्यूटी मेजिस्ट्रेट लगाया गया। साथ ही निगम के डीटीपी मोहन सिंह, इंस्पेक्टर विकास अरोड़ा, राजेश तंवर समेत अन्य स्टाफ सदस्यों के पुलिस बल मौजूद रहा। निगम की टीम द्वारा अवैध रूप से गरीबों के लिए आरक्षित प्लाटों के स्थान पर बनाए गए मंदिर को सील किया गया। इसके साथ ही ग्रुप हाउसिंग के निर्माणाधीन फ्लैटस को सील कर दिया गया। डीटीपी मोहन सिंह ने बताया कि बार बार नोटिस देने के बाद भी संबंधित कंपनी ने राशि जमा नहीं कराई थी, इसके अलावा अवैध निर्माण भी किया गया था। इसी के चलते डायरेक्टर और निगम आयुक्त राजीव मेहता के आदेश पर फ्लैट और मंदिर को सील किया गया है।
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