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मित्र वहीं जो मनोदशा को समझ सके : पथिक
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गुरु देव भगवान धाम में श्रीराम कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राम नगर के गुरु देव भगवान धाम में चल रही श्रीराम कथा में रविवार को कथाव्यास प्रेम सागर पथिक ने श्रीराम-हनुमान जी मिलन, बाली वध से लेकर लंका दहन तक की कथा सुनाई जिससे श्रोता भावविभोर हो गए। उन्होंने मित्रता को परिभाषित करते हुए कहा कि मित्र वहीं होता है जो अपने मित्र की मनोदशा समझ सके।
उन्होंने श्रीराम चरित मानस के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम को देखते ही हनुमान जी उनकी मनोदशा को समझ गए और सुग्रीव से मित्रता कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई। जहां पर सुग्रीव ने मां सीता की खोज में सहयोग का आश्वासन देते हुए प्रभु श्रीराम से बालि के विरुद्ध युद्ध में सहायता मांगी। उन्होंंने कहा कि बालि वध के बाद सुग्रीव के कहने पर हनुमान जी लंका पहुंचे और मां सीता को श्रीराम की निशानी दी और मां सीता से निशानी लेकर वापस प्रभु श्रीराम के पास पहुंचे।
इस अवसर पर सुरेश कुमारी छाबड़ा, ,कूल भूषण अरोडा,ओम प्रकाश भाटिया, उषा भाटिया, उषा नागपाल, राधा रानी, रिया, दिया,मुस्कान,रेणु अरोडा, सरिता और नीरू के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राम नगर के गुरु देव भगवान धाम में चल रही श्रीराम कथा में रविवार को कथाव्यास प्रेम सागर पथिक ने श्रीराम-हनुमान जी मिलन, बाली वध से लेकर लंका दहन तक की कथा सुनाई जिससे श्रोता भावविभोर हो गए। उन्होंने मित्रता को परिभाषित करते हुए कहा कि मित्र वहीं होता है जो अपने मित्र की मनोदशा समझ सके।
उन्होंने श्रीराम चरित मानस के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम को देखते ही हनुमान जी उनकी मनोदशा को समझ गए और सुग्रीव से मित्रता कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई। जहां पर सुग्रीव ने मां सीता की खोज में सहयोग का आश्वासन देते हुए प्रभु श्रीराम से बालि के विरुद्ध युद्ध में सहायता मांगी। उन्होंंने कहा कि बालि वध के बाद सुग्रीव के कहने पर हनुमान जी लंका पहुंचे और मां सीता को श्रीराम की निशानी दी और मां सीता से निशानी लेकर वापस प्रभु श्रीराम के पास पहुंचे।
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इस अवसर पर सुरेश कुमारी छाबड़ा, ,कूल भूषण अरोडा,ओम प्रकाश भाटिया, उषा भाटिया, उषा नागपाल, राधा रानी, रिया, दिया,मुस्कान,रेणु अरोडा, सरिता और नीरू के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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