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Karnal News: समाधान दिवस के नाम पर खानापूर्ति, बड़े अधिकारी पहुंचे ही नहीं
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जिला सचिवालय में खाली पड़ा हेल्प डेस्क संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सोमवार, सुबह 10 बजे सचिवालय में समाधान दिवस में न कोई अधिकारी है न कर्मचारी। सुबह 10:30 अधिकारी और कर्मचारी आना शुरू हुए। कुछ देर और इंतजार किया गया। कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। एसडीएम के सहायक विनोद कुमार ने कुर्सी संभाली और लोगों की शिकायतें सुननी शुरू कीं। करीब 11 बजे तक चार शिकायतें आईं। हर शिकायतकर्ता को 2-3 मिनट में ही फारिग कर दिया गया। शिकायत की कॉपी लेकर कर्मचारियों को सौंपी और कहा आप जाओ, काम हो जाएगा।
करीब 12 बजे तक अधिकांश कर्मचारी काम से फारिग और मोबाइल में व्यस्त रहे। 12 बजे सभी ने समय देखा और अपनी कुर्सियां छोड़ दीं। किसी ने शिविर में आई चारों शिकायतों का फीडबैक तक नहीं लिया। यूं तो लोगों की शिकायतें सुनने के लिए जिला प्रशासन के पास एक बड़ा अमला है। डीसी, एडीसी, एसडीएम, सीटीएम भी सचिवालय में बैठते हैं। शहर में मंडलायुक्त हैं।
एसडीएम के सहायक विनोद कुमार ने बताया कि सिर्फ एक शिकायत और तीन समस्याएं मिलीं। समाधान कराया जाएगा। संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायतें भेजी गई हैं।
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भरोसा हो रहा कम
जिला प्रशासन के इस रवैये से व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है। लोगों का कहना है कि समाधान दिवस पर शिविर में अधिकारी कम कर्मचारी ज्यादा बैठे मिलते हैं। इससे समाधान के लिए आने वाले लोगों की संख्या भी घटी है। सोमवार को लगे शिविर में केवल चार फरियादी ही पहुंचे। इनमें से भी किसी को मौके पर समाधान नहीं मिला।
लोग ढूंढते रहे शिविर
शिकायत लेकर आए लोगों को सचिवालय में दूसरी मंजिल पर लगे समाधान दिवस शिविर तक पहुंचने में दिक्कत हुई। एडीसी कार्यालय के पास एनआईसी के सभागार में शिविर था। इसके लिए कोई संकेतक नहीं थे। भूतल पर बने हेल्प डेस्क पर कोई कर्मचारी नहीं था। जो ये बता सके कि शिविर कहां लगाया जा रहा है।
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करनाल। सोमवार, सुबह 10 बजे सचिवालय में समाधान दिवस में न कोई अधिकारी है न कर्मचारी। सुबह 10:30 अधिकारी और कर्मचारी आना शुरू हुए। कुछ देर और इंतजार किया गया। कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। एसडीएम के सहायक विनोद कुमार ने कुर्सी संभाली और लोगों की शिकायतें सुननी शुरू कीं। करीब 11 बजे तक चार शिकायतें आईं। हर शिकायतकर्ता को 2-3 मिनट में ही फारिग कर दिया गया। शिकायत की कॉपी लेकर कर्मचारियों को सौंपी और कहा आप जाओ, काम हो जाएगा।
करीब 12 बजे तक अधिकांश कर्मचारी काम से फारिग और मोबाइल में व्यस्त रहे। 12 बजे सभी ने समय देखा और अपनी कुर्सियां छोड़ दीं। किसी ने शिविर में आई चारों शिकायतों का फीडबैक तक नहीं लिया। यूं तो लोगों की शिकायतें सुनने के लिए जिला प्रशासन के पास एक बड़ा अमला है। डीसी, एडीसी, एसडीएम, सीटीएम भी सचिवालय में बैठते हैं। शहर में मंडलायुक्त हैं।
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एसडीएम के सहायक विनोद कुमार ने बताया कि सिर्फ एक शिकायत और तीन समस्याएं मिलीं। समाधान कराया जाएगा। संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायतें भेजी गई हैं।
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भरोसा हो रहा कम
जिला प्रशासन के इस रवैये से व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है। लोगों का कहना है कि समाधान दिवस पर शिविर में अधिकारी कम कर्मचारी ज्यादा बैठे मिलते हैं। इससे समाधान के लिए आने वाले लोगों की संख्या भी घटी है। सोमवार को लगे शिविर में केवल चार फरियादी ही पहुंचे। इनमें से भी किसी को मौके पर समाधान नहीं मिला।
लोग ढूंढते रहे शिविर
शिकायत लेकर आए लोगों को सचिवालय में दूसरी मंजिल पर लगे समाधान दिवस शिविर तक पहुंचने में दिक्कत हुई। एडीसी कार्यालय के पास एनआईसी के सभागार में शिविर था। इसके लिए कोई संकेतक नहीं थे। भूतल पर बने हेल्प डेस्क पर कोई कर्मचारी नहीं था। जो ये बता सके कि शिविर कहां लगाया जा रहा है।

जिला सचिवालय में खाली पड़ा हेल्प डेस्क संवाद