{"_id":"81-46378","slug":"Karnal-46378-81","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिविल अस्पताल में कुर्सियों से गायब मिले डाक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिविल अस्पताल में कुर्सियों से गायब मिले डाक्टर
Karnal
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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कुरुक्षेत्र। एक यो दो नहीं, बल्कि ओपीडी में सिर्फ आर्थो और एक दंत रोग चिकित्सक के अतिरिक्त आरएमओ और अन्य कई डाक्टर नदारद नजर आए। अस्पताल का ये नजारा ओपीडी के समय देखने को मिला। वहीं, जब अमर उजाला ने अस्पताल के इन हालातों को कैमरे में कैद करना शुरू किया तो इसके बाद सबसे पहले चिकित्सा अधीक्षक डा. सुरेंद्र राणा वहां पहुंचे और इसके बाद जैसे ही उन्होंने फोन घुमाना शुरू किया, डाक्टर सीट तक पहुंचना आरंभ हो गए। कोई पट्टी कराने के लिए खड़ा दिखाई दिया तो किसी को आरएमओ से सरकारी कागजों पर हस्ताक्षर कराने थे। चेकअप कराने वालों के हालात यह रहे कि उन्हें पांच रुपये की पर्ची कटाकर बगैर चेकअप कराए घर लौटना पड़ा। हरियाणा सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को जहां चुस्त दुरुस्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं, हेल्थ विभाग के कुछ स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारी भारी भरकम वेतन हासिल करने के बावजूद बंकमारी कर रहे हैं। इन मरीजों का दर्द देख अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का बस यही कहना था कि वे हालात से इतना परेशान है कि डेपुटेशन पर गए चिकित्सा अधीक्षक डा. मुकेश के आने का इंतजार कर रहे हैं। एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. मुकेश पिछले माह से डेपुटेशन पर सोनीपत में है। उनके जाने के बाद बाल रोग विशेषज्ञ डा. सुरेंद्र राणा के पास अस्पताल के अधीक्षक का पदभार है।
एमएस ने सुनी मरीजों की समस्याएं
सीटें खाली मिलने की सूचना पर जब मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. सुरेंद्र राणा मौके पर पहुंचे तो उनके सामने कई मरीजों ने दुखड़ा रोया। वहीं ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी, जिन्हें मेडिकल आफिसर या दूसरे अधिकारियों के हस्ताक्षर सरकारी कामकाज के लिए जरूरी कागजों पर लेने थे। इनमें से कुछ की समस्या को सुनने के साथ एमएस ने इनमें से कइयों का काम मौके पर ही निपटवाया।
इससे बुरा हाल और क्या होगा
ओपीडी में जहां मौके पर सिर्फ दो विशेषज्ञों को छोड़कर अन्य डाक्टरों की कुर्सियां खाली दिखाई दी, वहीं एलएनजेपी के नेत्ररोग विशेषज्ञ के लिए बनाई गई ओपीडी पर अभी भी ताला लटका हुआ है। पूरे जिला में इस समय सरकारी स्वास्थ्य सेवा में नेत्र रोग विशेषज्ञ की सुविधा नहीं है। पूरे जिला में फिजिशियन का पद भी 20 दिन से खाली पड़ा है।
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खाना खाने गए हैं
एमएस ने बताया कि एक डाक्टर कैंप में गए हुए हैं और एक छुट्टी पर हैं, एक कोर्ट ड्यूटी पर हैं, एक खाना खाने गए हैं, बाल रोग विशेषज्ञ आपरेशन थिएटर में है। आरएमओ डा. एसएस अरोड़ा के पास कार्यों की अधिकता काफी ज्यादा हैं, इसलिए उन्हें सीट पर हर समय मिलना मुमकिन नहीं है।
कहां इलाज कराए गरीब आदमी
विद्या देवी ने चिकित्सा अधीक्षक डा. सुरेंद्र राणा ने कहा कि वह पिछले एक घंटे से अपनी बेटी के हाथ में रसौली का चेकअप कराने और उसके हाथ में पट्टी कराने के लिए खड़ी हैं, लेकिन कोई यह बताने वाला नहीं है कि डाक्टर कहां मिलेंगे।
पिछले कई दिन से लगा रहा हूं चक्कर
पिपली शंकर कालोनी वासी अनिल कुमार के मुताबिक उसके पिता सरकारी मुलाजिम है। उसकी माता का इलाज चल रहा है, उनके मेडिकल क्लेम के बिलों पर आरएमओ के हस्ताक्षर कराने के लिए वह पिछले कई दिन से घूम रहे हैं। अनिल के मुताबिक शुक्रवार को वह डेढ़ बजे अस्पताल में आए थे, लेकिन करीब सवा चार बजे आरएमओ डा. एसएस अरोड़ा ने बताया कि शनिवार और रविवार का अवकाश है, अब मंगलवार को हस्ताक्षर कराने के लिए आना।
मरीजों ने अमर उजाला को दिया धन्यवाद
कुरुक्षेत्र के बिरला मंदिर महाराणा प्रताप चौक के निकट रहने वाले जितेंद्र पांचाल का कहना है कि उसके पिता को ब्रेन हेमरेज हो गया था, ढाई साल से इस अस्पताल के फिजिशियन के पास उनका उपचार चल रहा था, लेकिन अब फिजिशियन डेपुटेशन पर हैं, उनकी जगह अभी तक कोई फिजिशियन नियुक्त नहीं किया गया, वे पिछले कई दिन से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, क्योंकि उनके पिता की मेडिकल ट्रीटमेंट की पर्ची पर जो दवाएं हैं, उन्हें रिन्यू कराना होता है। इस मेडिकल स्लिप को रिन्यू कराने के लिए वह कई दिन से चक्कर लगा रहा था। पांचाल ने अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एमएस के यहां पहुंचने पर उनकी मेडिकल स्लिप तो रिन्यू हो गई है, लेकिन अब उन्हें नए फिजिशियन का इंतजार है। पांचाल ने कहा कि उच्च और सामान्य वर्ग के लोग तो बाहर भी इलाज करा सकते हैं, लेकिन गरीब लोगों को इन हालात में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ कैसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।
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एमएस ने सुनी मरीजों की समस्याएं
सीटें खाली मिलने की सूचना पर जब मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. सुरेंद्र राणा मौके पर पहुंचे तो उनके सामने कई मरीजों ने दुखड़ा रोया। वहीं ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी, जिन्हें मेडिकल आफिसर या दूसरे अधिकारियों के हस्ताक्षर सरकारी कामकाज के लिए जरूरी कागजों पर लेने थे। इनमें से कुछ की समस्या को सुनने के साथ एमएस ने इनमें से कइयों का काम मौके पर ही निपटवाया।
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इससे बुरा हाल और क्या होगा
ओपीडी में जहां मौके पर सिर्फ दो विशेषज्ञों को छोड़कर अन्य डाक्टरों की कुर्सियां खाली दिखाई दी, वहीं एलएनजेपी के नेत्ररोग विशेषज्ञ के लिए बनाई गई ओपीडी पर अभी भी ताला लटका हुआ है। पूरे जिला में इस समय सरकारी स्वास्थ्य सेवा में नेत्र रोग विशेषज्ञ की सुविधा नहीं है। पूरे जिला में फिजिशियन का पद भी 20 दिन से खाली पड़ा है।
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खाना खाने गए हैं
एमएस ने बताया कि एक डाक्टर कैंप में गए हुए हैं और एक छुट्टी पर हैं, एक कोर्ट ड्यूटी पर हैं, एक खाना खाने गए हैं, बाल रोग विशेषज्ञ आपरेशन थिएटर में है। आरएमओ डा. एसएस अरोड़ा के पास कार्यों की अधिकता काफी ज्यादा हैं, इसलिए उन्हें सीट पर हर समय मिलना मुमकिन नहीं है।
कहां इलाज कराए गरीब आदमी
विद्या देवी ने चिकित्सा अधीक्षक डा. सुरेंद्र राणा ने कहा कि वह पिछले एक घंटे से अपनी बेटी के हाथ में रसौली का चेकअप कराने और उसके हाथ में पट्टी कराने के लिए खड़ी हैं, लेकिन कोई यह बताने वाला नहीं है कि डाक्टर कहां मिलेंगे।
पिछले कई दिन से लगा रहा हूं चक्कर
पिपली शंकर कालोनी वासी अनिल कुमार के मुताबिक उसके पिता सरकारी मुलाजिम है। उसकी माता का इलाज चल रहा है, उनके मेडिकल क्लेम के बिलों पर आरएमओ के हस्ताक्षर कराने के लिए वह पिछले कई दिन से घूम रहे हैं। अनिल के मुताबिक शुक्रवार को वह डेढ़ बजे अस्पताल में आए थे, लेकिन करीब सवा चार बजे आरएमओ डा. एसएस अरोड़ा ने बताया कि शनिवार और रविवार का अवकाश है, अब मंगलवार को हस्ताक्षर कराने के लिए आना।
मरीजों ने अमर उजाला को दिया धन्यवाद
कुरुक्षेत्र के बिरला मंदिर महाराणा प्रताप चौक के निकट रहने वाले जितेंद्र पांचाल का कहना है कि उसके पिता को ब्रेन हेमरेज हो गया था, ढाई साल से इस अस्पताल के फिजिशियन के पास उनका उपचार चल रहा था, लेकिन अब फिजिशियन डेपुटेशन पर हैं, उनकी जगह अभी तक कोई फिजिशियन नियुक्त नहीं किया गया, वे पिछले कई दिन से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, क्योंकि उनके पिता की मेडिकल ट्रीटमेंट की पर्ची पर जो दवाएं हैं, उन्हें रिन्यू कराना होता है। इस मेडिकल स्लिप को रिन्यू कराने के लिए वह कई दिन से चक्कर लगा रहा था। पांचाल ने अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एमएस के यहां पहुंचने पर उनकी मेडिकल स्लिप तो रिन्यू हो गई है, लेकिन अब उन्हें नए फिजिशियन का इंतजार है। पांचाल ने कहा कि उच्च और सामान्य वर्ग के लोग तो बाहर भी इलाज करा सकते हैं, लेकिन गरीब लोगों को इन हालात में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ कैसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।