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लुधियाना में गूंजी कृषि विज्ञान केंद्र कैथल की धाक
Karnal
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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कैथल। कृषि विज्ञान केंद्र कैथल को विभिन्न उपलब्धियाें के लिए सर्वोत्तम कृषि विज्ञान केंद्र जोन प्रथम का अवार्ड मिला है। लुधियाना में 20 से 22 नवंबर तक अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कृषि विज्ञान केेंद्र के वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार में पांच लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र शामिल है। शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. राजेंद्र श्योकंद ने बताया कि अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा देश भर में 630 कृषि विज्ञान केंद्र चलाए जा रहे हैं जिसमें जोन स्तर पर इस बार कैथल के कृषि विज्ञान केंद्र को उसकी उपलब्धियों के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है। दो दिन तक लुधियाना में आयोजित कार्यक्रम में सभी सत्रों में कृषि विज्ञान केेंद्र कैथल छाया रहा। प्रदर्शनी में केंद्र के स्टाल सहित सभी गतिविधियों की सराहना की गई। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. एस. अयायन, उप महानिदेशक डा. केडी कोकाटे के क्षेत्रीय परियोजना निदेशक जोन-1 डा. एएम नरुला सहित अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।
इसलिए मिला पुरस्कार
डा. राजेंद्र श्योकंद ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए गए गिरते भू-जलस्तर को रोकने के प्रयास, प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग, भूमि में पोषक तत्वों के प्रबंधन, फसल विविधिकरण, संसाधन संरक्षण जैसे लेजर लेवलिंग, गेहूं की सीधी बिजाई, धान की सीधी बिजाई, पौध बीमारी प्रबंधन, कीटनाशकों का न्यायसंगत प्रयोग, खनिज मिश्रण आदि को देखते हुए यह अवार्ड दिया गया। इनका योगदान सराहनीय
इस अवार्ड के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिकों की टीम डा. रमेश वर्मा, डा. प्रद्यूमन भटनागर, डा. जसबीर सिंह, डा. उर्वशी, डा. अनिल खिप्पल सहित किसानों एवं अन्य कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा है। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक डा. केएस खोखर सहित विश्वविद्यालय के प्रबंधन मंडल के सदस्य कुशल पाल सिरोही ने इस क्षेत्र में काफी सहयोग किया है।
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इसलिए मिला पुरस्कार
डा. राजेंद्र श्योकंद ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए गए गिरते भू-जलस्तर को रोकने के प्रयास, प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग, भूमि में पोषक तत्वों के प्रबंधन, फसल विविधिकरण, संसाधन संरक्षण जैसे लेजर लेवलिंग, गेहूं की सीधी बिजाई, धान की सीधी बिजाई, पौध बीमारी प्रबंधन, कीटनाशकों का न्यायसंगत प्रयोग, खनिज मिश्रण आदि को देखते हुए यह अवार्ड दिया गया। इनका योगदान सराहनीय
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इस अवार्ड के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिकों की टीम डा. रमेश वर्मा, डा. प्रद्यूमन भटनागर, डा. जसबीर सिंह, डा. उर्वशी, डा. अनिल खिप्पल सहित किसानों एवं अन्य कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा है। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक डा. केएस खोखर सहित विश्वविद्यालय के प्रबंधन मंडल के सदस्य कुशल पाल सिरोही ने इस क्षेत्र में काफी सहयोग किया है।
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