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औद्योगिक क्षेत्र में सामूहिक भागीदारी बढ़ाने को 90 फीसदी सहयोग देगी सरकार
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हरियाणा सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में सामूहिक उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एमएसई-सीडीपी क्लस्टर विकास योजना एमएसएमई के माध्यम से शुरू की है। इसमें कम से कम 20 या उससे अधिक इकाइयों का एक साथ आना आवश्यक है। इसमें केंद्र व राज्य सरकार मिलकर करीब 20 करोड़ रुपये तक का अनुदान देगी। सबसे खास बात यह है कि इसमें 90 प्रतिशत राशि का योगदान सरकार करेगी। सिर्फ 10 प्रतिशत राशि का योगदान उद्यमियों द्वारा किया जाएगा।
दरअसल कोरोना ने औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित किया है। लंबे समय तक उद्योग बंद भी रहे। कभी लेबर तो कभी रॉ मैटेरियल और फिर तैयार माल को रिटेल काउंटरों तक पहुंचाने आदि में कई तरह की दिक्कतें आईं। जिससे उद्योगों का टर्नओवर भी घटा है। ऐसे में केंद्र सरकार चाहती है कि देश में सामूहिक उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के साथ-साथ सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) व उनके क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में क्लस्टर विकास दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिए। हरियाणा सरकार ने एमएसई-सीडीपी क्लस्टर विकास योजना को संचालित करने की जिम्मेदारी प्रदेश में इसी साल अलग किए गए एमएसएमई को दी है।
क्लस्टर बनाकर स्थापित करें उद्योग
एमएसएमई केंद्र करनाल/कैथल/कुरुक्षेत्र के संयुक्त/उपनिदेशक जनक कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत केंद्र व राज्य सरकार द्वारा 20 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। जिसमें 90 प्रतिशत राशि का योगदान सरकार द्वारा किया जाता है। उद्यमियों को सिर्फ 10 प्रतिशत अंशदान ही लगाना होता है। लेकिन इस योजना का लाभ तभी मिल सकता है, जब कम से कम 20 या उससे अधिक इकाइयां एक साथ आएं। यानी जो सूक्ष्म, लघु व मध्यम दर्जे की इकाइयां हैं, वह एक साथ मिलकर क्लस्टर बनाकर उद्योग स्थापित करें। यह योजना मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर दोनों ही क्षेत्रों में मान्य है। इसलिए योजना का दायरा काफी बड़ा है, छोटे और मझोले उद्यमियों को योजना का बड़ा लाभ मिल सकता है।
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राज्य मिनी क्लस्टर योजना भी शामिल
-एमएसएमई कार्यालय करनाल से मिली जानकारी के अनुसार इसी श्रृंखला में राज्य मिनी क्लस्टर योजना को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत किसी चिन्हित क्षेत्र में समान गतिविधि की कम से कम 15 सूक्ष्म व लघु कार्यात्मक औद्योगिक इकाइयों का समूह (पंजीकृत) आवेदन कर सकता है। इसमें राज्य सरकार द्वारा पांच करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। यह योजना भी मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर दोनों में ही मान्य है। इसमें भी 90 प्रतिशत राशि का योगदान सरकार करती है, सिर्फ 10 प्रतिशत राशि उद्यमियों को लगानी होती है।
सरकार चाहती है कि औद्योगिक क्षेत्र में सामूहिक भागीदारी को बढ़ाया जाए। जब छोटी-छोटी कई इकाइयां एक साथ मिलकर कार्य करेंगी तो वह उद्योग बड़े स्तर पर संचालित हो सकेगा। इसलिए क्लस्टर योजना में सरकार 90 प्रतिशत धनराशि का सहयोग कर रही है। बड़ी इकाइयां सिर्फ 10 प्रतिशत राशि का ही अंशदान करेगी। उनकी संख्या अधिक होगी तो एक के हिस्से में काफी कम लागत ही आएगी। जिससे बड़ी आसानी से बड़ा उद्योग लगाया जा सकेगा।
-जनक कुमार, संयुक्त/उपनिदेशक एमएसएमई केंद्र करनाल/कैथल/कुरुक्षेत्र
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दरअसल कोरोना ने औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित किया है। लंबे समय तक उद्योग बंद भी रहे। कभी लेबर तो कभी रॉ मैटेरियल और फिर तैयार माल को रिटेल काउंटरों तक पहुंचाने आदि में कई तरह की दिक्कतें आईं। जिससे उद्योगों का टर्नओवर भी घटा है। ऐसे में केंद्र सरकार चाहती है कि देश में सामूहिक उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के साथ-साथ सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) व उनके क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में क्लस्टर विकास दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिए। हरियाणा सरकार ने एमएसई-सीडीपी क्लस्टर विकास योजना को संचालित करने की जिम्मेदारी प्रदेश में इसी साल अलग किए गए एमएसएमई को दी है।
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क्लस्टर बनाकर स्थापित करें उद्योग
एमएसएमई केंद्र करनाल/कैथल/कुरुक्षेत्र के संयुक्त/उपनिदेशक जनक कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत केंद्र व राज्य सरकार द्वारा 20 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। जिसमें 90 प्रतिशत राशि का योगदान सरकार द्वारा किया जाता है। उद्यमियों को सिर्फ 10 प्रतिशत अंशदान ही लगाना होता है। लेकिन इस योजना का लाभ तभी मिल सकता है, जब कम से कम 20 या उससे अधिक इकाइयां एक साथ आएं। यानी जो सूक्ष्म, लघु व मध्यम दर्जे की इकाइयां हैं, वह एक साथ मिलकर क्लस्टर बनाकर उद्योग स्थापित करें। यह योजना मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर दोनों ही क्षेत्रों में मान्य है। इसलिए योजना का दायरा काफी बड़ा है, छोटे और मझोले उद्यमियों को योजना का बड़ा लाभ मिल सकता है।
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राज्य मिनी क्लस्टर योजना भी शामिल
-एमएसएमई कार्यालय करनाल से मिली जानकारी के अनुसार इसी श्रृंखला में राज्य मिनी क्लस्टर योजना को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत किसी चिन्हित क्षेत्र में समान गतिविधि की कम से कम 15 सूक्ष्म व लघु कार्यात्मक औद्योगिक इकाइयों का समूह (पंजीकृत) आवेदन कर सकता है। इसमें राज्य सरकार द्वारा पांच करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। यह योजना भी मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर दोनों में ही मान्य है। इसमें भी 90 प्रतिशत राशि का योगदान सरकार करती है, सिर्फ 10 प्रतिशत राशि उद्यमियों को लगानी होती है।
सरकार चाहती है कि औद्योगिक क्षेत्र में सामूहिक भागीदारी को बढ़ाया जाए। जब छोटी-छोटी कई इकाइयां एक साथ मिलकर कार्य करेंगी तो वह उद्योग बड़े स्तर पर संचालित हो सकेगा। इसलिए क्लस्टर योजना में सरकार 90 प्रतिशत धनराशि का सहयोग कर रही है। बड़ी इकाइयां सिर्फ 10 प्रतिशत राशि का ही अंशदान करेगी। उनकी संख्या अधिक होगी तो एक के हिस्से में काफी कम लागत ही आएगी। जिससे बड़ी आसानी से बड़ा उद्योग लगाया जा सकेगा।
-जनक कुमार, संयुक्त/उपनिदेशक एमएसएमई केंद्र करनाल/कैथल/कुरुक्षेत्र