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गुणवता परक शिक्षा का संवैधानिक संकल्प कागजों तक सिमटा : उधम सिंह
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सामाजिक-सांस्कृतिक एवं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े जन संगठनों की बैठक कर्ण पार्क में उधम सिंह राठी की अध्यक्षता में हुई। इसमें जन शिक्षा अधिकार मंच के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा, अभिभावक एकता मंच, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति तथा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया सहित सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। जन शिक्षा अधिकार मंच के प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि संविधान निर्माताओं ने साक्षरता एवं शिक्षा की महत्ता का समर्थन करते हुए देशभर को 1960 तक पूर्ण साक्षर व शिक्षित करने का लक्ष्य रखा था। आजाद भारत में सार्वजनिक शिक्षण संस्थाओं का मजबूत ढांचा खड़ा कर किया गया। अनपढ़ व अशिक्षित लोगों ने स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालयों के लिए जमीन दान की। जन सहयोग से दान इकट्ठा करके भवनों का निर्माण किया। शिक्षाविदों ने साक्षरता, प्राथमिक शिक्षा, उच्च व व्यावसायिक शिक्षा के प्रचार प्रसार की अनेक योजनाएं बनाई और पूर्ववत सरकारों ने इन्हें लागू कराया। लेकिन 1991 की नव उदारवादी नीतियों ने शिक्षा को बाजार के लिए खोल दिया। शिक्षण संस्थाओं का निजीकरण एवं व्यापारीकरण हुआ। निजी शिक्षण संस्थाओं की बाढ़ सी आई। शिक्षा महंगी हुई। सार्वजनिक शिक्षा का ढांचा कमजोर किया गया और सभी स्तर पर शिक्षा के सरकारी बजट में कटौती की गई। फलस्वरूप वंचित व मेहनकश जनता सहित देश की बहुमत आबादी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ गई। सबको अच्छी शिक्षा, गुणवत्ता परक शिक्षा तथा वैज्ञानिक चिंतन युक्त शिक्षा का संवैधानिक संकल्प केवल कागजों तक सिमट कर रह गया। इसे अब राष्ट्रीय एजेंडा बनाना समय की मांग है। बैठक में आगामी 30 सितंबर को कर्ण पार्क में जिला स्तरीय शिक्षा सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता जन शिक्षा अधिकार मंच हरियाणा के राज्य संयोजक जरनैल सिंह सांगवान, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के मुख्य सलाहकार बलबीर सिंह तथा हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव प्रो. प्रमोद गोरी होंगे। सम्मेलन में जन शिक्षा अधिकार मंच करनाल इकाई का पुनर्गठन किया जाएगा।
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करनाल। सामाजिक-सांस्कृतिक एवं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े जन संगठनों की बैठक कर्ण पार्क में उधम सिंह राठी की अध्यक्षता में हुई। इसमें जन शिक्षा अधिकार मंच के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा, अभिभावक एकता मंच, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति तथा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया सहित सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। जन शिक्षा अधिकार मंच के प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि संविधान निर्माताओं ने साक्षरता एवं शिक्षा की महत्ता का समर्थन करते हुए देशभर को 1960 तक पूर्ण साक्षर व शिक्षित करने का लक्ष्य रखा था। आजाद भारत में सार्वजनिक शिक्षण संस्थाओं का मजबूत ढांचा खड़ा कर किया गया। अनपढ़ व अशिक्षित लोगों ने स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालयों के लिए जमीन दान की। जन सहयोग से दान इकट्ठा करके भवनों का निर्माण किया। शिक्षाविदों ने साक्षरता, प्राथमिक शिक्षा, उच्च व व्यावसायिक शिक्षा के प्रचार प्रसार की अनेक योजनाएं बनाई और पूर्ववत सरकारों ने इन्हें लागू कराया। लेकिन 1991 की नव उदारवादी नीतियों ने शिक्षा को बाजार के लिए खोल दिया। शिक्षण संस्थाओं का निजीकरण एवं व्यापारीकरण हुआ। निजी शिक्षण संस्थाओं की बाढ़ सी आई। शिक्षा महंगी हुई। सार्वजनिक शिक्षा का ढांचा कमजोर किया गया और सभी स्तर पर शिक्षा के सरकारी बजट में कटौती की गई। फलस्वरूप वंचित व मेहनकश जनता सहित देश की बहुमत आबादी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ गई। सबको अच्छी शिक्षा, गुणवत्ता परक शिक्षा तथा वैज्ञानिक चिंतन युक्त शिक्षा का संवैधानिक संकल्प केवल कागजों तक सिमट कर रह गया। इसे अब राष्ट्रीय एजेंडा बनाना समय की मांग है। बैठक में आगामी 30 सितंबर को कर्ण पार्क में जिला स्तरीय शिक्षा सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता जन शिक्षा अधिकार मंच हरियाणा के राज्य संयोजक जरनैल सिंह सांगवान, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के मुख्य सलाहकार बलबीर सिंह तथा हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव प्रो. प्रमोद गोरी होंगे। सम्मेलन में जन शिक्षा अधिकार मंच करनाल इकाई का पुनर्गठन किया जाएगा।