{"_id":"5a5b9e4c4f1c1b8b268b465c","slug":"51515953740-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मधुबन पुलिस अकादमी में जो भी सीएम आया वो दोबारा नहीं बना, 17 साल बाद खट्टर पहुंचे, बोले मैं ये धारण तोड़ने आया हूं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मधुबन पुलिस अकादमी में जो भी सीएम आया वो दोबारा नहीं बना, 17 साल बाद खट्टर पहुंचे, बोले मैं ये धारण तोड़ने आया हूं
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मधुबन पुलिस अकादमी में जो भी सीएम आए दोबारा नहीं बने, 17 साल बाद पहुंचे मनोहर लाल, बोले- मैं यह धारणा तोड़ने आया हूं
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
पिछले 17 साल से सत्ताधारी नेताओं, मुख्यमंत्री के लिए अशुभ मानी जा रही पुलिस अकादमी मधुबन के मिथक को तोड़ते हुए आखिरकार सीएम मनोहर लाल दीक्षांत परेड ग्राउंड में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 84वें बैच के 1721 रिक्रूट सिपाहियों को संबोधित करते कहा कि मधुबन पुलिस कैंपस में आना मुख्यमंत्री के लिए अशुभ संकेत माना जाता था। परंतु 17 साल बाद मैंने माना कि जहां पर अधिकारी और कर्मचारियों को सेवा का प्रशिक्षण दिया जाता है, वह स्थान किसी के लिए अशुभ कैसे हो सकता है। इस मिथ्या को तोड़ने के लिए वे आज यहां आए हैं। बता दें कि मधुबन पुलिस कांप्लेक्स को लेकर आम धारणा रही है कि जो भी मुख्यमंत्री यहां पर आया है, उसके बाद वह कभी सीएम नहीं बन पाया। उन्होंने कहा कि उन्हें तीन साल पहले आना चाहिए, यहां अब देरी से आए हैं।
गौरतलब है कि मधुबन अकादमी की स्थापना सन 1976 में हुई थी। इसके बाद केंद्र के मंत्रियों और प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित अन्य कई नेता जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए अकादमी पहुंचे और दीक्षांत परेड में हिस्सा लिया। लेकिन मधुबन अकादमी में कुछ मुख्यमंत्रियों के आने के बाद उनकी कुर्सी चली गई। इसके बाद मुख्यमंत्रियों ने अकादमी में आने से कन्नी काटनी शुरू कर दी। वर्ष 1986 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल अकादमी में पहुंचे थे और 1987 में उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद दो मार्च 1991 में जनता दल के मुख्यमंत्री हुकम सिंह अकादमी में पहुंचे और 21 मार्च को उनकी कुर्सी चली गई। उनके बाद ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के सीएम बने। बताया जाता है कि साल 2001 में चौटाला यहां पर आए थे और 2005 में उनकी सरकार चली गई। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा 10 साल सीएम रहे, लेकिन एक बार भी मधुबन कॉंप्लेक्स नहीं आए।
जवानों को दिए तीन मंत्र
सीएम मनोहर लाल ने रैक्रूट सिपाहियों को संदेश दिया कि उन्हें समाज में उच्च कोटि के नागरिक बनने की शिक्षा लेनी होगी। नैतिकता, न्याय और निडरता के तीन मंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि यह मंत्र हर संभव सफलता की ओर अग्रसर करेगा। पुलिस की छवि को सुधारने की जरूरत है। इस भर्ती में मेरिट के आधार पर युवाओं को नौकरी मिली है, जिनमें 46 प्रतिशत युवा स्नातक या स्नातकोत्तर हैं। माना जाएगा कि यह सभी युवा अपनी शिक्षा का प्रयोग प्रदेश और समाज की सेवा में करेंगे।
विज्ञापन
नेता नौकरी देता है तो सीधा भ्रष्टाचार है
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के नेता आज भी गांव-गांव घूमकर लोगों को इकट्ठा करके हाथ उठवाते हैं कि बताओ मैंने अपने राज में कितने लोगों को नौकरी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहां का शासन है, जहां पर नेता नौकरी देता हो। यदि नेता नौकरी देता है तो स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार है। तीन साल पहले नौकरी प्राप्त करने के लिए युवाओं को नेताओं के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन कोई सोच भी नहीं सकता था कि प्रदेश में कभी योग्यता के आधार पर नौकरी मिल सकेगी, परंतु इसे हमने करके दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें पांच साल के लिए आती है, परंतु कर्मचारी व अधिकारी 35 वर्ष तक समाज की सेवा करता है, यदि अयोग्य लोग चयनित होंगे तो वे लंबे समय तक समाज के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का बजट एक लाख 10 हजार करोड़ रुपये का होगा। अभी तक 35 हजार नौकरियों के लिए साक्षात्कार हो चुके है और आने वाली नौकरियों में साक्षात्कार नहीं होंगे, जिससे और अधिक पारदर्शिता आएगी। सीएम ने कहा कि मैं भी अपने रिश्तेदारों-जानकारों को नौकरी दे सकता था, लेकिन हमने योग्यता के आधार पर नौकरी दी।
एलएलबी और एमए पास जवान तीन माह बाद आएंगे जनता के बीच
बैच के कुल सिपाही -4358
सीएम ने संबोधित किए - 1721
पोस्ट ग्रेजुएट- 222
एलएलबी- 3
ग्रेजुएट- 1847
12वीं - 2286
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
पिछले 17 साल से सत्ताधारी नेताओं, मुख्यमंत्री के लिए अशुभ मानी जा रही पुलिस अकादमी मधुबन के मिथक को तोड़ते हुए आखिरकार सीएम मनोहर लाल दीक्षांत परेड ग्राउंड में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 84वें बैच के 1721 रिक्रूट सिपाहियों को संबोधित करते कहा कि मधुबन पुलिस कैंपस में आना मुख्यमंत्री के लिए अशुभ संकेत माना जाता था। परंतु 17 साल बाद मैंने माना कि जहां पर अधिकारी और कर्मचारियों को सेवा का प्रशिक्षण दिया जाता है, वह स्थान किसी के लिए अशुभ कैसे हो सकता है। इस मिथ्या को तोड़ने के लिए वे आज यहां आए हैं। बता दें कि मधुबन पुलिस कांप्लेक्स को लेकर आम धारणा रही है कि जो भी मुख्यमंत्री यहां पर आया है, उसके बाद वह कभी सीएम नहीं बन पाया। उन्होंने कहा कि उन्हें तीन साल पहले आना चाहिए, यहां अब देरी से आए हैं।
गौरतलब है कि मधुबन अकादमी की स्थापना सन 1976 में हुई थी। इसके बाद केंद्र के मंत्रियों और प्रदेश के मुख्यमंत्रियों सहित अन्य कई नेता जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए अकादमी पहुंचे और दीक्षांत परेड में हिस्सा लिया। लेकिन मधुबन अकादमी में कुछ मुख्यमंत्रियों के आने के बाद उनकी कुर्सी चली गई। इसके बाद मुख्यमंत्रियों ने अकादमी में आने से कन्नी काटनी शुरू कर दी। वर्ष 1986 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल अकादमी में पहुंचे थे और 1987 में उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद दो मार्च 1991 में जनता दल के मुख्यमंत्री हुकम सिंह अकादमी में पहुंचे और 21 मार्च को उनकी कुर्सी चली गई। उनके बाद ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के सीएम बने। बताया जाता है कि साल 2001 में चौटाला यहां पर आए थे और 2005 में उनकी सरकार चली गई। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा 10 साल सीएम रहे, लेकिन एक बार भी मधुबन कॉंप्लेक्स नहीं आए।
विज्ञापन
जवानों को दिए तीन मंत्र
सीएम मनोहर लाल ने रैक्रूट सिपाहियों को संदेश दिया कि उन्हें समाज में उच्च कोटि के नागरिक बनने की शिक्षा लेनी होगी। नैतिकता, न्याय और निडरता के तीन मंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि यह मंत्र हर संभव सफलता की ओर अग्रसर करेगा। पुलिस की छवि को सुधारने की जरूरत है। इस भर्ती में मेरिट के आधार पर युवाओं को नौकरी मिली है, जिनमें 46 प्रतिशत युवा स्नातक या स्नातकोत्तर हैं। माना जाएगा कि यह सभी युवा अपनी शिक्षा का प्रयोग प्रदेश और समाज की सेवा में करेंगे।
विज्ञापन
नेता नौकरी देता है तो सीधा भ्रष्टाचार है
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के नेता आज भी गांव-गांव घूमकर लोगों को इकट्ठा करके हाथ उठवाते हैं कि बताओ मैंने अपने राज में कितने लोगों को नौकरी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहां का शासन है, जहां पर नेता नौकरी देता हो। यदि नेता नौकरी देता है तो स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार है। तीन साल पहले नौकरी प्राप्त करने के लिए युवाओं को नेताओं के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन कोई सोच भी नहीं सकता था कि प्रदेश में कभी योग्यता के आधार पर नौकरी मिल सकेगी, परंतु इसे हमने करके दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें पांच साल के लिए आती है, परंतु कर्मचारी व अधिकारी 35 वर्ष तक समाज की सेवा करता है, यदि अयोग्य लोग चयनित होंगे तो वे लंबे समय तक समाज के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का बजट एक लाख 10 हजार करोड़ रुपये का होगा। अभी तक 35 हजार नौकरियों के लिए साक्षात्कार हो चुके है और आने वाली नौकरियों में साक्षात्कार नहीं होंगे, जिससे और अधिक पारदर्शिता आएगी। सीएम ने कहा कि मैं भी अपने रिश्तेदारों-जानकारों को नौकरी दे सकता था, लेकिन हमने योग्यता के आधार पर नौकरी दी।
एलएलबी और एमए पास जवान तीन माह बाद आएंगे जनता के बीच
बैच के कुल सिपाही -4358
सीएम ने संबोधित किए - 1721
पोस्ट ग्रेजुएट- 222
एलएलबी- 3
ग्रेजुएट- 1847
12वीं - 2286