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स्कूल का नजिरीक्षण करते ही मोबाइल एप पर अधिकारी को करनी होगी रिपोर्ट पेश
Updated Thu, 27 Sep 2018 11:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। शिक्षा स्तर सुधारने के लिए सरकारी स्कूलों को निरीक्षण करने वाले सभी अधिकारियों की अब मॉनीटरिंग होगी। स्कूल निरीक्षण के लिए अधिकारी किसी स्कूल में गया और किसी टाइम गया, स्कूल में क्या-क्या खामियां पाई गईं हैं, ये पूरी रिपोर्ट अधिकारी को उसी स्कूल से विभाग के मोबाइल एप पर डालनी होगी, ताकि निदेशालय को भी पता चले कि अधिकारी स्कूलों को निरीक्षण कर रहे हैं या फिर कागजों में ही स्कूलों को निरीक्षण हो रहा है।
बता दें शिक्षा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से एप तैयार किया गया है जिसका नाम एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम (एएमएस) है। जिस पर अधिकारियों को स्कूल निरीक्षण की जानकारी देनी होगी। यह प्रक्रिया अक्तूबर से शुरू हो जाएगी, इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने सभी शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए हैं। स्कूलों में कोई कमी मिलती है तो मुखिया और संबंधित विषयों के शिक्षकों को दिक्कत उठानी पड़ सकती है। इस तरह के निरीक्षण से विद्यालयों में और अधिक सुधार आने की संभावना है।
तीन चरण में होगी मॉनीटरिंग, देनी होगी हर जानकारी
स्कूलों में तीन चरणों में मॉनीटरिंग की जाएगी। पहले चरण में प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों के हेड एप में माह भर की जानकारी भरेंगे। इसमें स्कूल के छात्रों की संख्या, अटेंडेंस रिपोर्ट, रिजल्ट, अबसेंट छात्रों का डेटा, शिक्षकों की जानकारी, एजुकेशनल प्रोग्राम, एलईपी प्रोग्राम, स्कूल की जरूरतें और दिक्कतें होंगी। दूसरे चरण में मेंटर स्कूल का दौरा करेंगे और स्कूल हेड द्वारा दी गई जानकारी का मुआयना करेंगे। उन्हें इसकी जानकारी एप में भरनी होगी। इसके तहत ब्लॉक रिसोर्स पर्सन आएंगे, जिन्हें शिक्षा विभाग की ओर से अलग से नियुक्त किया गया है। तीसरे चरण में मॉनीटर स्कूल का दौरा कर वहां की परेशानियों को दूर करेंगे। मॉनीटर का दर्जा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक मौलिक शिक्षा अधिकारी और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर को दिया गया है। इसमें एडीसी और एसडीएम का भी अकाउंट तैयार होगा।
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बिना इंटरनेट के भी जानकारी भरी जा सकती है
दूसरे और तीसरे चरण के तहत अधिकारियों को निरीक्षण करने वाले स्कूल में रहकर ही एप पर जानकारी भरनी होगी। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए इंटरनेट होना जरूरी नहीं है। इसके साथ ही एप में हिंदी या अंग्रेजी में जानकारी भरी जा सकेगी। फील्ड वर्क अधिकारियों के लिए है अनिवार्य स्कूलों में अधिकारियों द्वारा फील्ड विजिट करना अनिवार्य है। कई अधिकारी इस व्यवस्था को लेकर महज औपचारिकता ही पूरी कर रहे हैं।
ये है एएमएस एप
एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम एप पहले डेस्कटॉप पर था, लेकिन अब इसे मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर शिक्षा अधिकारी डाउनलोड कर सकते हैं। योजना में पहले शिक्षा अधिकारी को स्कूल की जांच रिपोर्ट कागज पर लिखकर लानी पड़ती थी और फिर कार्यालय में आकर डेस्कटॉप के माध्यम से रिपोर्ट भेजनी पड़ती थी। अब इसमें बदलाव किया गया है, नए रूप में यह मोबाइल पर डाउनलोड कर इसके माध्यम से स्कूल के निरीक्षण की रिपोर्ट मौके से ऑनलाइन ही निदेशालय को भेज दी जाएगी।
शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश आए हैं कि अब स्कूल का निरीक्षण करने वाले शिक्षा अधिकारी को एएमएस एप पर उसी स्कूल से निरीक्षण की रिपोर्ट भेजनी होगी। साथ ही महीने में तीन से आठ पर स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा। इससे शिक्षा स्तर में सुधार आएगा।
-डॉ. सुशील कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ करनाल।
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करनाल। शिक्षा स्तर सुधारने के लिए सरकारी स्कूलों को निरीक्षण करने वाले सभी अधिकारियों की अब मॉनीटरिंग होगी। स्कूल निरीक्षण के लिए अधिकारी किसी स्कूल में गया और किसी टाइम गया, स्कूल में क्या-क्या खामियां पाई गईं हैं, ये पूरी रिपोर्ट अधिकारी को उसी स्कूल से विभाग के मोबाइल एप पर डालनी होगी, ताकि निदेशालय को भी पता चले कि अधिकारी स्कूलों को निरीक्षण कर रहे हैं या फिर कागजों में ही स्कूलों को निरीक्षण हो रहा है।
बता दें शिक्षा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से एप तैयार किया गया है जिसका नाम एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम (एएमएस) है। जिस पर अधिकारियों को स्कूल निरीक्षण की जानकारी देनी होगी। यह प्रक्रिया अक्तूबर से शुरू हो जाएगी, इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने सभी शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए हैं। स्कूलों में कोई कमी मिलती है तो मुखिया और संबंधित विषयों के शिक्षकों को दिक्कत उठानी पड़ सकती है। इस तरह के निरीक्षण से विद्यालयों में और अधिक सुधार आने की संभावना है।
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तीन चरण में होगी मॉनीटरिंग, देनी होगी हर जानकारी
स्कूलों में तीन चरणों में मॉनीटरिंग की जाएगी। पहले चरण में प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों के हेड एप में माह भर की जानकारी भरेंगे। इसमें स्कूल के छात्रों की संख्या, अटेंडेंस रिपोर्ट, रिजल्ट, अबसेंट छात्रों का डेटा, शिक्षकों की जानकारी, एजुकेशनल प्रोग्राम, एलईपी प्रोग्राम, स्कूल की जरूरतें और दिक्कतें होंगी। दूसरे चरण में मेंटर स्कूल का दौरा करेंगे और स्कूल हेड द्वारा दी गई जानकारी का मुआयना करेंगे। उन्हें इसकी जानकारी एप में भरनी होगी। इसके तहत ब्लॉक रिसोर्स पर्सन आएंगे, जिन्हें शिक्षा विभाग की ओर से अलग से नियुक्त किया गया है। तीसरे चरण में मॉनीटर स्कूल का दौरा कर वहां की परेशानियों को दूर करेंगे। मॉनीटर का दर्जा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक मौलिक शिक्षा अधिकारी और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर को दिया गया है। इसमें एडीसी और एसडीएम का भी अकाउंट तैयार होगा।
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बिना इंटरनेट के भी जानकारी भरी जा सकती है
दूसरे और तीसरे चरण के तहत अधिकारियों को निरीक्षण करने वाले स्कूल में रहकर ही एप पर जानकारी भरनी होगी। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए इंटरनेट होना जरूरी नहीं है। इसके साथ ही एप में हिंदी या अंग्रेजी में जानकारी भरी जा सकेगी। फील्ड वर्क अधिकारियों के लिए है अनिवार्य स्कूलों में अधिकारियों द्वारा फील्ड विजिट करना अनिवार्य है। कई अधिकारी इस व्यवस्था को लेकर महज औपचारिकता ही पूरी कर रहे हैं।
ये है एएमएस एप
एकेडमिक मॉनीटरिंग सिस्टम एप पहले डेस्कटॉप पर था, लेकिन अब इसे मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर शिक्षा अधिकारी डाउनलोड कर सकते हैं। योजना में पहले शिक्षा अधिकारी को स्कूल की जांच रिपोर्ट कागज पर लिखकर लानी पड़ती थी और फिर कार्यालय में आकर डेस्कटॉप के माध्यम से रिपोर्ट भेजनी पड़ती थी। अब इसमें बदलाव किया गया है, नए रूप में यह मोबाइल पर डाउनलोड कर इसके माध्यम से स्कूल के निरीक्षण की रिपोर्ट मौके से ऑनलाइन ही निदेशालय को भेज दी जाएगी।
शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश आए हैं कि अब स्कूल का निरीक्षण करने वाले शिक्षा अधिकारी को एएमएस एप पर उसी स्कूल से निरीक्षण की रिपोर्ट भेजनी होगी। साथ ही महीने में तीन से आठ पर स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा। इससे शिक्षा स्तर में सुधार आएगा।
-डॉ. सुशील कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ करनाल।