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पानी की बर्बादी रोकें : प्रो, श्योराण
Updated Thu, 15 Jun 2017 11:20 PM IST
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नीलोखेड़ी। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के निदेशक प्रो. अत्तर सिंह श्योराण ने स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े अधिकारियों और प्रेरकों का आह्वान किया कि वे पानी की बर्बादी व गंदे पानी से होने वाले नुकसान से आम जनता को अवगत कराएं और भूमि को गंदा होने से बचाएं। वे संस्थान में संपन्न हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में बोल रहे थे। कार्यक्रम में 9 जिलों के स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े जिला कार्यक्रम समन्वयक, खंड कार्यक्रम समन्वयक व प्रेरकों ने हिस्सा लिया।
विश्व बैंक से आए अतिन विश्वास, सुब्रतो चक्रवर्ती, रवि व हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के सहायक प्रोफेसर संदीप भारद्वाज ने प्रतिभागियों को तीन दिन में गांवों में पैदा होने वाले ठोस व तरल कचरे से होने वाले नुकसान व इस कचरे के निष्पादन के बारे प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षकों ने बताया कि इस अभियान से जुड़े अधिकारी व प्रेरक गांव-गांव जाकर निर्धारित प्रपत्र में गांवों में पैदा होने वाले ठोस व तरल कचरे का विवरण भरें और रिकार्ड तैयार करें।
प्रशिक्षकों ने बताया कि घरों से निकलने वाले पानी को सोकता गढ़ा बनाकर भूमि के गर्भ में पहुंचाया जा सकता है। गोबर व कचरे की खाद बन सकती है। गोबर गैस प्लांट लगाकर ईंधन तैयार किया जा सकता है। संस्थान के निदेशक प्रो. अत्तर सिंह श्योराण ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े ये लोग पूरा अध्ययन करने के बाद ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन और अच्छे ढंग से करने का समाधान बता पायेंगे।
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विश्व बैंक से आए अतिन विश्वास, सुब्रतो चक्रवर्ती, रवि व हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के सहायक प्रोफेसर संदीप भारद्वाज ने प्रतिभागियों को तीन दिन में गांवों में पैदा होने वाले ठोस व तरल कचरे से होने वाले नुकसान व इस कचरे के निष्पादन के बारे प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षकों ने बताया कि इस अभियान से जुड़े अधिकारी व प्रेरक गांव-गांव जाकर निर्धारित प्रपत्र में गांवों में पैदा होने वाले ठोस व तरल कचरे का विवरण भरें और रिकार्ड तैयार करें।
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प्रशिक्षकों ने बताया कि घरों से निकलने वाले पानी को सोकता गढ़ा बनाकर भूमि के गर्भ में पहुंचाया जा सकता है। गोबर व कचरे की खाद बन सकती है। गोबर गैस प्लांट लगाकर ईंधन तैयार किया जा सकता है। संस्थान के निदेशक प्रो. अत्तर सिंह श्योराण ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े ये लोग पूरा अध्ययन करने के बाद ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन और अच्छे ढंग से करने का समाधान बता पायेंगे।
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