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Karnal News: सात माह में 2,614 टीबी मरीजों की पहचान
Fri, 29 Aug 2025 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 29 Aug 2025 01:37 AM IST
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काजल पांचाल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त करनाल बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सात महीने में 145 शिविर लगाकर करीब 4 लाख 83 हजार 929 लोगों की स्क्रीनिंग की। इनमें से घर-घर जाकर 10,396 लोगों के एक्स-रे किए गए, जिनमें से 546 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद इन पॉजिटिव मामलों का सीबी नाट टेस्ट करने पर 498 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई। यानी दोनों तरह की जांच में 2,614 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई।
इस बार भी विभाग ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया है, ताकि कोई मरीज जांच और इलाज से वंचित न रह जाए। विभाग के अनुसार, जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है उनमें से अधिकतर मरीज बाहर से आए हुए या उत्तर प्रदेश व बिहार के रहने वाले हैं, जो जिले में आकर मजदूरी का काम करते हुए स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में वर्ष 2019 में 3854 मरीज, वर्ष 2020 में 4312, वर्ष 2021 में 4274, वर्ष 2022 में 4507, वर्ष 2023 में 5132 टीबी के मरीज पाए गए।
वहीं, पिछले वर्ष 4,533 मरीज सामने आए थे, जिनमें से 3,919 पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। बाकी मरीजों का इलाज चल रहा है क्योंकि कई मरीजों का इलाज लंबा चलता है तो कई छह महीने में पूरा ट्रीटमेंट लेकर स्वस्थ हो जाते हैं।
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23 जगह बलगम जांच केंद्र
जिले में 9 क्षय रोग केंद्र व 23 जगह बलगम जांच केंद्र हैं। इन केंद्रों पर नि:शुल्क बलगम जांच की जाती है। साथ ही जिस व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखते हैं तो वह उन केंद्रों पर जाकर नि:शुल्क जांच करा सकता है। वहीं टीबी पॉजिटिव मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति माह देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, एनटीईपी के तहत टीबी की सूचना देने और उनकी बलगम जांच करवाने के बाद उस व्यक्ति के टीबी पॉजिटिव पाए जाने पर सूचना देने वाले को 500 रुपये प्रति मरीज देने का प्रावधान है।
टीबी के प्रमुख लक्षण-
दो हफ्ते से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना।
शाम को बुखार आना।
खांसते समय बलगम या खून आना।
सीने में दर्द होना या सांस लेने में तकलीफ।
वजन और भूख कम होना।
जिला उप-सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों में भी टीबी के लक्षण दिखते हैं, उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए, जहां इलाज और दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मरीजों को पौष्टिक आहार खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, ताकि वे जल्दी स्वस्थ हो सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त करनाल बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सात महीने में 145 शिविर लगाकर करीब 4 लाख 83 हजार 929 लोगों की स्क्रीनिंग की। इनमें से घर-घर जाकर 10,396 लोगों के एक्स-रे किए गए, जिनमें से 546 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद इन पॉजिटिव मामलों का सीबी नाट टेस्ट करने पर 498 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई। यानी दोनों तरह की जांच में 2,614 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई।
इस बार भी विभाग ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया है, ताकि कोई मरीज जांच और इलाज से वंचित न रह जाए। विभाग के अनुसार, जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई है उनमें से अधिकतर मरीज बाहर से आए हुए या उत्तर प्रदेश व बिहार के रहने वाले हैं, जो जिले में आकर मजदूरी का काम करते हुए स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में वर्ष 2019 में 3854 मरीज, वर्ष 2020 में 4312, वर्ष 2021 में 4274, वर्ष 2022 में 4507, वर्ष 2023 में 5132 टीबी के मरीज पाए गए।
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वहीं, पिछले वर्ष 4,533 मरीज सामने आए थे, जिनमें से 3,919 पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। बाकी मरीजों का इलाज चल रहा है क्योंकि कई मरीजों का इलाज लंबा चलता है तो कई छह महीने में पूरा ट्रीटमेंट लेकर स्वस्थ हो जाते हैं।
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23 जगह बलगम जांच केंद्र
जिले में 9 क्षय रोग केंद्र व 23 जगह बलगम जांच केंद्र हैं। इन केंद्रों पर नि:शुल्क बलगम जांच की जाती है। साथ ही जिस व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखते हैं तो वह उन केंद्रों पर जाकर नि:शुल्क जांच करा सकता है। वहीं टीबी पॉजिटिव मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति माह देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, एनटीईपी के तहत टीबी की सूचना देने और उनकी बलगम जांच करवाने के बाद उस व्यक्ति के टीबी पॉजिटिव पाए जाने पर सूचना देने वाले को 500 रुपये प्रति मरीज देने का प्रावधान है।
टीबी के प्रमुख लक्षण-
दो हफ्ते से अधिक समय तक लगातार खांसी रहना।
शाम को बुखार आना।
खांसते समय बलगम या खून आना।
सीने में दर्द होना या सांस लेने में तकलीफ।
वजन और भूख कम होना।
जिला उप-सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों में भी टीबी के लक्षण दिखते हैं, उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए, जहां इलाज और दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मरीजों को पौष्टिक आहार खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, ताकि वे जल्दी स्वस्थ हो सकें।