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Karnal News: 42 चिट फंड कंपनियों में डूबे 24 करोड़, पीड़ित बोले-करेंगे भूख हड़ताल
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अलग-अलग 42 चिटफंड कंपनियों में करनाल के लोगों के 24 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। बुधवार को लोगों ने कंपनियों से रुपये वापस दिलाने की मांग उठाई। कश्यप धर्मशाला में बैठक भी की गई। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे निवेश के नाम पर उनकी जिंदगी की जमापूंजी डूब गई लेकिन सालों बीतने के बाद भी उन्हें एक रुपया तक वापस नहीं मिला है। उन्होंने मांग उठाई कि ओडिशा सरकार के समान हरियाणा सरकार भी उनके पैसे दे।
संगठन और पीड़ितों ने सरकार से जल्द पैसा लौटाने की मांग की। चेतावनी दी है कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल करेंगे। धरने पर बैठेंगे। कश्यप धर्मशाला में बैठक के बाद नरेश कुमार ने बताया कि करनाल के पीड़ित लोगों की सूची तैयार कर ली गई है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने 500 या 1000 रुपये महीने की दर से चिटफंड कंपनियों में पैसा लगाया था। उन्हें पांच साल में पैसा डबल करने का भरोसा दिया गया था। इन किस्तों के पांच साल पूरे हुए कई साल बीत चुके हैं लेकिन आज तक किसी को रुपया वापस नहीं मिला।
पीड़ित महिला गांव की कलाशो देवी, कांता, दिनेश कुमार ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि 500 रुपये महीना डालकर कुछ पैसे जुड़ जाएंगे और जरूरत के समय काम आएंगे, लेकिन अब उनके पैसे ही डूब गए हैं। किसी का 50 हजार, किसी का एक लाख और किसी का तीन लाख रुपये फंसा हुआ है।
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सरकार लौटाए पीड़ितों का पैसा
करनाल में कई चिटफंड कंपनियां काम कर रही थीं। वर्ष 2016 में सरकार ने इन्हें करीब 3 लाख कंपनियों के साथ बंद कर दिया था। इसके बाद सरकार ने बड्स एक्ट 2019 कानून बनाया, जिसके अनुसार जिन लोगों का पैसा इन कंपनियों में फंसा था, उसका भुगतान सरकार की ओर से किया जाना था। इस कानून में 180 दिन के अंदर भुगतान का वादा किया गया था लेकिन आज तक वह वादा पूरा नहीं हुआ। नरेश कुमार ने कहा कि ओडिशा सरकार ने पीड़ितों का पैसा लौटाया है, चाहे वह 10 हजार हो या 10 लाख रुपये। इसी तर्ज पर हरियाणा में भी सरकार को चार महीने के अंदर लोगों के पैसे लौटाने चाहिए।
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करनाल। अलग-अलग 42 चिटफंड कंपनियों में करनाल के लोगों के 24 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। बुधवार को लोगों ने कंपनियों से रुपये वापस दिलाने की मांग उठाई। कश्यप धर्मशाला में बैठक भी की गई। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे निवेश के नाम पर उनकी जिंदगी की जमापूंजी डूब गई लेकिन सालों बीतने के बाद भी उन्हें एक रुपया तक वापस नहीं मिला है। उन्होंने मांग उठाई कि ओडिशा सरकार के समान हरियाणा सरकार भी उनके पैसे दे।
संगठन और पीड़ितों ने सरकार से जल्द पैसा लौटाने की मांग की। चेतावनी दी है कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल करेंगे। धरने पर बैठेंगे। कश्यप धर्मशाला में बैठक के बाद नरेश कुमार ने बताया कि करनाल के पीड़ित लोगों की सूची तैयार कर ली गई है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने 500 या 1000 रुपये महीने की दर से चिटफंड कंपनियों में पैसा लगाया था। उन्हें पांच साल में पैसा डबल करने का भरोसा दिया गया था। इन किस्तों के पांच साल पूरे हुए कई साल बीत चुके हैं लेकिन आज तक किसी को रुपया वापस नहीं मिला।
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पीड़ित महिला गांव की कलाशो देवी, कांता, दिनेश कुमार ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि 500 रुपये महीना डालकर कुछ पैसे जुड़ जाएंगे और जरूरत के समय काम आएंगे, लेकिन अब उनके पैसे ही डूब गए हैं। किसी का 50 हजार, किसी का एक लाख और किसी का तीन लाख रुपये फंसा हुआ है।
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सरकार लौटाए पीड़ितों का पैसा
करनाल में कई चिटफंड कंपनियां काम कर रही थीं। वर्ष 2016 में सरकार ने इन्हें करीब 3 लाख कंपनियों के साथ बंद कर दिया था। इसके बाद सरकार ने बड्स एक्ट 2019 कानून बनाया, जिसके अनुसार जिन लोगों का पैसा इन कंपनियों में फंसा था, उसका भुगतान सरकार की ओर से किया जाना था। इस कानून में 180 दिन के अंदर भुगतान का वादा किया गया था लेकिन आज तक वह वादा पूरा नहीं हुआ। नरेश कुमार ने कहा कि ओडिशा सरकार ने पीड़ितों का पैसा लौटाया है, चाहे वह 10 हजार हो या 10 लाख रुपये। इसी तर्ज पर हरियाणा में भी सरकार को चार महीने के अंदर लोगों के पैसे लौटाने चाहिए।