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अब स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 की तैयारियां शुरू, इस बार इंदौर की तर्ज पर चलेगा अभियान
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:40 PM IST
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स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 की तैयारी शुरू, इंदौर की तर्ज पर चलेगा अभियान
स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी उपाध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा, सीएम को सौंपी सुझावों की रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। देश के शहरों की प्रतिस्पर्धा में स्वच्छता रैंकिंग को लेकर सम्मानजनक स्थान हासिल करने के बाद करनाल अब मध्यप्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के नक्शे कदम पर चलकर स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 में सिरमौर बनने की तैयारी में है। इसकी तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। हाल ही में स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने इंदौर शहर का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. योगेंद्र मलिक के अतिरिक्त नगर निगम करनाल के अधीक्षण अभियंता रामजी लाल व सोनीपत नगर निगम के अधीक्षण अभियंता ठाकुर लाल शर्मा भी शामिल रहे। इंदौर शहर आखिर इतना साफ कैसे हुआ? जागरूकता के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए, कुछ कठोर कदम भी उठाए और वहां की जनता को जागरूक कर कौन-कौन से निर्णय लेकर उस शहर को देश के सबसे साफ-सुथरे शहर के मुकाम तक पहुंचाया, इस बारे कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र ने विस्तार से दौरे के अनुभवों को सांझा किया। अब इंदौर की तर्ज पर ही करनाल नगर निगम नये सिरे से सर्वेक्षण 2019 की तैयारी में जुटेगा।
खुले में शौच के लिए चलाया रोको और टोको अभियान
सुभाष चंद्र ने बताया कि खुले में शौच पर रोक वहां की सबसे बड़ी समस्या थी। नगर निगम ने इसे एक चुनौती के रूप मे स्वीकार करके ठोस कदम उठाए। वर्ष 2014 पर जब इंदौर निराशाजनक रैंकिंग में था, तो अधिकारियों ने शहर की कमियों को दूर करने के लिए योजनाएं बनाई व रोको और टोको अभियान लॉन्च किया। शहर में 15 हजार से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं थे। एक वर्ष की अवधि के भीतर नगर निगम ने व्यापक स्वच्छता कवरेज प्रदान करते हुए 12 हजार, 549 व्यक्तिगत शौचालय, 200 मुत्र घर और 190 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया।
मुख्य मार्गों से हटाए 1400 कूड़ेदान
सुभाष चंद्र ने बताया कि सुचारू कचरा संरक्षण प्रणाली के तहत इंदौर शहर के मुख्य मार्गों पर 1400 कूड़ेदान लगाए गए थे। एक निर्णय लेकर सभी को हटा दिया गया। कारण, जो लोग डोर-टू-डोर कचरा संरक्षण सेवा के तहत किसी कारण से कचरा नहीं दे पाते थे, वे उसे प्लास्टिक की थैलियों में डालकर कूड़ेदानों में डालते थे और जब कूड़ेदान भर जाते थे, तो उसके आस-पास गंदगी फैलती थी। इसके समाधान के लिए कूड़ेदानों को हटाकर मोबाईल कचरा संग्रहण वैन की शुरूआत की गई। देखने में पाया गया कि पूरा शहर आज भी डस्टबीन फ्री है। परिणाम स्वरूप 4 महीने के भीतर ही शहर में प्लास्टिक प्रदूषण का स्तर प्रतिघन मीटर 140 माईक्रोग्राम से घटकर 80 माईक्रोग्राम आया।
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सीएम को सौंपी सुझावों की रिपोर्ट
कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चन्द्र ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को इंदौर शहर के दौरे की एक संक्षिप्त रिपोर्ट भेंट की हैं। रिपोर्ट में सुभाष चंद्र ने बताया कि हरियाणा के करनाल और दूसरे शहरों को भी इंदौर की तरह साफ-सुथरा बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने कुछ सुझाव दिए और कहा कि गंदगी पर जुर्माने का प्रावधान हो। संपूर्ण स्वच्छता लाने के लिए प्रदेश में स्वच्छता टास्क फोर्स बनाई जाए। स्वच्छता मिशन में स्वयंसेवी संस्थाओं ओर आम जनता की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हो। विद्यालय स्तर पर एक विषय के रूप में स्वच्छता का पाठ पढाया जाए। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सुव्यवस्थित ढंग से जागरूकता अभियान चलाए जाएं। सफाई के लिए अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई जाएं।
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स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी उपाध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा, सीएम को सौंपी सुझावों की रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। देश के शहरों की प्रतिस्पर्धा में स्वच्छता रैंकिंग को लेकर सम्मानजनक स्थान हासिल करने के बाद करनाल अब मध्यप्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के नक्शे कदम पर चलकर स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 में सिरमौर बनने की तैयारी में है। इसकी तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। हाल ही में स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने इंदौर शहर का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. योगेंद्र मलिक के अतिरिक्त नगर निगम करनाल के अधीक्षण अभियंता रामजी लाल व सोनीपत नगर निगम के अधीक्षण अभियंता ठाकुर लाल शर्मा भी शामिल रहे। इंदौर शहर आखिर इतना साफ कैसे हुआ? जागरूकता के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए, कुछ कठोर कदम भी उठाए और वहां की जनता को जागरूक कर कौन-कौन से निर्णय लेकर उस शहर को देश के सबसे साफ-सुथरे शहर के मुकाम तक पहुंचाया, इस बारे कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र ने विस्तार से दौरे के अनुभवों को सांझा किया। अब इंदौर की तर्ज पर ही करनाल नगर निगम नये सिरे से सर्वेक्षण 2019 की तैयारी में जुटेगा।
खुले में शौच के लिए चलाया रोको और टोको अभियान
सुभाष चंद्र ने बताया कि खुले में शौच पर रोक वहां की सबसे बड़ी समस्या थी। नगर निगम ने इसे एक चुनौती के रूप मे स्वीकार करके ठोस कदम उठाए। वर्ष 2014 पर जब इंदौर निराशाजनक रैंकिंग में था, तो अधिकारियों ने शहर की कमियों को दूर करने के लिए योजनाएं बनाई व रोको और टोको अभियान लॉन्च किया। शहर में 15 हजार से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं थे। एक वर्ष की अवधि के भीतर नगर निगम ने व्यापक स्वच्छता कवरेज प्रदान करते हुए 12 हजार, 549 व्यक्तिगत शौचालय, 200 मुत्र घर और 190 सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया।
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मुख्य मार्गों से हटाए 1400 कूड़ेदान
सुभाष चंद्र ने बताया कि सुचारू कचरा संरक्षण प्रणाली के तहत इंदौर शहर के मुख्य मार्गों पर 1400 कूड़ेदान लगाए गए थे। एक निर्णय लेकर सभी को हटा दिया गया। कारण, जो लोग डोर-टू-डोर कचरा संरक्षण सेवा के तहत किसी कारण से कचरा नहीं दे पाते थे, वे उसे प्लास्टिक की थैलियों में डालकर कूड़ेदानों में डालते थे और जब कूड़ेदान भर जाते थे, तो उसके आस-पास गंदगी फैलती थी। इसके समाधान के लिए कूड़ेदानों को हटाकर मोबाईल कचरा संग्रहण वैन की शुरूआत की गई। देखने में पाया गया कि पूरा शहर आज भी डस्टबीन फ्री है। परिणाम स्वरूप 4 महीने के भीतर ही शहर में प्लास्टिक प्रदूषण का स्तर प्रतिघन मीटर 140 माईक्रोग्राम से घटकर 80 माईक्रोग्राम आया।
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सीएम को सौंपी सुझावों की रिपोर्ट
कार्यकारी उपाध्यक्ष सुभाष चन्द्र ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को इंदौर शहर के दौरे की एक संक्षिप्त रिपोर्ट भेंट की हैं। रिपोर्ट में सुभाष चंद्र ने बताया कि हरियाणा के करनाल और दूसरे शहरों को भी इंदौर की तरह साफ-सुथरा बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने कुछ सुझाव दिए और कहा कि गंदगी पर जुर्माने का प्रावधान हो। संपूर्ण स्वच्छता लाने के लिए प्रदेश में स्वच्छता टास्क फोर्स बनाई जाए। स्वच्छता मिशन में स्वयंसेवी संस्थाओं ओर आम जनता की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हो। विद्यालय स्तर पर एक विषय के रूप में स्वच्छता का पाठ पढाया जाए। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सुव्यवस्थित ढंग से जागरूकता अभियान चलाए जाएं। सफाई के लिए अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई जाएं।