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टोल कंपनी का दावा, सैकड़ों लोगों ने बनवा रखी हैं फ्री लोकल आईडी
Updated Fri, 29 Jun 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। लोकल वाहनों को टोल फ्री कराने की बढ़ रही मांग को देखते हुए टोल कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया कि लोकल वाहन की आईडी के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि सैकड़ों की संख्या में लोगों ने नि:शुल्क निकलने के लिए घरौंडा व आसपास के गांवों की नकली आईडी बना रखी हैं। टोल कंपनी की सख्ती के बाद सैकड़ों आईडी जब्त की गई हैं, जिन्हें फर्जी बताया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि इन लोगों के खिलाफ कंपनी धोखाधड़ी करने की शिकायत पुलिस को देगी।
गौरतलब है कि करीब साढ़े तीन वर्ष पहले बसताड़ा गांव के पास टोल स्थापित करते समय इलाके के लोग टोल के खिलाफ लामबंद हो गए थे। टोल का पुरजोर विरोध करते हुए स्थानीय लोगों ने टोल शिफ्ट करने के लिए आंदोलन छेड़ दिया। स्थानीय लोगों के विरोध के आगे झुकते हुए टोल कंपनी ने स्थानीय लोगों को मुफ्त क्रासिंग का आश्वासन दिया था, तभी से लोकल वाहन चालकों को टोल पर फ्री क्रासिंग की सुविधा मिल रही थी। लेकिन कुछ समय बाद लोकल वाहनों के लिए शुरू की गई। इस सुविधा को गलत इस्तेमाल शुरू हो गया। टोल फ्री वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण कंपनी ने आईडी जब्त करनी शुरू कर दी। चेकिंग के दौरान टोल कर्मियों ने सैकड़ों की संख्या में फर्जी आईडी पकड़ी हैं। इन आईडी प्रूफ के जरिये वाहन चालक लोकल होने का हवाला देकर निशुल्क टोल पार करते थे। दरअसल टोल कंपनी द्वारा घरौंडा शहर व आस-पास के गांवों के स्थानीय वाहनों को छूट दे रखी हैं। टोल कंपनी के डीजीएम संजय माथुर ने बताया कि टोल पर चेकिंग के दौरान उन्होंने दो हजार से अधिक ऐसे फर्जी आईडी कार्ड पकड़े हैं, जिन पर लोकल एड्रेस दिखाया गया है।
फर्जी आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व वोटर कार्ड
टोल कंपनी डीजीएम संजय माथुर ने बताया कि टोल पर पकड़े गए दस्तावेजों में बड़ी संख्या में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, फर्जी पते के आधार कार्ड व वोटर कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वाहन चालकों ने मुफ्त टोल क्रासिंग के लिए रंगीन फोटोस्टेट के जरिये आईडी कार्ड्स पर लोकल एड्रेस दर्ज करके फर्जी आईडी बना रखी है। टोल पर वाहन चालक ऐसे लाइसेंस व कार्ड दिखाकर आस-पास स्थित गांवों से संबंधित होने का दावा करते है और बिना टोल दिए गाड़ियां निकालते हैं। फर्जी आईडी बनाने वाले पुलिस कर्मी, सरकारी कर्मचारी और पांच हजार व्हीकल निकलते है फ्री टोल कंपनी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब चार से साढ़े चार हजार कारें व हल्के वाहन फ्री निकलते हैं। इसके इलावा 150 से 200 कैंटर, 150 के करीब ट्रक व 550 से 600 की संख्या में भारी वाहन बिना टोल दिए निकलते हैं।
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करनाल। लोकल वाहनों को टोल फ्री कराने की बढ़ रही मांग को देखते हुए टोल कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया कि लोकल वाहन की आईडी के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। कंपनी अधिकारियों का दावा है कि सैकड़ों की संख्या में लोगों ने नि:शुल्क निकलने के लिए घरौंडा व आसपास के गांवों की नकली आईडी बना रखी हैं। टोल कंपनी की सख्ती के बाद सैकड़ों आईडी जब्त की गई हैं, जिन्हें फर्जी बताया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि इन लोगों के खिलाफ कंपनी धोखाधड़ी करने की शिकायत पुलिस को देगी।
गौरतलब है कि करीब साढ़े तीन वर्ष पहले बसताड़ा गांव के पास टोल स्थापित करते समय इलाके के लोग टोल के खिलाफ लामबंद हो गए थे। टोल का पुरजोर विरोध करते हुए स्थानीय लोगों ने टोल शिफ्ट करने के लिए आंदोलन छेड़ दिया। स्थानीय लोगों के विरोध के आगे झुकते हुए टोल कंपनी ने स्थानीय लोगों को मुफ्त क्रासिंग का आश्वासन दिया था, तभी से लोकल वाहन चालकों को टोल पर फ्री क्रासिंग की सुविधा मिल रही थी। लेकिन कुछ समय बाद लोकल वाहनों के लिए शुरू की गई। इस सुविधा को गलत इस्तेमाल शुरू हो गया। टोल फ्री वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण कंपनी ने आईडी जब्त करनी शुरू कर दी। चेकिंग के दौरान टोल कर्मियों ने सैकड़ों की संख्या में फर्जी आईडी पकड़ी हैं। इन आईडी प्रूफ के जरिये वाहन चालक लोकल होने का हवाला देकर निशुल्क टोल पार करते थे। दरअसल टोल कंपनी द्वारा घरौंडा शहर व आस-पास के गांवों के स्थानीय वाहनों को छूट दे रखी हैं। टोल कंपनी के डीजीएम संजय माथुर ने बताया कि टोल पर चेकिंग के दौरान उन्होंने दो हजार से अधिक ऐसे फर्जी आईडी कार्ड पकड़े हैं, जिन पर लोकल एड्रेस दिखाया गया है।
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फर्जी आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व वोटर कार्ड
टोल कंपनी डीजीएम संजय माथुर ने बताया कि टोल पर पकड़े गए दस्तावेजों में बड़ी संख्या में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, फर्जी पते के आधार कार्ड व वोटर कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वाहन चालकों ने मुफ्त टोल क्रासिंग के लिए रंगीन फोटोस्टेट के जरिये आईडी कार्ड्स पर लोकल एड्रेस दर्ज करके फर्जी आईडी बना रखी है। टोल पर वाहन चालक ऐसे लाइसेंस व कार्ड दिखाकर आस-पास स्थित गांवों से संबंधित होने का दावा करते है और बिना टोल दिए गाड़ियां निकालते हैं। फर्जी आईडी बनाने वाले पुलिस कर्मी, सरकारी कर्मचारी और पांच हजार व्हीकल निकलते है फ्री टोल कंपनी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब चार से साढ़े चार हजार कारें व हल्के वाहन फ्री निकलते हैं। इसके इलावा 150 से 200 कैंटर, 150 के करीब ट्रक व 550 से 600 की संख्या में भारी वाहन बिना टोल दिए निकलते हैं।
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