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नामीबिया के दल ने जताई एनडीआरआई के साथ डेयरी शिक्षा में सहभागिता की इच्छा

Thu, 27 Jul 2017 11:47 PM IST
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:47 PM IST
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नामीबिया के दल ने जताई एनडीआरआई के साथ डेयरी शिक्षा में सहभागिता की इच्छा
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल।
नामीबिया गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति हाइफिपुन्ने पोहम्बा ने 10 सदस्यीय दल के साथ वीरवार को राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान का दौरा किया और संस्थान द्वारा विकसित की जा रही तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने डेरी शिक्षा के क्षेत्र में नामीबिया के साथ सहभागिता का प्रस्ताव रखा, वहीं एनडीआरआई के निदेशक डा. आरआरबी सिंह ने मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर का हवाला देते हुए सहभागिता की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

दल ने संस्थान के कैटल यार्ड, कृत्रिम प्रजनन अनुसंधान केंद्र, बीपीडी यूनिट, एनीमल बायोटेक्नोलोजी रिसर्च सेंटर तथा नेशनल रेफरल लैब का निरीक्षण किया तथा संस्थान द्वारा तैयार किए गए लजीज खाद्य पदार्थों का स्वाद भी चखा। नामीबिया के पूर्व राष्ट्रपति हाइफिपुन्ने पोहम्बा ने कहा कि हिंदुस्तान नामाबिया का मित्र देश है। यहां 1.25 करोड़ लोगों का पेट भरना अपने आप में कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। इसके अलावा दूध उत्पादन में नंबर वन स्थान पर बने रहना भी बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने भारत के वैज्ञानिकों को नामीबिया में जाकर डेरी की शिक्षा देने तथा नामीबिया के विद्यार्थियों को एनडीआरआई में प्रवेश देने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि नामीबिया में पशुओं की संख्या अधिक है, इसलिए एनडीआरआई उनके लिए प्रेरणादायक साबित होगी। संस्थान के निदेशक डा. आरआरबी सिंह ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा भविष्य में किस प्रकार की योजना बनाई जा रही है, इस बात से भी अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि एनडीआरआई में साहीवाल, थारपारकर, गिर जैसी देशी नस्ल की गायों को रखा हुआ है और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए शोध कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनडीआरआई डेरी के क्षेत्र में एशिया का नंबर वन डेरी संस्थान हैं, जहां विद्यार्थियों को प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग तथा मैनेजमेंट की शिक्षा दी जाती है। संयुक्त निदेशक अनुसंधान डा. बिमलेश मान ने बताया कि एनडीआरआई में भारत के साथ साथ विदेशों से भी करीब 1000 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संस्थान में लगभग दो हजार पशु हैं, जोकि रोजाना 4000 लीटर दूध देते हैं। दल में विशेष रूप से मिस्टर एवररिस्टस, प्रो. लाजरस हंगुला मौजूद रहे।
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