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04. 21.67 करोड़ से बदलेगी जिले की तस्वीर, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले में जहां भी प्राथमिक एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी है, उसे जल्द दूर किया जाएगा। सरकार ने डी-प्लान के तहत 21.67 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों के लिए जारी की है। जिसमें से 14.50 करोड़ ग्रामीण (सभी 8 विकास खंड) और 7.17 करोड़ शहरी क्षेत्र (नगर निगम और सभी नगर पालिका) मेें खर्च किए जाएंगे। कुल राशि का केवल 30 प्रतिशत गलियों व नालों के निर्माण पर खर्च होगा। जबकि 70 प्रतिशत राशि शिक्षा एवं स्वास्थ्य, सामुदायिक केंद्र, जलापूूर्ति, सिंचाई, खेल, आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण या स्थानीय लोगों की आवश्यकता वाले प्राथमिकता के कार्यों पर खर्च होगी।
वीरवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने डी प्लान के तहत होने वाले कार्यों को लेकर लघु सचिवालय में बैठक ली। बैठक में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप और मेयर रेनू बाला गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। डीसी ने अधिकारियों से कहा कि भेजी गई सूची में खामियां मिली तो संबंधित अधिकारी को चार्जशीट होगी। राशि को खर्च करने के लिए सरकार की ओर से विशेष गाइडलाइन भी जारी की गई है। जिसके अनुसार कुल राशि से करीब 12.97 करोड़ रुपये सामान्य घटक और 8.69 करोड़ रुपये की राशि एसईएसपी कम्पोनेंट के तहत खर्च होने हैं। राशि सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जनसंख्या के आधार पर बांटी गई है। बैठक में इंद्री नगर पालिका चेयरमैन शिवानी गोयल भी उपस्थित रहीं। ब्यूरो
हर परियोजना की ई-ट्रैकिंग से भेजनी होगी रिपोर्ट
डी-प्लान के तहत होने वाले कार्यों के पूरा होने पर उसकी ई-ट्रैकिंग से रिपोर्ट भी भेजनी होगी। जिसमें प्रोजेक्ट की फोटो भी अपलोड होगी। बैठक में डीसी ने अधिकारियों से कहा कि जिस भी काम के लिए पैसा दिया जाएगा, खर्च करने से पहले उस कार्य की विस्तार से जानकारी लें कि जो पैसा कार्य के लिए अलॉट किया गया है क्या उसमें कार्य पूरा हो जाएगा। ऐसे किसी भी कार्य को प्रोजेक्ट में शामिल न करें, जो तय बजट में पूरा न हो।
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हल्फिया में बताना होगा, पैसा विवादित जगह पर नहीं खर्चा
इस बार सभी बीडीपीओ और पालिका सचिवों को कार्यों पर खर्च की गई राशि और काम पूरे हो जाने का प्रमाण पत्र हल्फिया के साथ देना होगा। जिसमें यह भी वर्णन करना होगा कि सभी कार्य गैर विवादित या कब्जा मुक्त जमीन पर ही करवाए गए हैं। एडीसी योगेश कुमार ने कहा कि अधिकारी संबंधित विधायक व जन प्रतिनिधियों से विचार विमर्श करके ही विकास कार्यों की रिपोर्ट बनाएं।
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करनाल। जिले में जहां भी प्राथमिक एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी है, उसे जल्द दूर किया जाएगा। सरकार ने डी-प्लान के तहत 21.67 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों के लिए जारी की है। जिसमें से 14.50 करोड़ ग्रामीण (सभी 8 विकास खंड) और 7.17 करोड़ शहरी क्षेत्र (नगर निगम और सभी नगर पालिका) मेें खर्च किए जाएंगे। कुल राशि का केवल 30 प्रतिशत गलियों व नालों के निर्माण पर खर्च होगा। जबकि 70 प्रतिशत राशि शिक्षा एवं स्वास्थ्य, सामुदायिक केंद्र, जलापूूर्ति, सिंचाई, खेल, आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण या स्थानीय लोगों की आवश्यकता वाले प्राथमिकता के कार्यों पर खर्च होगी।
वीरवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने डी प्लान के तहत होने वाले कार्यों को लेकर लघु सचिवालय में बैठक ली। बैठक में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप और मेयर रेनू बाला गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। डीसी ने अधिकारियों से कहा कि भेजी गई सूची में खामियां मिली तो संबंधित अधिकारी को चार्जशीट होगी। राशि को खर्च करने के लिए सरकार की ओर से विशेष गाइडलाइन भी जारी की गई है। जिसके अनुसार कुल राशि से करीब 12.97 करोड़ रुपये सामान्य घटक और 8.69 करोड़ रुपये की राशि एसईएसपी कम्पोनेंट के तहत खर्च होने हैं। राशि सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जनसंख्या के आधार पर बांटी गई है। बैठक में इंद्री नगर पालिका चेयरमैन शिवानी गोयल भी उपस्थित रहीं। ब्यूरो
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हर परियोजना की ई-ट्रैकिंग से भेजनी होगी रिपोर्ट
डी-प्लान के तहत होने वाले कार्यों के पूरा होने पर उसकी ई-ट्रैकिंग से रिपोर्ट भी भेजनी होगी। जिसमें प्रोजेक्ट की फोटो भी अपलोड होगी। बैठक में डीसी ने अधिकारियों से कहा कि जिस भी काम के लिए पैसा दिया जाएगा, खर्च करने से पहले उस कार्य की विस्तार से जानकारी लें कि जो पैसा कार्य के लिए अलॉट किया गया है क्या उसमें कार्य पूरा हो जाएगा। ऐसे किसी भी कार्य को प्रोजेक्ट में शामिल न करें, जो तय बजट में पूरा न हो।
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हल्फिया में बताना होगा, पैसा विवादित जगह पर नहीं खर्चा
इस बार सभी बीडीपीओ और पालिका सचिवों को कार्यों पर खर्च की गई राशि और काम पूरे हो जाने का प्रमाण पत्र हल्फिया के साथ देना होगा। जिसमें यह भी वर्णन करना होगा कि सभी कार्य गैर विवादित या कब्जा मुक्त जमीन पर ही करवाए गए हैं। एडीसी योगेश कुमार ने कहा कि अधिकारी संबंधित विधायक व जन प्रतिनिधियों से विचार विमर्श करके ही विकास कार्यों की रिपोर्ट बनाएं।