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ड्रेनें घास से और नाले और सीवरेज पालीथिन से अटे पड़े, बाढ़ से कैसे बचेगा शहर
Updated Thu, 12 Jul 2018 01:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मानसून प्रदेश में दस्तक दे चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दो दिनों में वह सक्रिय होगा और करनाल समेत प्रदेश में तेज बारिश होगी। ऐसे में शहर को बाढ़ से बचाव को लेकर तैयारियां अधूरी दिख रही हैं। ड्रेनें घास से अटी पड़ी हैं, जबकि शहर में सीवरेज और नाले ब्लॉक हैं। हालांकि, नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग और सिंचाई विभाग दावे करते नहीं धक रहे कि बाढ़ से बचाव को तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। इतना ही नहीं इस पूरे अभियान पर करीब 80 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किये जा रहे हैं। अभी तक आधे से ज्यादा नालों और ड्रेनों की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में अगर बारिश आई तो शहर की तस्वीर अलग होगी? शहर की मुख्य कालोनियों व सेक्टरों की बात करें तो इस बार सिटी में बिछे नालों और हुडा विभाग सीवरेज की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसी प्रकार, जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से भी करीब सात लाख रुपये सीवरेज व नालों की सफाई को लेकर खर्च किए गए हैं। नगर निगम ने इस बार नालों की सफाई का कोई टेंडर नहीं छोड़ा है, बल्कि अपने ही सफाई कर्मचारियों से नालों की सफाई कराई जा रही है। इसके अलावा, सिंचाई विभाग की बात करें तो इसके पास छोटी बड़ी 120 के करीब ड्रेन हैं। इन पर करीब 60 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए जाने हैं।
पिछले माह आई दो बारिशों ने प्रशासन की तैयारियां से शहर वासियों को रूबरू करा दिया था। हालांकि, इसके बाद से खुद डीसी डॉ. आदित्य दहिया कई बार बाढ़ से बचाव की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठक ले चुके हैं और कड़े निर्देश भी दे चुके हैं, बावजूद इसके डीसी के आदेशों का असर सिटी में कम दिखता है। नालों में पालीथिन फंसी है, इसके अलावा, जो नाले ऊपर से कवर हैं, उनके नीचे से सफाई ही नहीं हुई है। ऐसे में नाले एक तरह से ब्लाक हैं, इसी प्रकार की स्थिति सीवरेज की है। अगर आगामी कुछ दिनों में तेज बारिश आई तो यह है कि शहर की सड़कें जलमग्न हों और तालाब का रूप लें, साथ ही कई कालोनियों में पानी भरने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को शहर का मुआयना किया तो प्रशासन की तैयारियां अधूरी दिखी। हांसी चौक, रामनगर, शिव कालोनी, प्रेम कालोनी, माडल टाउन समेत अन्य नालों में पालीथिन फंसे मिले और पूरी तरह से सफाई नहीं मिली।
सड़क से ऊंचे उठे हैं सीवरेज के मैनहोल, पानी जमा होने पर होते हैं हादसे
शहर की कॉलोनियों व सेक्टरों में सीवरेज के मैनहोल सड़क उसे ऊंचे उठे हुए हैं। बरसात आने पर वहां पानी जमा हो जाता है। पानी भरने के कारण अक्सर वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं। इतना ही नहीं शहर में विभिन्न जगहों पर सड़कों के किनारे भी मेन हॉल खुले हुए हैं। चलते समय गलती से इसमें कोई भी गिर सकता है।
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गंदगी से अटा पड़ा है मुगल कैनाल
शहर के बीचों बीच से मुगल कैनाल गंदा नाला गुजरा हुआ है। यह भी गंदगी से अटा हुआ है। पॉलिथीन व अन्य गंदगी के कारण बदबू का ऐसा आलम है कि पुरानी सब्जी मंडी के समीप से लोगों को गुजरने के लिए रुमाल को नाक पर रखकर निकलना पड़ता है। इस नाले में ही शहर के सीवरेज का सारा पानी इसमें आता है और बरसात के समय यह भी पानी से भर जाता है।
सीवरेज ब्लॉक, सड़कों पर जमा होता है पानी
शहर की कॉलोनियों व सेक्टरों में जहां सीवरेज की लाइन बिछी हुई है। वहां पर सड़कों पर एक रोड गली जाल लगाया हुआ है, ताकि सड़कों व गलियों का पानी उस जाल के माध्यम से सीवरेज के अंदर चला जाए, लेकिन ये रोड गली ब्लॉक हैं, इनमें गंदगी अटकी हुई है तो कहीं ईंट व मिट्टी पड़ी हुई है। इस कारण बारिश का पानी रोड गली से सीवरेज में नहीं जाता और सड़क पर ही जमा हो जाता है। इसी कारण फिर सड़क से बजरी उखड़ने लगती है।
जिले में हैं छह रिंग बांध व 120 ड्रेन
बाढ़ से बचाव को लेकर जिले में 6 रिंग बांध हैं। यह राहड़ा, बंदराला, बाहरी, अरडाना, गंगाटेहड़ी व कमालपुर गडरियां हैं। बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में रेत से भरे बैग सिंचाई विभाग के मेरठ रोड़ स्थित स्टोर में उपलब्ध किए गए हैं। बाढ़/बारिश के पानी को निकालने के लिए खेड़ी मानसिंह में एक स्थायी पंप हाउस है। दो स्थायी पंप हाउस बल्ला व सुल्तानपुर में भी बनाए गए हैं। जिले में 41 डीजल पंप व 40 विद्युत चालित पंप भी हैं। मानसून से पहले इनकी मरम्मत सुनिश्चित की जाती है। वहीं, ड्रेनों की बात करें तो 44 ऐसी ड्रेन हैं, जो करीब 304 किलोमीटर एरिया में फैली हुई हैं और ये करनाल, इंद्री, असंध, निसिंग को कवर करती हैं। इनमें हांसी ड्रेन, नई नाला ड्रेन, बांसा ड्रेन, गोल्ली, पबाना ड्रेन, आसन ड्रेन, असंध सब ड्रेन, निसिंग व बड़ौता आदि ड्रेन शामिल हैं। इनके अलावा भी गांवों से गुजरने वाली छोटी ड्रेन भी हैं।
ढाई महीने में सात लाख से कराई सफाई : तनेजा
इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग एसडीओ अशोक तनेजा ने बताया कि पिछले ढाई महीने से वह सीवरेज की सफाई करा रहे हैं। इस पर अभी तक सात लाख के करीब खर्च आ चुका है। अब दूसरी बार मजदूरों पर सीवरेज की सफाई करा रहे हैं। बारिश से पहले पूरी तरह से व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। अगर कहीं, पर ब्लॉकेज होगी तो उसे चेक कराकर ठीक कराया जाएगा।
इस बार नहीं दिया टेंडर, निगम कर्मी ही कर रहे सफाई : चोपड़ा
नगर निगम सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा ने बताया कि पिछले वर्ष टेंडर देकर गंदे नालों की सफाई कराई गई थी। इस बार 70 से 80 सफाई कर्मचारियों की ही चार टीमें बनाकर शहर के गंदे नालों की सफाई कराई गई है। अब दूसरी बार सफाई कराई जा रही है। लगभग सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है, अगर कहीं पर दिक्कत है तो उसे भी दुरुस्त कर लिया जाएगा।
ड्रेनों की सफाई अंतिम चरण में है कार्य : संजीव कुमार
इस बारे में सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि ड्रेनों की सफाई कार्य अंतिम चरण में है, जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। कार्य तेजी से किया जा रहा है। वहीं, कार्यकारी अभियंता मुनीष शर्मा ने बताया कि घरौंडा व इंद्री क्षेत्र की सभी ड्रेनों की सफाई करा दी गई है. बाढ़ को लेकर पूरी तरह से तैयारी है। इसके अलावा, यमुना में भी स्टड आदि लगा लिए गए हैं।
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करनाल। मानसून प्रदेश में दस्तक दे चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दो दिनों में वह सक्रिय होगा और करनाल समेत प्रदेश में तेज बारिश होगी। ऐसे में शहर को बाढ़ से बचाव को लेकर तैयारियां अधूरी दिख रही हैं। ड्रेनें घास से अटी पड़ी हैं, जबकि शहर में सीवरेज और नाले ब्लॉक हैं। हालांकि, नगर निगम, जनस्वास्थ्य विभाग और सिंचाई विभाग दावे करते नहीं धक रहे कि बाढ़ से बचाव को तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। इतना ही नहीं इस पूरे अभियान पर करीब 80 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किये जा रहे हैं। अभी तक आधे से ज्यादा नालों और ड्रेनों की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में अगर बारिश आई तो शहर की तस्वीर अलग होगी? शहर की मुख्य कालोनियों व सेक्टरों की बात करें तो इस बार सिटी में बिछे नालों और हुडा विभाग सीवरेज की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसी प्रकार, जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से भी करीब सात लाख रुपये सीवरेज व नालों की सफाई को लेकर खर्च किए गए हैं। नगर निगम ने इस बार नालों की सफाई का कोई टेंडर नहीं छोड़ा है, बल्कि अपने ही सफाई कर्मचारियों से नालों की सफाई कराई जा रही है। इसके अलावा, सिंचाई विभाग की बात करें तो इसके पास छोटी बड़ी 120 के करीब ड्रेन हैं। इन पर करीब 60 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए जाने हैं।
पिछले माह आई दो बारिशों ने प्रशासन की तैयारियां से शहर वासियों को रूबरू करा दिया था। हालांकि, इसके बाद से खुद डीसी डॉ. आदित्य दहिया कई बार बाढ़ से बचाव की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की बैठक ले चुके हैं और कड़े निर्देश भी दे चुके हैं, बावजूद इसके डीसी के आदेशों का असर सिटी में कम दिखता है। नालों में पालीथिन फंसी है, इसके अलावा, जो नाले ऊपर से कवर हैं, उनके नीचे से सफाई ही नहीं हुई है। ऐसे में नाले एक तरह से ब्लाक हैं, इसी प्रकार की स्थिति सीवरेज की है। अगर आगामी कुछ दिनों में तेज बारिश आई तो यह है कि शहर की सड़कें जलमग्न हों और तालाब का रूप लें, साथ ही कई कालोनियों में पानी भरने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को शहर का मुआयना किया तो प्रशासन की तैयारियां अधूरी दिखी। हांसी चौक, रामनगर, शिव कालोनी, प्रेम कालोनी, माडल टाउन समेत अन्य नालों में पालीथिन फंसे मिले और पूरी तरह से सफाई नहीं मिली।
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सड़क से ऊंचे उठे हैं सीवरेज के मैनहोल, पानी जमा होने पर होते हैं हादसे
शहर की कॉलोनियों व सेक्टरों में सीवरेज के मैनहोल सड़क उसे ऊंचे उठे हुए हैं। बरसात आने पर वहां पानी जमा हो जाता है। पानी भरने के कारण अक्सर वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं। इतना ही नहीं शहर में विभिन्न जगहों पर सड़कों के किनारे भी मेन हॉल खुले हुए हैं। चलते समय गलती से इसमें कोई भी गिर सकता है।
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गंदगी से अटा पड़ा है मुगल कैनाल
शहर के बीचों बीच से मुगल कैनाल गंदा नाला गुजरा हुआ है। यह भी गंदगी से अटा हुआ है। पॉलिथीन व अन्य गंदगी के कारण बदबू का ऐसा आलम है कि पुरानी सब्जी मंडी के समीप से लोगों को गुजरने के लिए रुमाल को नाक पर रखकर निकलना पड़ता है। इस नाले में ही शहर के सीवरेज का सारा पानी इसमें आता है और बरसात के समय यह भी पानी से भर जाता है।
सीवरेज ब्लॉक, सड़कों पर जमा होता है पानी
शहर की कॉलोनियों व सेक्टरों में जहां सीवरेज की लाइन बिछी हुई है। वहां पर सड़कों पर एक रोड गली जाल लगाया हुआ है, ताकि सड़कों व गलियों का पानी उस जाल के माध्यम से सीवरेज के अंदर चला जाए, लेकिन ये रोड गली ब्लॉक हैं, इनमें गंदगी अटकी हुई है तो कहीं ईंट व मिट्टी पड़ी हुई है। इस कारण बारिश का पानी रोड गली से सीवरेज में नहीं जाता और सड़क पर ही जमा हो जाता है। इसी कारण फिर सड़क से बजरी उखड़ने लगती है।
जिले में हैं छह रिंग बांध व 120 ड्रेन
बाढ़ से बचाव को लेकर जिले में 6 रिंग बांध हैं। यह राहड़ा, बंदराला, बाहरी, अरडाना, गंगाटेहड़ी व कमालपुर गडरियां हैं। बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में रेत से भरे बैग सिंचाई विभाग के मेरठ रोड़ स्थित स्टोर में उपलब्ध किए गए हैं। बाढ़/बारिश के पानी को निकालने के लिए खेड़ी मानसिंह में एक स्थायी पंप हाउस है। दो स्थायी पंप हाउस बल्ला व सुल्तानपुर में भी बनाए गए हैं। जिले में 41 डीजल पंप व 40 विद्युत चालित पंप भी हैं। मानसून से पहले इनकी मरम्मत सुनिश्चित की जाती है। वहीं, ड्रेनों की बात करें तो 44 ऐसी ड्रेन हैं, जो करीब 304 किलोमीटर एरिया में फैली हुई हैं और ये करनाल, इंद्री, असंध, निसिंग को कवर करती हैं। इनमें हांसी ड्रेन, नई नाला ड्रेन, बांसा ड्रेन, गोल्ली, पबाना ड्रेन, आसन ड्रेन, असंध सब ड्रेन, निसिंग व बड़ौता आदि ड्रेन शामिल हैं। इनके अलावा भी गांवों से गुजरने वाली छोटी ड्रेन भी हैं।
ढाई महीने में सात लाख से कराई सफाई : तनेजा
इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग एसडीओ अशोक तनेजा ने बताया कि पिछले ढाई महीने से वह सीवरेज की सफाई करा रहे हैं। इस पर अभी तक सात लाख के करीब खर्च आ चुका है। अब दूसरी बार मजदूरों पर सीवरेज की सफाई करा रहे हैं। बारिश से पहले पूरी तरह से व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। अगर कहीं, पर ब्लॉकेज होगी तो उसे चेक कराकर ठीक कराया जाएगा।
इस बार नहीं दिया टेंडर, निगम कर्मी ही कर रहे सफाई : चोपड़ा
नगर निगम सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा ने बताया कि पिछले वर्ष टेंडर देकर गंदे नालों की सफाई कराई गई थी। इस बार 70 से 80 सफाई कर्मचारियों की ही चार टीमें बनाकर शहर के गंदे नालों की सफाई कराई गई है। अब दूसरी बार सफाई कराई जा रही है। लगभग सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है, अगर कहीं पर दिक्कत है तो उसे भी दुरुस्त कर लिया जाएगा।
ड्रेनों की सफाई अंतिम चरण में है कार्य : संजीव कुमार
इस बारे में सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि ड्रेनों की सफाई कार्य अंतिम चरण में है, जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। कार्य तेजी से किया जा रहा है। वहीं, कार्यकारी अभियंता मुनीष शर्मा ने बताया कि घरौंडा व इंद्री क्षेत्र की सभी ड्रेनों की सफाई करा दी गई है. बाढ़ को लेकर पूरी तरह से तैयारी है। इसके अलावा, यमुना में भी स्टड आदि लगा लिए गए हैं।