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सड़कों पर जो बिनते थे कचरा, आज वही बच्चे बोलते है फर्राटदार अंग्रेजी
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:45 PM IST
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कभी बीनते थे कचरा, आज बोलते हैं ये फर्राटेदार अंग्रेजी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
कहते हैं कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जरूरत है तो बस उसे तराशने की। सही प्लेटफॉर्म और मार्गदर्शन मिले तो झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चे भी कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों की तरह फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकते हैं, अंग्रेजी में स्पीच दे सकते हैं। इसी का ही एक उदाहरण है शहर की स्लम बस्ती में रहने वाले ये 174 बच्चे। जो कभी चार साल पहले सड़कों पर कचरा बीनते थे, वही बच्चे आज फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे हैं। यहीं नहीं ये विद्यार्थी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया चुके हैं।
जी, हां हम बात कर रहे हैं शहर स्थित नूर महल के पास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की, जिन्हें चार साल से निफा संस्था द्वारा केयर कक्षाएं लगाकर उनकी बस्ती में ही पढ़ाया जा रहा है। इससे पहले ये बच्चे सड़कों पर लगते कचरे के ढेर से कचरा बीनते थे।
आज ये बच्चे एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ रहे बच्चे की तरह अंग्रेजी बोलते हैं और लिखते भी हैं। छोटे-छोटे कार्यक्रम में बच्चे अंग्रेजी में स्पीच भी देते हैं। पिछले चार सालों से इन बच्चों को निफा की ओर से चंदन रजक और रेणू नामक दो टीचर पढ़ा रहे हैं। शहर में ये नर्सी विलेज और निर्मल बाग में इन बच्चों को पढ़ाते हैं।
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हर महीने होता है टेस्ट
स्कूल की तरह हर सप्ताह, महीने, छह महीने में टेस्ट लिया जाता है और इन बच्चों की वार्षिक परीक्षा भी होती है। इसके बाद इन बच्चों को अगली कक्षा में भेज दिया जाता है। फिलहाल ये दोनों टीचर नर्सरी से छठी कक्षा तक 174 बच्चों को पढ़ाते हैं। इन बच्चों का रजिस्ट्रेशन दून वैली स्कूल से है। इसी स्कूल के अंतर्गत ही इन बच्चों की परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं।
जानिए केयर कक्षाओं में कितने बच्चे लेते हैं शिक्षा
कक्षा बच्चों की संख्या
नर्सरी- 30
एलकेजी - 20
यूकेजी - 18
पहली - 28
दूसरी - 30
तीसरी - 25
चौथी - 20
पांचवी - 01
छठी - 02
2013 में की थी स्लम बस्ती में कक्षाएं शुरू
संस्था ने 2013 में शहर की स्लम बस्ती में जाकर लोगों को जागरूक किया और बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा। इसके बाद उनके अभिभावक उन बच्चों को पढ़ाने के लिए राजी हो गए। तब जाकर बस्ती में केयर कक्षाएं शुरू की गई। उस दौरान कक्षा में 400 के करीब बच्चे थे, लेकिन शहर में बिल्डिंग बनने के बाद आधी बस्ती के लोग वहां से कहीं दूसरी जगह चले गए। जिस कारण अब 174 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाया जा रहा है।
बच्चों के नाम एफडी ताकि भविष्य की चिंता न हो
निफा संस्था सदस्य और बच्चों के टीचर चंदन रजक ने बताया कि तीन साल पहले होली मिलन समारोह के दौरान सीएम मनोहर लाल इन बच्चों से मिले थे। इस दौरान सीएम ने बच्चों को पांच लाख रुपये देने की घोषणा की थी। जो सभी बच्चों में बांटी गए हैं, क्योंकि जिले में कई जगहों पर संस्था द्वारा इस तरह की कक्षाएं चलाई जा रही है। उन सभी कक्षा के बच्चों के अनुसार सभी बच्चों के नाम तीन-तीन हजार की एफडी कराई गई है, ताकि भविष्य में बच्चों को उन रुपयों से मदद मिलेगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मनवा चुके प्रतिभा का लोहा
टीचर चंदन रजक ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ ये बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी कई जगहों पर अव्वल स्थान प्राप्त कर चुके हैं। इन बच्चों ने कुरुक्षेत्र और गुजरात में आयोजित कई कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी है। इसके साथ ही शहर में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भी ये बच्चे बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। इस बारे में निफा अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू और दून स्कूल के एमडी कुलजिंद्र सिंह मोहन बाठ का कहना है कि झोंपड़ी के बच्चों को पढ़ाने से उन्हें काफी सूूकुन मिलता है, हमारा प्रयास है कि ये बच्चे भी समाज का हिस्सा बनें और बढ़े होकर पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बनें।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
कहते हैं कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जरूरत है तो बस उसे तराशने की। सही प्लेटफॉर्म और मार्गदर्शन मिले तो झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चे भी कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों की तरह फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकते हैं, अंग्रेजी में स्पीच दे सकते हैं। इसी का ही एक उदाहरण है शहर की स्लम बस्ती में रहने वाले ये 174 बच्चे। जो कभी चार साल पहले सड़कों पर कचरा बीनते थे, वही बच्चे आज फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे हैं। यहीं नहीं ये विद्यार्थी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया चुके हैं।
जी, हां हम बात कर रहे हैं शहर स्थित नूर महल के पास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की, जिन्हें चार साल से निफा संस्था द्वारा केयर कक्षाएं लगाकर उनकी बस्ती में ही पढ़ाया जा रहा है। इससे पहले ये बच्चे सड़कों पर लगते कचरे के ढेर से कचरा बीनते थे।
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आज ये बच्चे एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ रहे बच्चे की तरह अंग्रेजी बोलते हैं और लिखते भी हैं। छोटे-छोटे कार्यक्रम में बच्चे अंग्रेजी में स्पीच भी देते हैं। पिछले चार सालों से इन बच्चों को निफा की ओर से चंदन रजक और रेणू नामक दो टीचर पढ़ा रहे हैं। शहर में ये नर्सी विलेज और निर्मल बाग में इन बच्चों को पढ़ाते हैं।
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हर महीने होता है टेस्ट
स्कूल की तरह हर सप्ताह, महीने, छह महीने में टेस्ट लिया जाता है और इन बच्चों की वार्षिक परीक्षा भी होती है। इसके बाद इन बच्चों को अगली कक्षा में भेज दिया जाता है। फिलहाल ये दोनों टीचर नर्सरी से छठी कक्षा तक 174 बच्चों को पढ़ाते हैं। इन बच्चों का रजिस्ट्रेशन दून वैली स्कूल से है। इसी स्कूल के अंतर्गत ही इन बच्चों की परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं।
जानिए केयर कक्षाओं में कितने बच्चे लेते हैं शिक्षा
कक्षा बच्चों की संख्या
नर्सरी- 30
एलकेजी - 20
यूकेजी - 18
पहली - 28
दूसरी - 30
तीसरी - 25
चौथी - 20
पांचवी - 01
छठी - 02
2013 में की थी स्लम बस्ती में कक्षाएं शुरू
संस्था ने 2013 में शहर की स्लम बस्ती में जाकर लोगों को जागरूक किया और बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा। इसके बाद उनके अभिभावक उन बच्चों को पढ़ाने के लिए राजी हो गए। तब जाकर बस्ती में केयर कक्षाएं शुरू की गई। उस दौरान कक्षा में 400 के करीब बच्चे थे, लेकिन शहर में बिल्डिंग बनने के बाद आधी बस्ती के लोग वहां से कहीं दूसरी जगह चले गए। जिस कारण अब 174 बच्चे हैं, जिन्हें पढ़ाया जा रहा है।
बच्चों के नाम एफडी ताकि भविष्य की चिंता न हो
निफा संस्था सदस्य और बच्चों के टीचर चंदन रजक ने बताया कि तीन साल पहले होली मिलन समारोह के दौरान सीएम मनोहर लाल इन बच्चों से मिले थे। इस दौरान सीएम ने बच्चों को पांच लाख रुपये देने की घोषणा की थी। जो सभी बच्चों में बांटी गए हैं, क्योंकि जिले में कई जगहों पर संस्था द्वारा इस तरह की कक्षाएं चलाई जा रही है। उन सभी कक्षा के बच्चों के अनुसार सभी बच्चों के नाम तीन-तीन हजार की एफडी कराई गई है, ताकि भविष्य में बच्चों को उन रुपयों से मदद मिलेगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मनवा चुके प्रतिभा का लोहा
टीचर चंदन रजक ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ ये बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी कई जगहों पर अव्वल स्थान प्राप्त कर चुके हैं। इन बच्चों ने कुरुक्षेत्र और गुजरात में आयोजित कई कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी है। इसके साथ ही शहर में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भी ये बच्चे बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। इस बारे में निफा अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू और दून स्कूल के एमडी कुलजिंद्र सिंह मोहन बाठ का कहना है कि झोंपड़ी के बच्चों को पढ़ाने से उन्हें काफी सूूकुन मिलता है, हमारा प्रयास है कि ये बच्चे भी समाज का हिस्सा बनें और बढ़े होकर पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बनें।