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कवि सम्मेलन में रचनाओं के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर बोला हमला
Updated Tue, 02 Jan 2018 12:45 AM IST
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सृजन गंगा में सामाजिक बुराइयों पर किया कटाक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय घरौंडा में हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से सृजन गंगा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नवोदित एवं वरिष्ठ रचनाकारों ने रचनाओं के जरिए सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष किया। साथ ही अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति का भी महिमा मंडन किया। कार्यक्रम में हरियाणा साहित्य अकादमी परिषद के सदस्य डॉ. उमेश प्रताप वत्स ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. उमेश प्रताप वत्स, कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार आत्रेय, विशिष्ट अतिथि प्रख्यात लघु कथाकार एवं आलोचक डॉ. अशोक भाटिया ने की। नवोदित कवि साहिल, जितेंद्र सिंह, रजत सैन, कमल, मदन लाल, टिशा वर्मा, मनु वत्स एवं वरिष्ठ कवियों में डॉ. मुकेश अग्रवाल और शिव कुमार आर्य ने कविताओं का पाठ किया। राजबीर वर्मा ने हरियाणवी रचनाओं के गायन से समां बांधा। युवा कवि अनिल सिंघानिया ने गजलों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों एवं बाल यौन शोषण जैसी घटनाओं पर कटाक्ष किया। डॉ. उमेश वत्स ने पश्चिमी संस्कृति और भारतीय संस्कृति की तुलना करते हुए कविता पेश की। इसके बाद सोनीपत से आए डॉ. वैरागी ने, दुलीचंद रमन, सतविंद्र कुमार राणा, डॉ. राधेश्याम भारतीय ने भी लघु कथाएं सुनाई। इसके अतिरिक्त अनेक लोगों ने भी प्रस्तुति दी। डॉ. अशोक भाटिया ने सभी श्रोताओं एवं उपस्थित साहित्यकारों को अच्छे साहित्य पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। वहीं डॉ. रामकुमार आत्रेय ने कहा कि लेखन कर्म में अध्ययन, अनुभव और अभ्यास का होना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, मुख्य अतिथि ने घरौंडा शहर में पहली बार हुए इस प्रकार के कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा कि कोरी कल्पना के आधार पर कोई प्रेमचंद जैसा नहीं बन सकता, उसके लिए उसके व्यक्तिगत अनुभव आवश्यक हैं। इस मौके पर ऋषिपाल, विक्रम, अजय, नितिन, समेत अनेक युवा श्रोता भी मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय घरौंडा में हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से सृजन गंगा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नवोदित एवं वरिष्ठ रचनाकारों ने रचनाओं के जरिए सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष किया। साथ ही अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति का भी महिमा मंडन किया। कार्यक्रम में हरियाणा साहित्य अकादमी परिषद के सदस्य डॉ. उमेश प्रताप वत्स ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. उमेश प्रताप वत्स, कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार आत्रेय, विशिष्ट अतिथि प्रख्यात लघु कथाकार एवं आलोचक डॉ. अशोक भाटिया ने की। नवोदित कवि साहिल, जितेंद्र सिंह, रजत सैन, कमल, मदन लाल, टिशा वर्मा, मनु वत्स एवं वरिष्ठ कवियों में डॉ. मुकेश अग्रवाल और शिव कुमार आर्य ने कविताओं का पाठ किया। राजबीर वर्मा ने हरियाणवी रचनाओं के गायन से समां बांधा। युवा कवि अनिल सिंघानिया ने गजलों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों एवं बाल यौन शोषण जैसी घटनाओं पर कटाक्ष किया। डॉ. उमेश वत्स ने पश्चिमी संस्कृति और भारतीय संस्कृति की तुलना करते हुए कविता पेश की। इसके बाद सोनीपत से आए डॉ. वैरागी ने, दुलीचंद रमन, सतविंद्र कुमार राणा, डॉ. राधेश्याम भारतीय ने भी लघु कथाएं सुनाई। इसके अतिरिक्त अनेक लोगों ने भी प्रस्तुति दी। डॉ. अशोक भाटिया ने सभी श्रोताओं एवं उपस्थित साहित्यकारों को अच्छे साहित्य पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। वहीं डॉ. रामकुमार आत्रेय ने कहा कि लेखन कर्म में अध्ययन, अनुभव और अभ्यास का होना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, मुख्य अतिथि ने घरौंडा शहर में पहली बार हुए इस प्रकार के कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा कि कोरी कल्पना के आधार पर कोई प्रेमचंद जैसा नहीं बन सकता, उसके लिए उसके व्यक्तिगत अनुभव आवश्यक हैं। इस मौके पर ऋषिपाल, विक्रम, अजय, नितिन, समेत अनेक युवा श्रोता भी मौजूद रहे।