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केस दर्ज करते ही असंध पुलिस ने दी विधायक को क्लीनचिट, चार दिन बीते 200 में से एक भी गिरफ्तारी नहीं
Updated Sun, 20 Aug 2017 11:15 PM IST
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केस दर्ज करते ही असंध पुलिस ने दी विधायक को क्लीनचिट, चार दिन बीते 200 में से एक भी गिरफ्तारी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल ( असंध)। ये असंध पुलिस है। सब कुछ अपनी मनमर्जी से करती है। पीड़ित कुछ कहता है और पुलिस कुछ करती है। इतना ही नहीं जांच में इतनी तेजी तो सीबीआई के पास भी नहीं है। एक दिन पहले ही असंध के विधायक बक्शीश पर केस दर्ज किया और दूसरे ही दिन पुलिस ने इतनी फुर्ती दिखाई कि तुरंत प्रभाव से विधायक को क्लीन चिट भी थमा दी। हालांकि, हमला करने के करीब 200 आरोपियों में से पुलिस चार दिन बाद भी एक को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
बता दें कि असंध में हुए उपद्रव में असंध पुलिस ने तीन अलग अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें रजत राणा की शिकायत पर विधायक समेत 200, व्यापारी रमेश मेहता की शिकायत पर 150 व पत्रकार गुलशन मोंगिया की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। अहम बात यह है कि वारदात हुए चार दिन बीत गए हैं, बावजूद इसके अभी तक एक भी आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पूरे मामले को देख रहे असंध के डीएसपी दलबीर सिंह ने बताया कि अभी हम शांति बहाली व व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं, गिरफ्तारी को लेकर भी कोशिश जारी हैं। विधायक को क्लीन चिट देने के बारे में डीएसपी ने कहा कि अभी जांच चल रही है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
ये हैं पेंच
पीड़ित रजत राणा, जसबीर व मनोज ने बताया कि उन्होंने जो पुलिस को शिकायत दे रखी है, उसमें आरोप है कि विधायक ने षड़यंत्र के तहत उनको पिटवाया है और दफ्तर पर तोड़फोड़ कराई है। लेकिन पुलिस ने केस को कमजोर करने के लिए 200 युवकों के साथ विधायक को भी तोड़फोड़ और हमले में शामिल दिखाया गया है। दरअसल पुलिस ने अपनी मनमर्जी से एफआईआर दर्ज की। पीड़ित का आरोप है कि इसी के चलते पुलिस अब विधायक को क्लीन चिट दे रही है, जबकि विधायक के खिलाफ 120बी के तहत केस दर्ज होना चाहिए।
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आखिर कहां थी पुलिस
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुरुद्वारा में बैठक होती है, सैकड़ों की संख्या में लोग लाठी डंडों से बाजारों में उत्पात मचाते हैं, लेकिन पुलिस कहीं भी नहीं दिखी। पुुलिस ने एक तरह से युवकों को खुला छोड़ दिया। युवकों ने भी इसका भरपूर फायदा उठाया, जिसको मन किया उसी को पीटा, जमकर पीटा। हथियार हिलाते हुए बाद में फरार हो गए। करीब तीन घंटे तक शहर में दहशत का नंगा नाच हुआ, ले किन पुलिस कहीं नहीं दिखी। डीएसपी दलबीर सिंह वैसे दम भरते हैं, लेकिन पुलिस कहां थी, इसका उनके पास भी कोई जवाब नहीं है।
एसएचओ नहीं पहुंचते तो मेरी हत्या तय थी
पीड़ित रजत राणा ने कहा कि युवकों ने नियत उसे मारने की थी, अगर ऐन मौके पर थाना प्रभारी संजीव गोर नहीं आते तो उसकी हत्या तय थी। युवक लाठी व गंडासियों से उस पर हमला बोल रहे थे। शोर मचाने पर कई दुकानदारों ने उसे छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने दुकानदारों को भी जमकर पीटा। इसी दौरान थाना प्रभारी ने युवकों को खदेड़ा, तब जाकर कहीं उसकी जान बची। पीड़ित का कहना है कि उसे न्याय चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल ( असंध)। ये असंध पुलिस है। सब कुछ अपनी मनमर्जी से करती है। पीड़ित कुछ कहता है और पुलिस कुछ करती है। इतना ही नहीं जांच में इतनी तेजी तो सीबीआई के पास भी नहीं है। एक दिन पहले ही असंध के विधायक बक्शीश पर केस दर्ज किया और दूसरे ही दिन पुलिस ने इतनी फुर्ती दिखाई कि तुरंत प्रभाव से विधायक को क्लीन चिट भी थमा दी। हालांकि, हमला करने के करीब 200 आरोपियों में से पुलिस चार दिन बाद भी एक को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
बता दें कि असंध में हुए उपद्रव में असंध पुलिस ने तीन अलग अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें रजत राणा की शिकायत पर विधायक समेत 200, व्यापारी रमेश मेहता की शिकायत पर 150 व पत्रकार गुलशन मोंगिया की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। अहम बात यह है कि वारदात हुए चार दिन बीत गए हैं, बावजूद इसके अभी तक एक भी आरोपी को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पूरे मामले को देख रहे असंध के डीएसपी दलबीर सिंह ने बताया कि अभी हम शांति बहाली व व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं, गिरफ्तारी को लेकर भी कोशिश जारी हैं। विधायक को क्लीन चिट देने के बारे में डीएसपी ने कहा कि अभी जांच चल रही है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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ये हैं पेंच
पीड़ित रजत राणा, जसबीर व मनोज ने बताया कि उन्होंने जो पुलिस को शिकायत दे रखी है, उसमें आरोप है कि विधायक ने षड़यंत्र के तहत उनको पिटवाया है और दफ्तर पर तोड़फोड़ कराई है। लेकिन पुलिस ने केस को कमजोर करने के लिए 200 युवकों के साथ विधायक को भी तोड़फोड़ और हमले में शामिल दिखाया गया है। दरअसल पुलिस ने अपनी मनमर्जी से एफआईआर दर्ज की। पीड़ित का आरोप है कि इसी के चलते पुलिस अब विधायक को क्लीन चिट दे रही है, जबकि विधायक के खिलाफ 120बी के तहत केस दर्ज होना चाहिए।
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आखिर कहां थी पुलिस
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुरुद्वारा में बैठक होती है, सैकड़ों की संख्या में लोग लाठी डंडों से बाजारों में उत्पात मचाते हैं, लेकिन पुलिस कहीं भी नहीं दिखी। पुुलिस ने एक तरह से युवकों को खुला छोड़ दिया। युवकों ने भी इसका भरपूर फायदा उठाया, जिसको मन किया उसी को पीटा, जमकर पीटा। हथियार हिलाते हुए बाद में फरार हो गए। करीब तीन घंटे तक शहर में दहशत का नंगा नाच हुआ, ले किन पुलिस कहीं नहीं दिखी। डीएसपी दलबीर सिंह वैसे दम भरते हैं, लेकिन पुलिस कहां थी, इसका उनके पास भी कोई जवाब नहीं है।
एसएचओ नहीं पहुंचते तो मेरी हत्या तय थी
पीड़ित रजत राणा ने कहा कि युवकों ने नियत उसे मारने की थी, अगर ऐन मौके पर थाना प्रभारी संजीव गोर नहीं आते तो उसकी हत्या तय थी। युवक लाठी व गंडासियों से उस पर हमला बोल रहे थे। शोर मचाने पर कई दुकानदारों ने उसे छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने दुकानदारों को भी जमकर पीटा। इसी दौरान थाना प्रभारी ने युवकों को खदेड़ा, तब जाकर कहीं उसकी जान बची। पीड़ित का कहना है कि उसे न्याय चाहिए।