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Karnal News: फर्जी बीमा पॉलिसी पर 20 लाख का दावा खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार शारदा ने 19 फरवरी, 2019 को इंद्री में हुए सड़क हादसे में घायल वादी सोनू की ओर से बीमा कंपनी पर किया 20 लाख रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से क्लेम की याचिका को खारिज कर दिया है। बीमा में लगी हुई बीमा पॉलिसी फर्जी पाई गई है।
मुकदमे के अनुसार गांव संगोही निवासी सोनू 19 फरवरी 2019 को शाम को 7 बजे गांव बैरसाल से इंद्री जा रहे थे। आरोप है कि बुढ़नपुर के पास पहुंचे तो उनके आगे चल रहे ट्रैक्टर चालक रणजीत वासी गोरगढ़ ने अपने ट्रैक्टर को उनकी मोटरसाइकिल की तरफ मोड़ दिया। जिस कारण वह गिर गए। उनके बाएं पैर और चेहरे पर चोटें आईं और कुछ समय बाद वह बेहोश हो गए।
इंद्री थाना पुलिस ने 27 फरवरी 2019 को आईपीसी की धारा 279, 337 और 338 के तहत केस दर्ज किया था। हादसे के समय सोनू की आयु 30 वर्ष थी। उन्होंने कपिल से 15 एकड़ ज़मीन ठेके पर ली हुई थी। इसके अलावा उनका डेयरी का काम था, जिस से उन्हें 50 हजार रुपये महीने की आमदनी थी। हादसे के बाद उन्हें इंद्री अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें करनाल रेफर कर दिया गया।
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बाद में इलाज एक निजी अस्पताल में चला। उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर होने के कारण ऑपरेशन किया गया। करीब पांच लाख रुपये इलाज पर खर्च हुए। चोटों के कारण, वह न तो बैठ सकते हैं और न ही ठीक से चल सकते हैं। बेरोजगार हो गए हैं। वादी ने ट्रैक्टर चालक रणजीत सिंह वासी गोरगढ़, जसबीर सिंह वासी गोरगढ़ ट्रैक्टर मालिक और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पर प्रतिवर्ष के हिसाब से 20 लाख रुपये का दावा किया था। अदालत में प्रतिवादी बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने बयान दिया कि जिस बीमा पॉलिसी से ट्रैक्टर बीमित था, वह नकली है। यह भी बताया गया कि कार्यालय कोड के साथ छेड़छाड़ की गई थी, पॉलिसी पर कार्यालय कोड मंडी डबवाली से शुरू होता है। जबकि संग्रह संख्या कार्यालय कोड कैथल का है। इसलिए दावेदार दुर्घटना में हुई चोटों के लिए किसी भी मुआवजे का हकदार नहीं है। इस पर न्यायाधीकरण ने इस याचिका को खर्च सहित खारिज कर दिया है।
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करनाल। मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार शारदा ने 19 फरवरी, 2019 को इंद्री में हुए सड़क हादसे में घायल वादी सोनू की ओर से बीमा कंपनी पर किया 20 लाख रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से क्लेम की याचिका को खारिज कर दिया है। बीमा में लगी हुई बीमा पॉलिसी फर्जी पाई गई है।
मुकदमे के अनुसार गांव संगोही निवासी सोनू 19 फरवरी 2019 को शाम को 7 बजे गांव बैरसाल से इंद्री जा रहे थे। आरोप है कि बुढ़नपुर के पास पहुंचे तो उनके आगे चल रहे ट्रैक्टर चालक रणजीत वासी गोरगढ़ ने अपने ट्रैक्टर को उनकी मोटरसाइकिल की तरफ मोड़ दिया। जिस कारण वह गिर गए। उनके बाएं पैर और चेहरे पर चोटें आईं और कुछ समय बाद वह बेहोश हो गए।
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इंद्री थाना पुलिस ने 27 फरवरी 2019 को आईपीसी की धारा 279, 337 और 338 के तहत केस दर्ज किया था। हादसे के समय सोनू की आयु 30 वर्ष थी। उन्होंने कपिल से 15 एकड़ ज़मीन ठेके पर ली हुई थी। इसके अलावा उनका डेयरी का काम था, जिस से उन्हें 50 हजार रुपये महीने की आमदनी थी। हादसे के बाद उन्हें इंद्री अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें करनाल रेफर कर दिया गया।
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बाद में इलाज एक निजी अस्पताल में चला। उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर होने के कारण ऑपरेशन किया गया। करीब पांच लाख रुपये इलाज पर खर्च हुए। चोटों के कारण, वह न तो बैठ सकते हैं और न ही ठीक से चल सकते हैं। बेरोजगार हो गए हैं। वादी ने ट्रैक्टर चालक रणजीत सिंह वासी गोरगढ़, जसबीर सिंह वासी गोरगढ़ ट्रैक्टर मालिक और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी पर प्रतिवर्ष के हिसाब से 20 लाख रुपये का दावा किया था। अदालत में प्रतिवादी बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने बयान दिया कि जिस बीमा पॉलिसी से ट्रैक्टर बीमित था, वह नकली है। यह भी बताया गया कि कार्यालय कोड के साथ छेड़छाड़ की गई थी, पॉलिसी पर कार्यालय कोड मंडी डबवाली से शुरू होता है। जबकि संग्रह संख्या कार्यालय कोड कैथल का है। इसलिए दावेदार दुर्घटना में हुई चोटों के लिए किसी भी मुआवजे का हकदार नहीं है। इस पर न्यायाधीकरण ने इस याचिका को खर्च सहित खारिज कर दिया है।