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एडीसी ने गांव उंचा समाना में कपड़े से बने थैले बांटकर दी पॉलीथीन इस्तेमाल न करने की सलाह
Updated Tue, 11 Sep 2018 12:41 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। एडीसी निशांत कुमार यादव ने सोमवार को गांव उंचा समाना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से कपड़े से बने थैले बांटकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को पॉलिथीन के इस्तेमाल न करने की सलाह दी। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि पॉलिथीन का जितना कम इस्तेमाल हो इतना ही पर्यावरण के लिए बेहतर रहेगा।
महात्मा गांधी द्वारा स्वच्छ भारत का जो सपना देखा गया था, वह आज स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रयासों से सफल होता नजर आ रहा है। इस दौरान गांव के सरकारी स्कूल से शुरुआत करके पूरे गांव में लगभग 4000 कपड़े के थैले वितरित किए गए। इस दौरान एडीसी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जल्द 3 लाख के करीब कपड़े के थैले तैयार करके जिला करनाल के गांवों में वितरित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस तरह समूह की महिलाएं 3 लाख थैले बनाकर लगभग 75 लाख रुपये की बिक्री करके 21 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकती है।
उन्होंने समूह की महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा कि यह समूह की महिलाओं के लिए एक तरह से सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। कार्यक्रम के दौरान एडीसी ने बच्चों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करते हुए कहा यदि आपको अपने आस-पास पॉलिथीन पड़ा हुआ मिलता है तो उसे एक जगह इकट्ठा कर ले, ताकि पॉलिथीन नालियों में न बहे। उन्होंने कहा कि जो बच्चा ज्याद से ज्यादा पॉलिथीन को इकट्ठा करके स्कूल में लाएगा, उस छात्र को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ग्राम पंचायत द्वारा समूह की महिलाओं को एडीसी के कर-कमलों से 1 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक जुबीन सालू, बीडीपीओ प्रेम सिंह, सरपंच निशांत राणा, प्रिंसिपल वंदना चावला, डीएफएम रामभगत, स्थानीय सिंडीकेट बैक की मैनेजर डीपीएम स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण राजकुमार संधू, ग्राम सचिव सुखेदव, एनआरएलएम की खंड कार्यक्रम प्रबंधक कविता, सतीश, सतबीर, पूर्णचंद सैनी, ब्रह्मजीत सिंह, समूह की महिलाएं, सभी पंच व भारी संख्या में स्कूली बच्चे भी उपस्थित रहे।
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पोषण माह के तहत दिलवाई स्कूली बच्चों व समूह की महिलाओं को शपथ
एडीसी ने कार्यक्रम के दौरान स्कूल के अध्यापकों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं तथा ग्रामीणों को पोषण माह के अंतर्गत शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन संतुलित आहार ही करना चाहिए। एडीसी ने पोषण माह को पॉलिथीन अभियान से जोड़ते हुए कहा कि हम घर में जो फल व सब्जियां लाते है, यदि वह पॉलिथीन की बजाय कपड़े के थैले में लेकर आएं तो उनके पोषक तत्व नष्ट नहीं होंगे। इसी तरह हम कई बार सब्जियां पॉलिथीन में डली हुई ही फ्रिज में रख देते है, जिस कारण से सब्जी के पोषक तत्व जल्दी नष्ट हो जाते है और वह खराब हो जाती है। इसलिए हमें पॉलिथीन इस्तेमाल अपने व्यवहार से निकालना होगा। इस दौरान स्कूल के अध्यापक सुरेन्द्र कुमार ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि सेल्फी विद डॉक्टर के प्रचलन की तरह यदि हम सेल्फी विद थैला या झोला की संकल्पना को प्रचलन में लाए तो इस अभियान से युवा वर्ग भी प्रभावित होगा।
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करनाल। एडीसी निशांत कुमार यादव ने सोमवार को गांव उंचा समाना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से कपड़े से बने थैले बांटकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को पॉलिथीन के इस्तेमाल न करने की सलाह दी। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि पॉलिथीन का जितना कम इस्तेमाल हो इतना ही पर्यावरण के लिए बेहतर रहेगा।
महात्मा गांधी द्वारा स्वच्छ भारत का जो सपना देखा गया था, वह आज स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रयासों से सफल होता नजर आ रहा है। इस दौरान गांव के सरकारी स्कूल से शुरुआत करके पूरे गांव में लगभग 4000 कपड़े के थैले वितरित किए गए। इस दौरान एडीसी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जल्द 3 लाख के करीब कपड़े के थैले तैयार करके जिला करनाल के गांवों में वितरित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस तरह समूह की महिलाएं 3 लाख थैले बनाकर लगभग 75 लाख रुपये की बिक्री करके 21 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकती है।
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उन्होंने समूह की महिलाओं को जागरूक करते हुए कहा कि यह समूह की महिलाओं के लिए एक तरह से सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। कार्यक्रम के दौरान एडीसी ने बच्चों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करते हुए कहा यदि आपको अपने आस-पास पॉलिथीन पड़ा हुआ मिलता है तो उसे एक जगह इकट्ठा कर ले, ताकि पॉलिथीन नालियों में न बहे। उन्होंने कहा कि जो बच्चा ज्याद से ज्यादा पॉलिथीन को इकट्ठा करके स्कूल में लाएगा, उस छात्र को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ग्राम पंचायत द्वारा समूह की महिलाओं को एडीसी के कर-कमलों से 1 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक जुबीन सालू, बीडीपीओ प्रेम सिंह, सरपंच निशांत राणा, प्रिंसिपल वंदना चावला, डीएफएम रामभगत, स्थानीय सिंडीकेट बैक की मैनेजर डीपीएम स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण राजकुमार संधू, ग्राम सचिव सुखेदव, एनआरएलएम की खंड कार्यक्रम प्रबंधक कविता, सतीश, सतबीर, पूर्णचंद सैनी, ब्रह्मजीत सिंह, समूह की महिलाएं, सभी पंच व भारी संख्या में स्कूली बच्चे भी उपस्थित रहे।
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पोषण माह के तहत दिलवाई स्कूली बच्चों व समूह की महिलाओं को शपथ
एडीसी ने कार्यक्रम के दौरान स्कूल के अध्यापकों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं तथा ग्रामीणों को पोषण माह के अंतर्गत शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन संतुलित आहार ही करना चाहिए। एडीसी ने पोषण माह को पॉलिथीन अभियान से जोड़ते हुए कहा कि हम घर में जो फल व सब्जियां लाते है, यदि वह पॉलिथीन की बजाय कपड़े के थैले में लेकर आएं तो उनके पोषक तत्व नष्ट नहीं होंगे। इसी तरह हम कई बार सब्जियां पॉलिथीन में डली हुई ही फ्रिज में रख देते है, जिस कारण से सब्जी के पोषक तत्व जल्दी नष्ट हो जाते है और वह खराब हो जाती है। इसलिए हमें पॉलिथीन इस्तेमाल अपने व्यवहार से निकालना होगा। इस दौरान स्कूल के अध्यापक सुरेन्द्र कुमार ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि सेल्फी विद डॉक्टर के प्रचलन की तरह यदि हम सेल्फी विद थैला या झोला की संकल्पना को प्रचलन में लाए तो इस अभियान से युवा वर्ग भी प्रभावित होगा।