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सफाई ठेकेदार व भ्रष्टाचार पर तीन घंटे तक पार्षदों ने अधिकारियों पर किये वार
Updated Wed, 28 Mar 2018 12:20 AM IST
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सफाई ठेकेदारों व भ्रष्टाचार पर तीन घंटे तक पार्षदों ने अधिकारियों पर किये वार
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। करीब एक साल बाद हुई नगर निगम के हाउस की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों के निशाने पर सफाई व स्ट्रीट लाइट के ठेकेदार रहे। एक एक करके पार्षदों ने ठेकेदारों पर न केवल भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराने पर अड़ गए। पार्षदों के आक्रोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सवा तीन घंटे तक चली बैठक में तीन घंटे तक डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना के असफल होने व स्ट्रीट लाइट खराब होने पर पार्षदों ने बवाल काटा। मेयर रेणु बाला गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग व डिप्टी मेयर मनोज वधवा भी ठेकेदारों के रवैये को लेकर अधिकारियों की खिंचाई की। पार्षदों ने ठेकेदारों पर रहमदिली और उनकी पेमेंट करने पर भी सवाल उठाए, साथ ही मांग की कि आगे से किसी भी ठेकेदार की पेमेंट बिना पार्षद की सहमति न दी जाए। इस पर सदन ने मुहर लगाई। साथ ही एलईडी लाइटें लगवाने को लेकर हुए टेंडर को रद्द करने, ई टॉयलेट व सांझी साइकिल के प्रोजेक्ट को कैंसिल करने के भी अधिकारियों पर दबाव बनाया गया।
मंगलवार को विकास सदन के सभागार में नगर निगम हाउस की बैठक हुई। सदन 33 प्रस्ताव रखे गए थे, इनमें सबसे महत्वपूर्ण बजट का रहा। हालांकि, बैठक में हिस्सा लेने से पहले पार्षदों ने पहले अलग से बैठक की और रणनीति तैयार की। इसके बाद जैसे ही पार्षद बैठक में पहुंचे तो पार्षदों ने एजेंडे पर बात करने की बजाए एक-एक पार्षद द्वारा अपने अपने मुद्दे व समस्याएं रखने पर अड़ गए। हालांकि, नगर निगम के ईओ धीरज कुमार ने पहले बजट पास करने की अपील की, लेकिन पार्षद नहीं माने। शुरू में सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग, डिप्टी मेयर मनोज वधवा व वार्ड नंबर 2 के पार्षद बलविंद्र सिंह के सफाई को लेकर ठेकेदारों के खिलाफ मोर्चा खोला। इन्होंने भरे सदन में आरोप लगाया कि ठेकेदार खुलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, न तो उनके कर्मचारी पूरे हैं और न ही वाहन। वाबजूद इसके उनकी हर माह पेमेंट की जा रही है।
पार्षद बलविंद्र सिंह ने तो यहां तक आरोप लगाए कि शहर में 50 प्रतिशत तक एरिये से कूड़ा नहीं उठाया जाता, बल्कि लोग इसके बदले पैसे दे रहे हैं, जबकि नगर निगम ने ठेकेदारों को 22 करोड़ रुपये पर साल का ठेका दिया हुआ। बलविंद्र सिंह, सोनिया पंडित, यशपाल मितल, वीर कुमार समेत अन्य पार्षदों ने एक सुर में ठेकेदारों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जो भी पार्षद उनके खिलाफ बोलता है, उसके वार्ड से सफाई कर्मचारियों की छुट्टी कर दी जाती है। साथ ही सफाई कर्मचारियों का पीएफ भी नहीं काटा जा रहा है और दो माह के बाद कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। निर्धारित 12100 वेतन की बजाए कर्मचारियों को आठ से दस हजार रुपये दिये जा रहे हैं।
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कूड़ा उठा नहीं, फिर भी पेमेंट पूरी क्यों की गई?
वार्ड नंबर-2 के पार्षद बलविंद्र ने कहा कि शहर की सफाई के नाम पर 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए है, लेकिन शहर से 50 प्रतिशत ही कचरा उठाया गया है। लेकिन नगर निगम ने ठेकेदार को पूरी पेमेंट कर दी है। ऐसा कर नगर निगम ने सरकार को 11 करोड़ रुपये का चुना लगाया है। पार्षद ने नगर निगम कमीश्नर को इस मामले की जांच करा मामला दर्ज करने के लिए कहा, लेकिन इस बात को नगर निगम अधिकारी ईओ धीरज कुमार कोई जवाब नहीं दे पाए। करीब एक घंटे तक इन 11 करोड़ रुपयों को लेकर हंगामा होता रहा। इस हंगामे के बाद बैठक में 33 प्रस्ताव में से 9 प्रस्ताव पर ही मोहर लगी।
घर के बाहर लगेंगे बारकोड, सफाई कर्मचारी घर के कचरे की खीचेंगे फोटो
नगर निगम कमिश्नर डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि जल्द ही शहर में घरों के बाहर बारकोड लगाए जाएंगे, अभी कुछ घरों पर बार कोड लगाए भी गए हैं। सुबह कचरा उठाते समय सुपरवाइजर व कर्मचारी एंड्रॉयड मोबाइल में स्केन करेगा और उस घर से उठाए गए कचरे की भी फोटो खिंचकर उस ऐप पर अपलोड करेगा। इससे वह मकान मालिक व नगर निगम कर्मचारी देख सकते हैं कि सफाई कर्मचारी ने किन घरों से कचरा उठाया और उन्होंन सुखा व गिला कचरा अलग-अलग किया है कि नहीं?
एलईडी बदलने व लगाने वाली कंपनी का कांट्रेकट कैंसिल करने की रखी मांग
बैठक में प्रस्ताव नंबर-13 में शहर में लगी वर्तमान लाइटों को रिप्लेस कर एलईडी लाइटों को लगाने से संबंधित था। इस बारे में सभी पार्षदों ने आवाज उठाते हुए कहा कि शहरी स्थानीय विभाग हरियाणा द्वारा निर्णय लेकर शहर में एलईडी लाइटें लगाने का जो ठेका एक प्राइवेट एजेंसी को दिया गया है, उसे रद्द करने के लिए सरकार को लिखा जाए कि यह कार्य नगर निगम स्वयं करवाएगा।
इन प्रस्ताव पर लगी मोहर
प्रस्ताव नंबर-19, 20 व 21 दूध की डेयरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर था। बैठक में सभी पार्षदों ने एक सहमति से इस प्रस्ताव पर अपनी मोहर लगाते हुए मत प्रकट किया कि पशुओं की केटेगरी के हिसाब से प्लाटों के साइज का लेआउट दोबारा तैयार किया जाए और उसके बाद पुन: ड्रा निकाया जाए। प्रस्ताव नंबर-22 कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की सड़क को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की 6 दुकानों के किराएदारों को किसी अन्य स्थान पर दुकान दिए जाने बारे था। इसके बाद आज हाउस में सहमति हुई कि 6 दुकानों के किराएदारों को सब्जी मंडी करनाल में जगह दे दी जाए। प्रस्ताव नंबर-29 तत्कालीन नगर सुधार मंडल वर्तमान नगर निगम करनाल की ओल्ड मुगल कैनाल की विस्तार योजना, जिसमें 60 अलग-अलग साइज के प्लाट निलामी द्वारा बेचे जाने हैं तथा सब्जी मंडी करनाल में डबल स्टोरी शॉप साइट्स के 39 प्लाट भी बेचे जाने हैं, को लेकर हाउस की बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान कर दी गई। प्रस्ताव नंबर-33 में नगर निगम करनाल के स्ट्रीट लाईटों के बिजली के बिलों में 5 पैसे प्रति यूनिट की दर से म्यूनिसिपल टैक्स की एडजस्टमेंट के उपरांत बिजली विभाग को बिलों की जो राशि देय बनती है, वह मूल 4 करोड़ 59 लाख 23 हजार 868 रूपये तथा 71 लाख 18 हजार 631 रूपये सरचार्ज सहित 5 करोड़ 30 लाख 42 हजार 499 रुपये बनती है। सरकार के निर्णयानुसार जो विभाग आगामी 31 मार्च से पहले-पहले बिजली विभाग को अपनी बिल राशि अदा करेगा, उसका सरचार्ज माफ कर दिया जाएगा, अत हाउस की बैठक में सर्वसम्मत्ति से प्रस्ताव पारित हुआ कि नगर निगम सरचार्ज राशि की माफी का फायदा उठाने के लिए मूल बिल राशि बिजली निगम को अदा कर दे। हाउस की बैठक में एजेंडा आइटमों से अतिरिक्त कुछ अन्य मुद्दों पर भी पार्षदों ने अपनी स्वीकृति दी। इनमें मुख्य रूप से नगर निगम कार्यालय में कार्यरत मुख्य अभियंता अनिल मेहता जो 31 मार्च 2018 को सेवानिवृत होने जा रहे हैं, की एक्सटेंशन के लिए सरकार को अनुरोध भेज दिया जाए, ताकि नगर निगम द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए अनुभवी अधिकारी की सेवाएं जारी रहें। एक्सटेंशन से पहले मेहता की सेवाएं नगर निगम में बतौर कंसल्टेंट ली जाएं। इन से अलग प्रस्ताव नंबर-1 व 11 पर भी मोहर लगी।
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ये रहे मौजूद
हाऊस की मिटिंग मेयर रेनू बाला गुप्ता की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस दौरान नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रियंका सोनी, सहायक आयुक्त (प्रशिक्षणाधीन) अभिषेक मीणा के अतिरिक्त सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग, डिप्टी मेयर मनोज वधवा, चीफ इंजीनियर अनिल मेहता, डीएमसी रोहताश बिशनोई, ईओ धीरज कुमार व कुछ एक वार्डों को छोड़ करीब सभी वार्डों के पार्षद उपस्थित थे। हाऊस की बैठक में पार्षद यशपाल मित्तल, बलविन्द्र सिंह, सोनिया पंडित, शीला रानी, सुजाता अरोड़ा, कमलेश लाठर, सुदर्शन कालड़ा, सुदेश गुलाटी, सतीश कुमार, मोहित कुमार, जोगिन्द्र चौहान, विनोद तितोरिया, अशौक जैन, वीर विक्रम कुमार तथा जगदीश सबरवाल भी उपस्थित थे।
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सांझी साइकिल व ई टायलेट की प्राइवेट एजेंसी का टेंडर होगा केंसिल
पार्षद मनोज वधवा ने पहले तो गलत वार्ड बंदी को लेकर नगर निगम के अधिकारियों से जवाब मांगा, जिसमें नगर निगम ने कहा कि यह मामला उनके अंडर नहीं है। इसके बाद वधवा ने शहर में नगर निगम ने करीब 18 जगह सांझी साइकिल स्टेंड बनवाएं हैं, लेकिन वर्तमान समय में वहां एक भी साइकिल नहीं है बल्कि प्राइवेट एजेंसी विज्ञापन लगाकर वहां कमाई कर रहे हैं और नगर निगम को नुकसान हो रहा है। इसी प्रकार नगर निगम ने शहर में कई जगहों पर ई-टॉयलेट बनवाएं हैं, उन पर भी ताले लगे हुए है और प्राइवेट एजेंसी वाले ई टॉयलेट पर विज्ञापन लगाकर कमाई कर रहे हैं। इन दोनों कंपनियों का टेंडर केंसिल किया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। करीब एक साल बाद हुई नगर निगम के हाउस की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों के निशाने पर सफाई व स्ट्रीट लाइट के ठेकेदार रहे। एक एक करके पार्षदों ने ठेकेदारों पर न केवल भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराने पर अड़ गए। पार्षदों के आक्रोश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सवा तीन घंटे तक चली बैठक में तीन घंटे तक डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना के असफल होने व स्ट्रीट लाइट खराब होने पर पार्षदों ने बवाल काटा। मेयर रेणु बाला गुप्ता, सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग व डिप्टी मेयर मनोज वधवा भी ठेकेदारों के रवैये को लेकर अधिकारियों की खिंचाई की। पार्षदों ने ठेकेदारों पर रहमदिली और उनकी पेमेंट करने पर भी सवाल उठाए, साथ ही मांग की कि आगे से किसी भी ठेकेदार की पेमेंट बिना पार्षद की सहमति न दी जाए। इस पर सदन ने मुहर लगाई। साथ ही एलईडी लाइटें लगवाने को लेकर हुए टेंडर को रद्द करने, ई टॉयलेट व सांझी साइकिल के प्रोजेक्ट को कैंसिल करने के भी अधिकारियों पर दबाव बनाया गया।
मंगलवार को विकास सदन के सभागार में नगर निगम हाउस की बैठक हुई। सदन 33 प्रस्ताव रखे गए थे, इनमें सबसे महत्वपूर्ण बजट का रहा। हालांकि, बैठक में हिस्सा लेने से पहले पार्षदों ने पहले अलग से बैठक की और रणनीति तैयार की। इसके बाद जैसे ही पार्षद बैठक में पहुंचे तो पार्षदों ने एजेंडे पर बात करने की बजाए एक-एक पार्षद द्वारा अपने अपने मुद्दे व समस्याएं रखने पर अड़ गए। हालांकि, नगर निगम के ईओ धीरज कुमार ने पहले बजट पास करने की अपील की, लेकिन पार्षद नहीं माने। शुरू में सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग, डिप्टी मेयर मनोज वधवा व वार्ड नंबर 2 के पार्षद बलविंद्र सिंह के सफाई को लेकर ठेकेदारों के खिलाफ मोर्चा खोला। इन्होंने भरे सदन में आरोप लगाया कि ठेकेदार खुलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, न तो उनके कर्मचारी पूरे हैं और न ही वाहन। वाबजूद इसके उनकी हर माह पेमेंट की जा रही है।
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पार्षद बलविंद्र सिंह ने तो यहां तक आरोप लगाए कि शहर में 50 प्रतिशत तक एरिये से कूड़ा नहीं उठाया जाता, बल्कि लोग इसके बदले पैसे दे रहे हैं, जबकि नगर निगम ने ठेकेदारों को 22 करोड़ रुपये पर साल का ठेका दिया हुआ। बलविंद्र सिंह, सोनिया पंडित, यशपाल मितल, वीर कुमार समेत अन्य पार्षदों ने एक सुर में ठेकेदारों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जो भी पार्षद उनके खिलाफ बोलता है, उसके वार्ड से सफाई कर्मचारियों की छुट्टी कर दी जाती है। साथ ही सफाई कर्मचारियों का पीएफ भी नहीं काटा जा रहा है और दो माह के बाद कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। निर्धारित 12100 वेतन की बजाए कर्मचारियों को आठ से दस हजार रुपये दिये जा रहे हैं।
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वार्ड नंबर-2 के पार्षद बलविंद्र ने कहा कि शहर की सफाई के नाम पर 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए है, लेकिन शहर से 50 प्रतिशत ही कचरा उठाया गया है। लेकिन नगर निगम ने ठेकेदार को पूरी पेमेंट कर दी है। ऐसा कर नगर निगम ने सरकार को 11 करोड़ रुपये का चुना लगाया है। पार्षद ने नगर निगम कमीश्नर को इस मामले की जांच करा मामला दर्ज करने के लिए कहा, लेकिन इस बात को नगर निगम अधिकारी ईओ धीरज कुमार कोई जवाब नहीं दे पाए। करीब एक घंटे तक इन 11 करोड़ रुपयों को लेकर हंगामा होता रहा। इस हंगामे के बाद बैठक में 33 प्रस्ताव में से 9 प्रस्ताव पर ही मोहर लगी।
घर के बाहर लगेंगे बारकोड, सफाई कर्मचारी घर के कचरे की खीचेंगे फोटो
नगर निगम कमिश्नर डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि जल्द ही शहर में घरों के बाहर बारकोड लगाए जाएंगे, अभी कुछ घरों पर बार कोड लगाए भी गए हैं। सुबह कचरा उठाते समय सुपरवाइजर व कर्मचारी एंड्रॉयड मोबाइल में स्केन करेगा और उस घर से उठाए गए कचरे की भी फोटो खिंचकर उस ऐप पर अपलोड करेगा। इससे वह मकान मालिक व नगर निगम कर्मचारी देख सकते हैं कि सफाई कर्मचारी ने किन घरों से कचरा उठाया और उन्होंन सुखा व गिला कचरा अलग-अलग किया है कि नहीं?
एलईडी बदलने व लगाने वाली कंपनी का कांट्रेकट कैंसिल करने की रखी मांग
बैठक में प्रस्ताव नंबर-13 में शहर में लगी वर्तमान लाइटों को रिप्लेस कर एलईडी लाइटों को लगाने से संबंधित था। इस बारे में सभी पार्षदों ने आवाज उठाते हुए कहा कि शहरी स्थानीय विभाग हरियाणा द्वारा निर्णय लेकर शहर में एलईडी लाइटें लगाने का जो ठेका एक प्राइवेट एजेंसी को दिया गया है, उसे रद्द करने के लिए सरकार को लिखा जाए कि यह कार्य नगर निगम स्वयं करवाएगा।
इन प्रस्ताव पर लगी मोहर
प्रस्ताव नंबर-19, 20 व 21 दूध की डेयरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर था। बैठक में सभी पार्षदों ने एक सहमति से इस प्रस्ताव पर अपनी मोहर लगाते हुए मत प्रकट किया कि पशुओं की केटेगरी के हिसाब से प्लाटों के साइज का लेआउट दोबारा तैयार किया जाए और उसके बाद पुन: ड्रा निकाया जाए। प्रस्ताव नंबर-22 कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की सड़क को चौड़ा करने के लिए नगर निगम की 6 दुकानों के किराएदारों को किसी अन्य स्थान पर दुकान दिए जाने बारे था। इसके बाद आज हाउस में सहमति हुई कि 6 दुकानों के किराएदारों को सब्जी मंडी करनाल में जगह दे दी जाए। प्रस्ताव नंबर-29 तत्कालीन नगर सुधार मंडल वर्तमान नगर निगम करनाल की ओल्ड मुगल कैनाल की विस्तार योजना, जिसमें 60 अलग-अलग साइज के प्लाट निलामी द्वारा बेचे जाने हैं तथा सब्जी मंडी करनाल में डबल स्टोरी शॉप साइट्स के 39 प्लाट भी बेचे जाने हैं, को लेकर हाउस की बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान कर दी गई। प्रस्ताव नंबर-33 में नगर निगम करनाल के स्ट्रीट लाईटों के बिजली के बिलों में 5 पैसे प्रति यूनिट की दर से म्यूनिसिपल टैक्स की एडजस्टमेंट के उपरांत बिजली विभाग को बिलों की जो राशि देय बनती है, वह मूल 4 करोड़ 59 लाख 23 हजार 868 रूपये तथा 71 लाख 18 हजार 631 रूपये सरचार्ज सहित 5 करोड़ 30 लाख 42 हजार 499 रुपये बनती है। सरकार के निर्णयानुसार जो विभाग आगामी 31 मार्च से पहले-पहले बिजली विभाग को अपनी बिल राशि अदा करेगा, उसका सरचार्ज माफ कर दिया जाएगा, अत हाउस की बैठक में सर्वसम्मत्ति से प्रस्ताव पारित हुआ कि नगर निगम सरचार्ज राशि की माफी का फायदा उठाने के लिए मूल बिल राशि बिजली निगम को अदा कर दे। हाउस की बैठक में एजेंडा आइटमों से अतिरिक्त कुछ अन्य मुद्दों पर भी पार्षदों ने अपनी स्वीकृति दी। इनमें मुख्य रूप से नगर निगम कार्यालय में कार्यरत मुख्य अभियंता अनिल मेहता जो 31 मार्च 2018 को सेवानिवृत होने जा रहे हैं, की एक्सटेंशन के लिए सरकार को अनुरोध भेज दिया जाए, ताकि नगर निगम द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए अनुभवी अधिकारी की सेवाएं जारी रहें। एक्सटेंशन से पहले मेहता की सेवाएं नगर निगम में बतौर कंसल्टेंट ली जाएं। इन से अलग प्रस्ताव नंबर-1 व 11 पर भी मोहर लगी।
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ये रहे मौजूद
हाऊस की मिटिंग मेयर रेनू बाला गुप्ता की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस दौरान नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रियंका सोनी, सहायक आयुक्त (प्रशिक्षणाधीन) अभिषेक मीणा के अतिरिक्त सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग, डिप्टी मेयर मनोज वधवा, चीफ इंजीनियर अनिल मेहता, डीएमसी रोहताश बिशनोई, ईओ धीरज कुमार व कुछ एक वार्डों को छोड़ करीब सभी वार्डों के पार्षद उपस्थित थे। हाऊस की बैठक में पार्षद यशपाल मित्तल, बलविन्द्र सिंह, सोनिया पंडित, शीला रानी, सुजाता अरोड़ा, कमलेश लाठर, सुदर्शन कालड़ा, सुदेश गुलाटी, सतीश कुमार, मोहित कुमार, जोगिन्द्र चौहान, विनोद तितोरिया, अशौक जैन, वीर विक्रम कुमार तथा जगदीश सबरवाल भी उपस्थित थे।
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सांझी साइकिल व ई टायलेट की प्राइवेट एजेंसी का टेंडर होगा केंसिल
पार्षद मनोज वधवा ने पहले तो गलत वार्ड बंदी को लेकर नगर निगम के अधिकारियों से जवाब मांगा, जिसमें नगर निगम ने कहा कि यह मामला उनके अंडर नहीं है। इसके बाद वधवा ने शहर में नगर निगम ने करीब 18 जगह सांझी साइकिल स्टेंड बनवाएं हैं, लेकिन वर्तमान समय में वहां एक भी साइकिल नहीं है बल्कि प्राइवेट एजेंसी विज्ञापन लगाकर वहां कमाई कर रहे हैं और नगर निगम को नुकसान हो रहा है। इसी प्रकार नगर निगम ने शहर में कई जगहों पर ई-टॉयलेट बनवाएं हैं, उन पर भी ताले लगे हुए है और प्राइवेट एजेंसी वाले ई टॉयलेट पर विज्ञापन लगाकर कमाई कर रहे हैं। इन दोनों कंपनियों का टेंडर केंसिल किया जाए।