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15 साल की बेटी ने अंग्रेजी में लिखा कविता संग्रह
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Thu, 05 Nov 2015 12:19 AM IST
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खेलने और पढ़ने की उम्र में अगर कोई साहित्य लिखने लगे तो आश्चर्य तो होगा, वो भी इंग्लिस में कविता संग्रह। कान्वेंट स्कूल की 11वीं की छात्रा ने यह कमाल किया है। इस छात्रा की किताब का नाम है माइल्ज गो टू, जिसमें कुल 38 कविताएं हैं। इलाहाबाद के एक पब्लिशर ने इसे प्रकाशित किया है।
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अहम बात यह है कि ये कविताएं प्रकृति और टूटते सामाजिक मूल्यों पर आधारित हैं। करनाल की बेटी की इस उपलब्धि पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने न केवल उसकी किताब का लोकार्पण किया बल्कि उसे सम्मानित भी किया।
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आठवीं कक्षा से लिख रही है कविताएं
तरू अभी कान्वेंट स्कूल में पढ़ती है, इससे पहले वह डीपीएस में पढ़ती थी। तरू को कविताएं लिखने का शौक बचपन से है, लेकिन वह आठवीं कक्षा से लगातार कविता लिख रही है और अध्ययन भी कर रही है। इलाहाबाद के साइबरबिट नामक प्रकाशक ने इसे प्रकाशित किया है। साहित्य के जानकार कविताओं को बहुत संवेदनशील और संजीदा बता रहे हैं।
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नाम के आगे पीछे माता-पिता
वैसे 11वीं कक्षा की छात्रा का नाम तरू है। लेकिन शुरू से ही तरू अपने नाम के आगे कंवर और नाम के पीछे राजे लिखती है। दरअसल तरू की माता का गांव सग्गा स्थित नवोदय स्कूल की प्रिंसिपल है और उनका नाम अमृत कौर है, जबकि उनके पिता रिटायर्ड डीएफओ आरएस सांगवान हैं, इनके नाम से राजे लिया है।
तरू का कहना है कि माता-पिता चाहते थे कि बेटी डॉक्टर बने, लेकिन मैं कुछ और करना चाहती हूं, इसलिए मैंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर आर्ट्स ली। शुरू में परिवार के लोगों को बुरा लगा, लेकिन अब वे खुश हैं और मेरे साथ हैं। मुझे लगता है कि मैं लेखन के कार्य में अच्छा कर सकती हूं, ये मेरा पहला प्रयास है, कविताएं और भी हैं, अभी काम जारी है।
पहली किताब लिखते ही मिला सम्मान
तरु की पहली किताब प्रकाशित होते ही उसे सम्मान भी मिला है। दो दिन पहले करनाल क्लब में आयोजित दसवें महिला साहित्यकार सम्मान समारोह में भी तरु को सम्मानित किया गया। यहीं पर तरु की बुक का भी लोकार्पण किया गया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अध्यक्ष अंग्रेज सिंह, स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक एवं कारवाने अदब के संचालक डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि तरू की कविताओं में गहराई है। हमें खुशी है कि एक 11वीं कक्षा की बेटी साहित्य में कदम रख रही है। बड़ी बात यह भी है कि अंग्रेजी में कविताओं का उसका संग्रह प्रकाशित हुआ। यह करनाल के लिए गर्व की बात है।