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नौ माह बाद ही 9.51 करोड़ के सीसीटीवी कैमरे बंद, डीसी ने ली निगम अधिकारियों की क्लास
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मार्च 2018 में करीब 9.51 करोड़ खर्च कर शहर में लगाए गए अधिकतर सीसीटीवी कैमरे धूल फांक रहे हैं। दावा था कि इन्हें दुरुस्त रखने के लिए 40 टेक्निकल एक्सपर्ट तैनात रहेंगे, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। वीरवार को मासिक समीक्षा बैठक में सच्चाई सबके सामने आ गई। बैठक में उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने निगम अधिकारियों की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि शहर में 129 में से 27 प्वाइंट आज भी खराब हैं।
रात्रि के समय कैमरे ठीक से काम भी नहीं कर रहे। नाराज डीसी ने कंपनी को दी जाने वाली 3 करोड़ रुपए की मेंटेनेंस राशि में से डिडक्शन तक के निर्देश दिए। नसीहत दी कि इन्हें तुरंत ठीक करवाएं। कंपनी के अधिकारी को बुलाकर उन्हें पाबंद करने की बात भी कही।
बता दें कि करनाल के चौक चौराहों पर 129 सीसीटीवी लगाने में 6.53 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें एक साल की वारंटी भी शामिल है, जबकि करीब तीन करोड़ की राशि पांच साल तक इनकी देखरेख के लिए है। बैठक में मौजूद निगम के एक्सईएन महेंद्र सिंह के पास कोई जवाब नहीं था।
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दावा था : 40 टेक्निकल एक्सपर्ट तैनात होंगे
सीसीटीवी के टेंडर के अनुसार इनकी देखरेख के लिए शहर में 40 टेक्निकल एक्सपर्ट तैनात किए जाने थे। नियम के अनुसार कैमरों में खराबी आने पर तुरंत इन्हें ठीक करने का प्रावधान है। इसलिए लघु सचिवालय में इनका कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, लेकिन कंपनी की यह टेक्निकल एक्सपर्ट टीम कहीं दिखाई नहीं दे रही। यही वजह है कि सीसीटीवी खराब हैं।
3.61 करोड़ अधिक में टेंडर फिर यह हाल
सीसीटीवी लगने से पहले ही सीएम सिटी में सियासत गर्मा गई थी। हेड ऑफिस ने एस्टीमेट से 3.61 करोड़ अधिक में टेंडर को मंजूरी दी थी। निगम ने भी चुपके से वर्क आर्डर जारी कर दिया था। मेयर व पार्षदों तक को इसके बारे में नहीं बताया गया था। इससे नाराज पार्षदों ने लामबंद होकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। दरअसल, नगर निगम ने इसके लिए 5.90 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया था। एक साल की वारंटी के बाद पांच साल की देखरेख भी इसमें शामिल थी, जबकि हेड ऑफिस ने 9.51 करोड़ में इसका टेंडर में अलॉट किया। यानि एस्टीमेट से भी 3.61 करोड़ अधिक। दूर संचार सिस्टम पंचकूला ने शहर में यह कैमरे लगवाए थे।
जानिए एस्टीमेट और टेंडर में अंतर
129 सीसीटीवी की लागत देखरेख पर सालाना खर्च वारंटी के बाद पांच साल में कुल
एस्टीमेट 4.90 करोड़ 20 लाख 5.90 करोड़
टेंडर में 6.53 करोड़ 51.60 लाख 9.51 करोड़
नोट : शुरुआत में नगर निगम ने सीमित स्थानों पर सीसीटीवी लगाने के लिए 61 लाख एस्टीमेट भेजा था। बाद में सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों पर 4.90 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया गया था।
पीटी जैड कैमरे भी नाकाम क्यों?
टेंडर के अनुसार शहर में 30 स्थानों पर 104 कैमरे फिक्स और 25 पीटी जैड कैमरे लगाए गए हैं। पीटी जैड कैमरों की खासियत बताई गई थी कि यह रात के अंधेरे में भी हर घटना कैद करेंगे। बैठक में डीसी ने खुद कहा कि रात्रि के समय कैमरों की विजीबिलीटी ठीक नहीं है। सवाल उठता है तो क्या इन कैमरों की गुणवत्ता से समझौता हुआ है।
तारें कटते ही डीसी को पत्र लिखा था : जेई
निगम के जेई कुलभूषण का कहना है कि कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरों की तारें काट दी गई हैं। इस संबंध में डीसी को पत्र लिखा गया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। अंबेड़कर चौक, एनडीआरआई चौक, बलड़ी बाईपास और सेक्टर-7 स्थित साईं मंदिर चौक के कैमरे तार कटने की वजह से बंद हैं। सभी विभागों को हिदायत दी जाए तो ही हालात सुधर सकते हैं।
फिर गड्डा मुक्त शहर का लक्ष्य
डीसी ने बताया कि हरपथ एप से सड़कों के गड्ढे भरवाने के लिए जिले को तीन स्टार मिले हैं। शिकायतों के समाधान के लिए 95 प्रतिशत कार्रवाई की गई है। हरपथ का दूसरा चरण समाप्त होने जा रहा है। इसके तहत गड्ढों की स्कैनिंग का कार्य पूरा हो चुका है। तीसरा चरण जनवरी में शुरू होकर फरवरी तक रहेगा। प्रशासन का लक्ष्य है इस बार जिले में सभी सड़कें गड्ढें मुक्त कर दी जाएंगी। डीसी ने कहा कि सीएम विंडो के तहत जिला की रैंकिंग पिछले दिनों निगम चुनाव जैसी व्यस्तताओं के चलते नंबर 2 पर है, लेकिन शीघ्र ही करनाल पुन: नंबर एक पर होगी। उपायुक्त ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में जिले में अवैध रूप से की गई माइनिंग रोकने के लिए 41 रेड की गई। 51 लाख रुपये की पेनेल्टी लगाई गई है।
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करनाल। मार्च 2018 में करीब 9.51 करोड़ खर्च कर शहर में लगाए गए अधिकतर सीसीटीवी कैमरे धूल फांक रहे हैं। दावा था कि इन्हें दुरुस्त रखने के लिए 40 टेक्निकल एक्सपर्ट तैनात रहेंगे, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। वीरवार को मासिक समीक्षा बैठक में सच्चाई सबके सामने आ गई। बैठक में उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने निगम अधिकारियों की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि शहर में 129 में से 27 प्वाइंट आज भी खराब हैं।
रात्रि के समय कैमरे ठीक से काम भी नहीं कर रहे। नाराज डीसी ने कंपनी को दी जाने वाली 3 करोड़ रुपए की मेंटेनेंस राशि में से डिडक्शन तक के निर्देश दिए। नसीहत दी कि इन्हें तुरंत ठीक करवाएं। कंपनी के अधिकारी को बुलाकर उन्हें पाबंद करने की बात भी कही।
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बता दें कि करनाल के चौक चौराहों पर 129 सीसीटीवी लगाने में 6.53 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें एक साल की वारंटी भी शामिल है, जबकि करीब तीन करोड़ की राशि पांच साल तक इनकी देखरेख के लिए है। बैठक में मौजूद निगम के एक्सईएन महेंद्र सिंह के पास कोई जवाब नहीं था।
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दावा था : 40 टेक्निकल एक्सपर्ट तैनात होंगे
सीसीटीवी के टेंडर के अनुसार इनकी देखरेख के लिए शहर में 40 टेक्निकल एक्सपर्ट तैनात किए जाने थे। नियम के अनुसार कैमरों में खराबी आने पर तुरंत इन्हें ठीक करने का प्रावधान है। इसलिए लघु सचिवालय में इनका कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, लेकिन कंपनी की यह टेक्निकल एक्सपर्ट टीम कहीं दिखाई नहीं दे रही। यही वजह है कि सीसीटीवी खराब हैं।
3.61 करोड़ अधिक में टेंडर फिर यह हाल
सीसीटीवी लगने से पहले ही सीएम सिटी में सियासत गर्मा गई थी। हेड ऑफिस ने एस्टीमेट से 3.61 करोड़ अधिक में टेंडर को मंजूरी दी थी। निगम ने भी चुपके से वर्क आर्डर जारी कर दिया था। मेयर व पार्षदों तक को इसके बारे में नहीं बताया गया था। इससे नाराज पार्षदों ने लामबंद होकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। दरअसल, नगर निगम ने इसके लिए 5.90 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया था। एक साल की वारंटी के बाद पांच साल की देखरेख भी इसमें शामिल थी, जबकि हेड ऑफिस ने 9.51 करोड़ में इसका टेंडर में अलॉट किया। यानि एस्टीमेट से भी 3.61 करोड़ अधिक। दूर संचार सिस्टम पंचकूला ने शहर में यह कैमरे लगवाए थे।
जानिए एस्टीमेट और टेंडर में अंतर
129 सीसीटीवी की लागत देखरेख पर सालाना खर्च वारंटी के बाद पांच साल में कुल
एस्टीमेट 4.90 करोड़ 20 लाख 5.90 करोड़
टेंडर में 6.53 करोड़ 51.60 लाख 9.51 करोड़
नोट : शुरुआत में नगर निगम ने सीमित स्थानों पर सीसीटीवी लगाने के लिए 61 लाख एस्टीमेट भेजा था। बाद में सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों पर 4.90 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया गया था।
पीटी जैड कैमरे भी नाकाम क्यों?
टेंडर के अनुसार शहर में 30 स्थानों पर 104 कैमरे फिक्स और 25 पीटी जैड कैमरे लगाए गए हैं। पीटी जैड कैमरों की खासियत बताई गई थी कि यह रात के अंधेरे में भी हर घटना कैद करेंगे। बैठक में डीसी ने खुद कहा कि रात्रि के समय कैमरों की विजीबिलीटी ठीक नहीं है। सवाल उठता है तो क्या इन कैमरों की गुणवत्ता से समझौता हुआ है।
तारें कटते ही डीसी को पत्र लिखा था : जेई
निगम के जेई कुलभूषण का कहना है कि कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरों की तारें काट दी गई हैं। इस संबंध में डीसी को पत्र लिखा गया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। अंबेड़कर चौक, एनडीआरआई चौक, बलड़ी बाईपास और सेक्टर-7 स्थित साईं मंदिर चौक के कैमरे तार कटने की वजह से बंद हैं। सभी विभागों को हिदायत दी जाए तो ही हालात सुधर सकते हैं।
फिर गड्डा मुक्त शहर का लक्ष्य
डीसी ने बताया कि हरपथ एप से सड़कों के गड्ढे भरवाने के लिए जिले को तीन स्टार मिले हैं। शिकायतों के समाधान के लिए 95 प्रतिशत कार्रवाई की गई है। हरपथ का दूसरा चरण समाप्त होने जा रहा है। इसके तहत गड्ढों की स्कैनिंग का कार्य पूरा हो चुका है। तीसरा चरण जनवरी में शुरू होकर फरवरी तक रहेगा। प्रशासन का लक्ष्य है इस बार जिले में सभी सड़कें गड्ढें मुक्त कर दी जाएंगी। डीसी ने कहा कि सीएम विंडो के तहत जिला की रैंकिंग पिछले दिनों निगम चुनाव जैसी व्यस्तताओं के चलते नंबर 2 पर है, लेकिन शीघ्र ही करनाल पुन: नंबर एक पर होगी। उपायुक्त ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में जिले में अवैध रूप से की गई माइनिंग रोकने के लिए 41 रेड की गई। 51 लाख रुपये की पेनेल्टी लगाई गई है।