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नगर निगम का कारनामा : सस्ते दामों में बेची अपनी जमीन, खाते में आया दस करोड़ का घाटा

Wed, 03 Jan 2018 10:25 PM IST
Updated Wed, 03 Jan 2018 10:25 PM IST
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नगर निगम का कारनामा : सस्ते दामों में बेची अपनी जमीन, खाते में आया दस करोड़ का घाटा
नगर निगम का कारनामा : सस्ते दामों में बेची अपनी जमीन, खाते में आया दस करोड़ का घाटा
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। नगर निगम के अधिकारी निगम के खजाने की कोई परवाह नहीं कर रहे हैं। अधिकारी व कर्मचारी दोनों हाथों से खजाना लुटाने में जुटे हैं, साथ ही निगम की महंगी जमीन को निर्धारित कलेक्टर से भी कम दामों पर बेच रहे हैं। एक तो निगम की जमीन को निर्धारित रेट से कम पैसे में बेचा जा रहा है, दूसरा कम रेट के पैसे लेने के लिए भी निगम के अधिकारी प्रयास नहीं कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया सकता है कि करनाल नगरनिगम का खजाना आखिर कब तक चलेगा। करीब सात एकड़ जमीन निगम के अधिकारियों ने न केवल निर्धारित रेटों से कम बेच दी, बल्कि निगम को दस करोड़ रुपये का घाटा तक पहुंचा दिया गया। निकाय विभाग ने अब इस मामले को गंभीरता से लिया है और दस करोड़ रुपये वसूलने के निर्देश दिये हैं।
मामले के अनुसार, वर्ष 2009 मेें तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी डिफेंस, पैरामिलिट्री और आर्थिक रूप से गरीब लोगों के लिए पूरे प्रदेश में 50 हजार अफोररडेबल मकान फ्लैट बनाए जाएंगे। इसके तहत, नगर निगम को 7 एकड़ 10 मरले (करीब 34130 गज) जमीन हाउसिंग बोर्ड को ट्रांसफर की जानी थी। म्यूनिसिपल एक्ट के अनुसार, निगम की कोई भी जमीन किसी को भी निशुल्क नहीं जा सकती। इसके तहत, वर्ष 2011 में सदन की बैठक हुई और बैठक मेें जमीन देने को लेकर प्रस्ताव नंबर 9 हाउस ने पास किया। प्रस्ताव के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड को यह जमीन 9000 प्रतिगज के साथ 120 रुपये डेवलपमेंट चार्जेज देने के लिए अनुमति दे दी गई। इसके बाद वर्ष 2013 में हरियाणा सरकार के अर्बल लोकल बाडी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि इस जमीनका हस्तांतरण, हाउंसिंग ब़ोर्ड को करंट कलेक्टर रेट के साथ डेवलपमेंट चार्जेज के अनुसार किया जाएगा। करनाल निगम ने दोबारा से 2014 में ये अप्रूव कर दिया कि 9 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से ही जमीन ट्रांसफर की जाएगी। लेकिन वर्ष 2014 में ही निगम ने यह जमीन हाउसिंग बोर्ड को 6 हजार रुपये प्रति के हिसाब से ट्रांसफर कर दी।
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यहां यह भी बताना जरूरी है कि इसी कुल जमीन में से 1500 गज का एक टुकड़ा निगम ने वर्ष 2009 में उत्तर हरियाणा वितरण निगम को 9 हजार रुपये से बेचा था। ऐसे में वर्ष 2014 में 6 हजार रुपये में बेचे गई जस्टीफाइड नहीं हैव इस मामले में डायरेक्टर आडिट निकाय ने भी कड़ी टिप्पणी की है और बताया कि निगम के अधिकारियों द्वारा ऐसा करने से 10 करोड़, 23 लाख, 90 हजार का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में डायरेक्टर आडिट ने ये भी सलाह दी है कि ये सारा मामला हाउसिंग बोर्ड के साथ टेकअप किया जाए और उस समय के कलेक्टर रेट के हिसाब से पेमेंटली जाए, साथ ही रिकार्ड दुरुस्त किया जाए।
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इस पूरे मामले में उस समय के आयुक्त व अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इस बारे में नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि इस केस को स्टडी किया जाएगा और अगर निगम ने सस्ते दामों पर जमीन दी है तो इसको चेक कराया जाएगा, किसी भी सूरत में निगम को घाटा नहीं होने दिया जाएगा।
निगम ने डिमांड तक नहीं की
27 जून, 2014 को तय की गई शर्तों व नियमों के अनुसार, इस जमीन का पैसा हाउसिंग बोर्ड ने 25 प्रतिशत 30 दिन में देना था, शेष 75 प्रतिशत या तो 60दिनमें या फिर छह साल की किशत में 12 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से दिया जाना चाहिए। उस भूमि का कुल प्राइस 20 करोड़, 88 लाख रुपये बना था,में से 5 करोड़ 22 लाख रुपये ही दे दिये थे, लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी शेष राशि की निगम की ओर से न तो मांगी गई और न ही ब्याज का सिस्टम बनाया गया। डिमांड और कलेक्शन रजिस्टर में भी इसकी कोई डिमांड नहीं की गई।

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कलेक्टर रेट किया दरकिनार
वर्ष, 2008 के पत्र के अनुसार, निशुल्क नहीं दी जा सकती, हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट के तहत जोभी कलेक्शन रेट व डेवलपमेंट चार्जेज से हिसाब से ही ट्रांसफर हो सकती है। बावजूद इसके निगम ने वर्ष-2009 में 1500 गज जमीन निर्धारित कलेक्टर रेट से नीचे उत्तर हरियाणा बिजली निगम को ट्रांसफर कर दी। आडिट टीम ने पाया है कि वर्ष 2009 में कलेक्टर 11 हजार रुपये प्रति गज था, जबकि बिजली निगम को यह जमीन 9000 रुपये प्रति गज के हिसाब दे दी गई। इससे निगम को उस समय 30लाख रुपये का सीधा नुकसान किया। उत्तर हरियाणा बिजली निगम ने यह भी पैसे नहीं दिये और न ही निगम ने कोई डिमांड करी। आडिट टीम ने बताया है कि ऐसे में ब्याज और डेवेलपमेंट चार्जेज के हिसाब से अब यह राशि 1 करोड़ 36 लाख रुपये बनती है। आडिट डायरेक्टर ने बिजली निगम से यह रा शि रिकवरी करने के निर्देश दिये हैं।
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