{"_id":"69d01835d1b03e6ae408f907","slug":"120-mt-wheat-reached-the-mandis-moisture-became-a-hindrance-in-government-procurement-karnal-news-c-245-1-kht1013-147391-2026-04-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: मंडियों में पहुंचा 120 एमटी गेहूं सरकारी खरीद में नमी बनी बाधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: मंडियों में पहुंचा 120 एमटी गेहूं सरकारी खरीद में नमी बनी बाधा
Sat, 04 Apr 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:12 AM IST
विज्ञापन
नई अनाजमंडी में फसल बिकने के इंतजार में बैठा किसान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। अनाज मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन तीन दिन बीतने के बावजूद सरकारी खरीद सुचारु रूप से शुरू नहीं हो पाई है। किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं, मगर नमी अधिक होने के कारण खरीद प्रक्रिया अटकी हुई है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लाएं।
सरकार ने गेहूं की खरीद के लिए अधिकतम 12 प्रतिशत नमी का मानक तय किया है, जबकि वर्तमान में मंडियों में आ रहे गेहूं में नमी का स्तर 20 प्रतिशत तक पाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अधिक नमी वाले गेहूं के भंडारण में खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद ही खरीद की जा सकती है।
जिले की 42 मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेहूं की खरीद की व्यवस्था की गई है। अब तक करीब 120 मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंच चुका है। फिलहाल आवक कम होने के कारण अधिकतर फसल शेड के नीचे सुरक्षित रखी गई है।
विज्ञापन
इस मुद्दे पर मार्केट कमेटी कैथल के सचिव नरेंद्र ढुल ने कहा कि मंडियों में आ रही गेहूं की फसल में नमी तय मानकों से अधिक है, इसलिए खरीद शुरू नहीं हो सकी है। किसानों से अपील है कि वे फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लाएं।
सरसों की खरीद में बारदाने की किल्लत से बढ़ी परेशानी
गेहूं के साथ-साथ सरसों की आवक भी जारी है। अब तक करीब 1400 क्विंटल सरसों की सरकारी और निजी स्तर पर खरीद हो चुकी है। हालांकि मंडियों में बारदाने (खाली बैग) की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। खरीद एजेंसियों के पास पर्याप्त बैग उपलब्ध नहीं हैं, जिससे खरीदी गई फसल का उठान प्रभावित हो सकता है। यदि जल्द ही आपूर्ति नहीं हुई, तो मंडियों में जगह की कमी के चलते खरीद प्रक्रिया बाधित होने की आशंका है।
किसान पहले ही मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। अब नमी के कारण खरीद में देरी और बारदाने की कमी ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। किसानों ने मांग की है कि सरकार नमी के मानकों में राहत दे या फसल सुखाने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे।
विज्ञापन
कैथल। अनाज मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन तीन दिन बीतने के बावजूद सरकारी खरीद सुचारु रूप से शुरू नहीं हो पाई है। किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं, मगर नमी अधिक होने के कारण खरीद प्रक्रिया अटकी हुई है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लाएं।
सरकार ने गेहूं की खरीद के लिए अधिकतम 12 प्रतिशत नमी का मानक तय किया है, जबकि वर्तमान में मंडियों में आ रहे गेहूं में नमी का स्तर 20 प्रतिशत तक पाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अधिक नमी वाले गेहूं के भंडारण में खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद ही खरीद की जा सकती है।
विज्ञापन
जिले की 42 मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेहूं की खरीद की व्यवस्था की गई है। अब तक करीब 120 मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंच चुका है। फिलहाल आवक कम होने के कारण अधिकतर फसल शेड के नीचे सुरक्षित रखी गई है।
विज्ञापन
इस मुद्दे पर मार्केट कमेटी कैथल के सचिव नरेंद्र ढुल ने कहा कि मंडियों में आ रही गेहूं की फसल में नमी तय मानकों से अधिक है, इसलिए खरीद शुरू नहीं हो सकी है। किसानों से अपील है कि वे फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लाएं।
सरसों की खरीद में बारदाने की किल्लत से बढ़ी परेशानी
गेहूं के साथ-साथ सरसों की आवक भी जारी है। अब तक करीब 1400 क्विंटल सरसों की सरकारी और निजी स्तर पर खरीद हो चुकी है। हालांकि मंडियों में बारदाने (खाली बैग) की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। खरीद एजेंसियों के पास पर्याप्त बैग उपलब्ध नहीं हैं, जिससे खरीदी गई फसल का उठान प्रभावित हो सकता है। यदि जल्द ही आपूर्ति नहीं हुई, तो मंडियों में जगह की कमी के चलते खरीद प्रक्रिया बाधित होने की आशंका है।
किसान पहले ही मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। अब नमी के कारण खरीद में देरी और बारदाने की कमी ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। किसानों ने मांग की है कि सरकार नमी के मानकों में राहत दे या फसल सुखाने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे।