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सरकारी खरीद नहीं होने और रेट कम मिलने पर गुस्साए किसान और आढ़ती, तीन घंटे तक जाम
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:42 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल (निगदू) : कागजों में सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू करने के सरकार के दावों की हकीकत सामने आ रही है। निगदू अनाज मंडी में फैली अव्यवस्था को लेकर बुधवार को आढ़ती और किसानों का सब्र जवाब दे गया।
सरकारी खरीद नहीं होने और मिलर्स द्वारा कम रेट देने के विरोध में आढ़तियों और किसानों ने मिलकर मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक नीलोखेड़ी-ढांड रोड पर जाम लगा दिया। बाद में डीएफएससी कुशल बुरा, थाना प्रभारी और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और सरकारी खरीद शुरू कराई। इसके बाद ही जाम खोला गया। किसानों ने चेताया कि अगर उनके साथ ठगी की गई तो वे दोबारा से सड़क पर उतरने से नहीं चूकेंगे।
गौरतलब है कि सरकार की ओर से एक अक्तूबर से सरकारी धान की खरीद शुरू की गई। निगदू की अनाज मंडी में नाम मात्र की सरकारी खरीद की जा रही है। इससे मिलर्स मनमर्जी से धान खरीद रहे हैं। धान का सरकारी रेट 1770 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मिलर्स 1600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रहे हैं। कहीं पर भी सुनवाई नहीं होने से गुस्साए आढ़ती और किसानों ने मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया। साथ ही नीलोखेड़ी-ढांड रोड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी लगकर जाम लगा दिया। जाम में व्यापारियों व किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर हंगामा काटा।
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किसानों का कहना है कि अगर कोई खरीद एजेंसी या फिर प्राईवेट राइस मिलर धान को खरीदने के लिए आता है तो वह केवल अपनी मनमर्जी का रेट लगाता है। उनका कहना है कि उनकी साल भर की मेहनत को मिट्टी के भाव खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी फसल को खरीद एजेंसी द्वारा 1600-1700 प्रति क्विंटल के बीच खरीदा है तो उन्हें 1770 प्रति क्विंटल के हिसाब से जे फार्म दिया जा रहा है, जोकि हमारे साथ सरेआम लूटपाट की जा रही है। जाम की स्थिति को देख निगदू पुलिस चौंकी के कर्मी मौके पर आए, लेकिन कोई हल न होने पर वापस चले गए। शाम पांच बजे थाना बुटाना के एसएचओ बलजीत सिंह, निगदू नायब तहसीलदार बौधराज सिंह व डीएफएससी कुशल बुरा मौके पर पहुंचे और खरीद शुरू कराई। इसके बाद ही जाम खोला गया। इस दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
खरीद एजेंसी की मिलर्स से मिलीभगत : कैरा
मंडी के व्यापारी ओम प्रकाश कैरा, शीशपाल घोलुपरा, सुंदर गुप्ता, सुरेंद्र मैहला व किसान राजेंद्र राणा पतनपुरी, शमशेर सिंह, लखी राम, राम किशन, सुलतान सिंह, मांग राम ने कहा कि किसानों को भाजपा सरकार में सरेआम लूटा जा रहा है। जिस पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। उनका कहना है कि जो खरीद एजेंसी मंडी में आई हुई है, वो प्राइवेट राइस मिलरों के साथ मिली हुई है। मिलीभगत करके खरीद एजेंसी लाखों रुपये कमा रहे हैं।
खरीदी 1650 व पर्चा दिया 1770 का
गांव संगरौली के किसान राम चंद्र ने बताया कि उसकी धान को राइस मिलर द्वारा 1650 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है और उसको सरकार द्वारा निर्धारित किए गए रेट 1770 के हिसाब से पर्चा दिया है, जोकि हमारे साथ नाइंसाफी हो रही है। हमें सरेआम लूटा ला रहा है। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार के हालात अन्य किसानों के हैं। खरीद कम रेट पर की जा रही है, जबकि पर्चा पूरे रेट का थमाया जा रहा है।
3 तीन से मंडी में पड़ा हूं, नहीं कोई खरीददार
गांव मोहड़ी जागीर के किसान रामपाल का कहना है कि वह 3 तीन से निगदू अनाज मंडी में अपनी धान की फसल को लेकर पड़ा हुआ है। अभी तक कोई भी खरीद एजेंसी उसकी धान को खरीदने के लिए नहीं आई है। अगर कोई खरीददार धान को खरीदने आता है तो वह अपनी मनमर्जी का रेट लगाता है। मिलर्स ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर रखी है और मनमाने रेट पर धान को खरीद रहे हैं। ये किसानों के साथ लूट है। वहीं, किसान राम जुआरी ने बताया कि निगदू अनाज मंडी में सरकारी खरीद एजेंसी तो है, लेकिन उनके पास कोई राईस मिलर तो नहीं है। दो खरीद एजेंसी के पास केवल एक ही राइस मिलर है। बाकी मंडी में प्राइवेट राईस मिलरों ने तो पूरी लूट मचा रखी है।
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करनाल (निगदू) : कागजों में सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू करने के सरकार के दावों की हकीकत सामने आ रही है। निगदू अनाज मंडी में फैली अव्यवस्था को लेकर बुधवार को आढ़ती और किसानों का सब्र जवाब दे गया।
सरकारी खरीद नहीं होने और मिलर्स द्वारा कम रेट देने के विरोध में आढ़तियों और किसानों ने मिलकर मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक नीलोखेड़ी-ढांड रोड पर जाम लगा दिया। बाद में डीएफएससी कुशल बुरा, थाना प्रभारी और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और सरकारी खरीद शुरू कराई। इसके बाद ही जाम खोला गया। किसानों ने चेताया कि अगर उनके साथ ठगी की गई तो वे दोबारा से सड़क पर उतरने से नहीं चूकेंगे।
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गौरतलब है कि सरकार की ओर से एक अक्तूबर से सरकारी धान की खरीद शुरू की गई। निगदू की अनाज मंडी में नाम मात्र की सरकारी खरीद की जा रही है। इससे मिलर्स मनमर्जी से धान खरीद रहे हैं। धान का सरकारी रेट 1770 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मिलर्स 1600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रहे हैं। कहीं पर भी सुनवाई नहीं होने से गुस्साए आढ़ती और किसानों ने मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया। साथ ही नीलोखेड़ी-ढांड रोड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी लगकर जाम लगा दिया। जाम में व्यापारियों व किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर हंगामा काटा।
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किसानों का कहना है कि अगर कोई खरीद एजेंसी या फिर प्राईवेट राइस मिलर धान को खरीदने के लिए आता है तो वह केवल अपनी मनमर्जी का रेट लगाता है। उनका कहना है कि उनकी साल भर की मेहनत को मिट्टी के भाव खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी फसल को खरीद एजेंसी द्वारा 1600-1700 प्रति क्विंटल के बीच खरीदा है तो उन्हें 1770 प्रति क्विंटल के हिसाब से जे फार्म दिया जा रहा है, जोकि हमारे साथ सरेआम लूटपाट की जा रही है। जाम की स्थिति को देख निगदू पुलिस चौंकी के कर्मी मौके पर आए, लेकिन कोई हल न होने पर वापस चले गए। शाम पांच बजे थाना बुटाना के एसएचओ बलजीत सिंह, निगदू नायब तहसीलदार बौधराज सिंह व डीएफएससी कुशल बुरा मौके पर पहुंचे और खरीद शुरू कराई। इसके बाद ही जाम खोला गया। इस दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
खरीद एजेंसी की मिलर्स से मिलीभगत : कैरा
मंडी के व्यापारी ओम प्रकाश कैरा, शीशपाल घोलुपरा, सुंदर गुप्ता, सुरेंद्र मैहला व किसान राजेंद्र राणा पतनपुरी, शमशेर सिंह, लखी राम, राम किशन, सुलतान सिंह, मांग राम ने कहा कि किसानों को भाजपा सरकार में सरेआम लूटा जा रहा है। जिस पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। उनका कहना है कि जो खरीद एजेंसी मंडी में आई हुई है, वो प्राइवेट राइस मिलरों के साथ मिली हुई है। मिलीभगत करके खरीद एजेंसी लाखों रुपये कमा रहे हैं।
खरीदी 1650 व पर्चा दिया 1770 का
गांव संगरौली के किसान राम चंद्र ने बताया कि उसकी धान को राइस मिलर द्वारा 1650 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया है और उसको सरकार द्वारा निर्धारित किए गए रेट 1770 के हिसाब से पर्चा दिया है, जोकि हमारे साथ नाइंसाफी हो रही है। हमें सरेआम लूटा ला रहा है। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार के हालात अन्य किसानों के हैं। खरीद कम रेट पर की जा रही है, जबकि पर्चा पूरे रेट का थमाया जा रहा है।
3 तीन से मंडी में पड़ा हूं, नहीं कोई खरीददार
गांव मोहड़ी जागीर के किसान रामपाल का कहना है कि वह 3 तीन से निगदू अनाज मंडी में अपनी धान की फसल को लेकर पड़ा हुआ है। अभी तक कोई भी खरीद एजेंसी उसकी धान को खरीदने के लिए नहीं आई है। अगर कोई खरीददार धान को खरीदने आता है तो वह अपनी मनमर्जी का रेट लगाता है। मिलर्स ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर रखी है और मनमाने रेट पर धान को खरीद रहे हैं। ये किसानों के साथ लूट है। वहीं, किसान राम जुआरी ने बताया कि निगदू अनाज मंडी में सरकारी खरीद एजेंसी तो है, लेकिन उनके पास कोई राईस मिलर तो नहीं है। दो खरीद एजेंसी के पास केवल एक ही राइस मिलर है। बाकी मंडी में प्राइवेट राईस मिलरों ने तो पूरी लूट मचा रखी है।