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स्मार्ट सिटी का खाता यस बैंक में, 103 करोड़ जमा, वेतन व खर्च की चिंता बढ़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2020 02:12 AM IST
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103 crore stranded in yash bank in smart
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की रफ्तार पर अब यस बैंक ने ओ नॉ शब्द जोड़ दिया है, क्योंकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का लेन-देन यस बैंक से ही होता है। इसी बैंक में खाता खुलवाया है। जिसमें करीब 103 करोड़ रुपये जमा हैं। रिजर्व बैंक ने नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक का बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त कर दिया है। ऐसे में स्मार्ट सिटी से जुड़े स्टाफ में वेतन व खर्च को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, इससे विकास कार्यों की गति पर भी ब्रेक लगने की संभावना है। यदि इसका कोई समाधान नहीं निकला तो पैसे डूब भी सकते हैं। वहीं, स्मार्ट सिटी के सीईओ राजीव मेहता ने इसका कामों पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ने का दावा किया है।
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पांच लाख तक मिलता है पॉलिसी का पैसा
एडवोकेट ज्ञान सिंह ने बताया कि बैंक भंग होने की स्थिति में पॉलिसी करवाने वालों को पांच लाख रुपये तक का पैसा मिलता है। अधिकतर केस में पांच लाख से ज्यादा पैसा जब्त हो जाता है। इससे पहले कई बैंकों की ऐसी स्थिति होने पर ये परिणाम आ चुके हैं। यदि दूसरा बैंक उस बैंक को लेता है तो समय अवधि तक पैसों की भरपाई कर सकता है।
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720 एकड़ एरिया को बनाना है स्मार्ट
करनाल को स्मार्ट सिटी में 12वां स्थान मिला था। प्रथम चरण में 720 एकड़ एरिया को 1295.8 करोड़ के बजट से स्मार्ट किया जाना है। यहां 34 हजार 532 लोग रहते हैं। साढ़े 3 लाख की आबादी में 50 प्रतिशत आबादी इन्हीं स्थानों से होकर गुजरती है, इसलिए प्रथम चरण में कॉमर्शियल जोन को सलेक्ट किया है। इसी तरह 5 साल तक स्मार्ट सिटी के तहत विकास कार्य होंगे और प्रथम चरण पूरा करने के बाद दूसरे चरण को चिह्नित कर पूरी सिटी को क्लीन किया जाएगा।
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अभी तक सर्वे में ही जुटी है टीम
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शुरुआती 57 प्रोजेक्ट में से निगम के जो पांच प्रोजेक्ट लिए गए थे, दो साल बाद भी उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। चार बड़े प्रोजेक्टों के टेंडर लगाए गए लेकिन अलॉट से पहले ही रद्द हो गए। अब दो दिन पहले ही दो प्रोजेक्टों का काम शुरू हुआ। शहर को स्मार्ट बनाने में जुटी टीम वैसे तो सभी 57 प्रोजेक्टों को करवाने के लिए ग्राउंड में काम कर चुकी हैं। सर्वे हो चुके हैं। प्लान तैयार हैं। अब बजट का इंतजार है। नियम के तहत पांच सालों तक हर साल 200 करोड़ रुपये आने थे।

दो तरह का बजट
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के खर्च में क्षेत्र आधारित विकास के लिए 1061.05 करोड़ रुपये और पैन सिटी सोल्यूशन के लिए 149.99 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
स्मार्ट सिटी का एक ही खाता है, जो यस बैंक में है। इसी खाते में पूरी राशि जमा है। फिलहाल ऐसा कोई काम नहीं है, जो इन पैसों के कारण रुक जाए। विभाग के पास पर्याप्त व्यवस्था है। वहीं, जल्द ही हालात भी ठीक हो जाएंगे। किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। -राजीव मेहता, सीईओ, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
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