{"_id":"5c10069abdec22419975b90b","slug":"101544554138-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौकरी से हटाए गए चालक-परिचालकों ने शुरू किया आमरण-अनशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौकरी से हटाए गए चालक-परिचालकों ने शुरू किया आमरण-अनशन
Updated Wed, 12 Dec 2018 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। रोडवेज में हड़ताल के दौरान कार्यरत चालक-परिचालकों ने रोजगार की मांग को लेकर सेक्टर-12 स्थित हुडा ग्राउंड में आमरण अनशन शुरु कर दिया है। अनशन पर बैठे चालक-परिचालकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष जताया और कहा कि जब तक सरकार उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करवाती तब तक वे आमरण-अनशन पर डटे रहेंगे। सुजेश पान्नु हिसार ने बताया कि इससे पहले उन्होंने रोडवेज की हड़ताल के दौरान सरकार का साथ देकर रोडवेज की बसों का संचालन सही रुप से किया, लेकिन हड़ताल खत्म होते ही सरकार ने उन्हें बिना किसी नोटिस के हटा दिया। अब सभी चालक-परिचालक बेरोजगार हो गए हैं। समस्या को लेकर वे सभी मंत्रियों, विधायकों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सरकार के किसी भी जनप्रतिनिधि ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि रोडवेज का ओवर टाइम बंद करने के बाद आज 1500 बसें डिपो में खड़ी हैं। इससे पहले 1972, 1979 व 1993 में जिन कर्मचारियों न हड़ताल के दौरान कार्य किया था उन कर्मचारियों को सरकार ने पॉलिसी बनाकर तोहफे के तौर पर अपने अधीन (विभाग) में ले लिया था इसलिए उन्होंने सरकार से मांग की है कि नौकरी से हटाए गए सभी चालक-परिचालकों को सरकार पॉलिसी बनाकर विभाग के अंदर समायोजित करे। आमरण अनशन में दिनेश, संदीप, सुरेंद्र, रोशन, सोनू, दलबीर, जयबीर, संदीप फरमाना, प्रदीप, साधु राम, कृष्ण, दिनेश, सुरजीत, राहुल, धर्मेंद्र, राममेहर, नसीब, मनोज, रामकुमार, विक्रम व बिजेंद्र आदि ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
करनाल। रोडवेज में हड़ताल के दौरान कार्यरत चालक-परिचालकों ने रोजगार की मांग को लेकर सेक्टर-12 स्थित हुडा ग्राउंड में आमरण अनशन शुरु कर दिया है। अनशन पर बैठे चालक-परिचालकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोष जताया और कहा कि जब तक सरकार उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करवाती तब तक वे आमरण-अनशन पर डटे रहेंगे। सुजेश पान्नु हिसार ने बताया कि इससे पहले उन्होंने रोडवेज की हड़ताल के दौरान सरकार का साथ देकर रोडवेज की बसों का संचालन सही रुप से किया, लेकिन हड़ताल खत्म होते ही सरकार ने उन्हें बिना किसी नोटिस के हटा दिया। अब सभी चालक-परिचालक बेरोजगार हो गए हैं। समस्या को लेकर वे सभी मंत्रियों, विधायकों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सरकार के किसी भी जनप्रतिनिधि ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि रोडवेज का ओवर टाइम बंद करने के बाद आज 1500 बसें डिपो में खड़ी हैं। इससे पहले 1972, 1979 व 1993 में जिन कर्मचारियों न हड़ताल के दौरान कार्य किया था उन कर्मचारियों को सरकार ने पॉलिसी बनाकर तोहफे के तौर पर अपने अधीन (विभाग) में ले लिया था इसलिए उन्होंने सरकार से मांग की है कि नौकरी से हटाए गए सभी चालक-परिचालकों को सरकार पॉलिसी बनाकर विभाग के अंदर समायोजित करे। आमरण अनशन में दिनेश, संदीप, सुरेंद्र, रोशन, सोनू, दलबीर, जयबीर, संदीप फरमाना, प्रदीप, साधु राम, कृष्ण, दिनेश, सुरजीत, राहुल, धर्मेंद्र, राममेहर, नसीब, मनोज, रामकुमार, विक्रम व बिजेंद्र आदि ने हिस्सा लिया।