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Kaithal News: बदले में आईं 48 बसों की वेलिडिटी 2026 तक
Mon, 02 Dec 2024 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 02 Dec 2024 02:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में एनसीआर क्षेत्र के जिलों से बीएस-6 तकनीक बसों के बदले आई 47 बसों की वेलिडिटी 2026 में खत्म हो जाएगी। यात्रियों का कहना है कि इस प्रकार समझा जा सकता है कि इन बसों की हालत क्या होगी।
गौरतलब है कि इस समय कैथल डिपो में 192 में से 47 बसें 2011 मॉडल की हैं। इस मॉडल की बसें ही बीएस-तीन और चार तकनीक की हैं। हालांकि इन बसों की हालत अभी ही इतनी खराब है कि इसे लंबे रूटों पर नहीं भेजा जा सकता है। वहीं, बसों को ठीक न होने के कारण चालक सहित अन्य यात्रियों को भी परेशानियां हो रही हैं। क्योंकि अभी दूसरे जिलों से आई बीएस-तीन व चार तकनीक की बसें ठीक नहीं हो पाई हैं। इस वर्कशॉप में टाटा कंपनी की बसें ठीक करने के की मैकेनिक हैं।
बदले में आई अधिकतर बसें है लंबे रूटों की ः एनसीआर क्षेत्र के जिलों से बीएस-6 तकनीक बसों के बदले आई बीएस-तीन और चार तकनीक की बसें लंबे रूटों के लिए आई हैं, लेकिन इनकी हालत अधिक खराब होने के कारण अभी तक इन लंबे रूटों पर बसों नहीं भेजा जा सका हैं।
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हालांकि रोडवेज प्रबंधन का कहना है कि अधिकतर बसों को ठीक करवाने का काम पूरा कर लिया है। जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
उधर, रोडवेज वर्कशॉप प्रबंधक अनिल चोपड़ा ने कहा कि कुछ ही बसें हैं, जिनकी हालत अधिक खराब है। बताया कि डिपो में जितनी भी पुरानी बसें हैं। वह 2011 से 2015 के मॉडल की है। ऐसे में अभी कम से कम पांच साल तक किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी।
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कैथल। जिले में एनसीआर क्षेत्र के जिलों से बीएस-6 तकनीक बसों के बदले आई 47 बसों की वेलिडिटी 2026 में खत्म हो जाएगी। यात्रियों का कहना है कि इस प्रकार समझा जा सकता है कि इन बसों की हालत क्या होगी।
गौरतलब है कि इस समय कैथल डिपो में 192 में से 47 बसें 2011 मॉडल की हैं। इस मॉडल की बसें ही बीएस-तीन और चार तकनीक की हैं। हालांकि इन बसों की हालत अभी ही इतनी खराब है कि इसे लंबे रूटों पर नहीं भेजा जा सकता है। वहीं, बसों को ठीक न होने के कारण चालक सहित अन्य यात्रियों को भी परेशानियां हो रही हैं। क्योंकि अभी दूसरे जिलों से आई बीएस-तीन व चार तकनीक की बसें ठीक नहीं हो पाई हैं। इस वर्कशॉप में टाटा कंपनी की बसें ठीक करने के की मैकेनिक हैं।
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बदले में आई अधिकतर बसें है लंबे रूटों की ः एनसीआर क्षेत्र के जिलों से बीएस-6 तकनीक बसों के बदले आई बीएस-तीन और चार तकनीक की बसें लंबे रूटों के लिए आई हैं, लेकिन इनकी हालत अधिक खराब होने के कारण अभी तक इन लंबे रूटों पर बसों नहीं भेजा जा सका हैं।
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हालांकि रोडवेज प्रबंधन का कहना है कि अधिकतर बसों को ठीक करवाने का काम पूरा कर लिया है। जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
उधर, रोडवेज वर्कशॉप प्रबंधक अनिल चोपड़ा ने कहा कि कुछ ही बसें हैं, जिनकी हालत अधिक खराब है। बताया कि डिपो में जितनी भी पुरानी बसें हैं। वह 2011 से 2015 के मॉडल की है। ऐसे में अभी कम से कम पांच साल तक किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी।