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संस्कृत पुनरुद्धान को हुई विवि की स्थापना : भारद्वाज
Wed, 31 Jul 2024 05:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 31 Jul 2024 05:03 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत की आधारभूत संरचना विषय पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हो गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है, इस भाषा के पुनरुद्धान के लिए हरियाणा सरकार ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की है।
उन्होंने बताया कि संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू है। साथ ही उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के सभी स्तरों पर संस्कृत को जीवन जीने की मुख्य धारा में शामिल कर अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को न केवल संस्कृत अध्ययन में रुचि होगी अपितु संस्कृत की सरसता व सरलता का बोध भी हुआ है, जिससे विद्यार्थी भारतीय ज्ञान को आत्मसात करके जीवन को सफल कर सकेंगे। इसी उद्देश्य के लिए विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य रूप से संचालित की जा रही है। साथ में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. सत्यप्रकाश दुबे ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त किया। विश्वविद्यालय में नया सत्र शुरू हो चुका है सभी विद्यार्थी उत्साह के साथ अध्ययन करेंगे यही आशा है।
इस मौके पर भारतीय ज्ञान-विज्ञान शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. रामानंद मिश्र, डॉ. शर्मिला, डॉ. चंद्रकांत और डॉ. शीतांशु त्रिपाठी मौजूद रहे।
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत की आधारभूत संरचना विषय पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हो गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है, इस भाषा के पुनरुद्धान के लिए हरियाणा सरकार ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की है।
उन्होंने बताया कि संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू है। साथ ही उन्होंने शिक्षा क्षेत्र के सभी स्तरों पर संस्कृत को जीवन जीने की मुख्य धारा में शामिल कर अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को न केवल संस्कृत अध्ययन में रुचि होगी अपितु संस्कृत की सरसता व सरलता का बोध भी हुआ है, जिससे विद्यार्थी भारतीय ज्ञान को आत्मसात करके जीवन को सफल कर सकेंगे। इसी उद्देश्य के लिए विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य रूप से संचालित की जा रही है। साथ में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. सत्यप्रकाश दुबे ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त किया। विश्वविद्यालय में नया सत्र शुरू हो चुका है सभी विद्यार्थी उत्साह के साथ अध्ययन करेंगे यही आशा है।
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इस मौके पर भारतीय ज्ञान-विज्ञान शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. रामानंद मिश्र, डॉ. शर्मिला, डॉ. चंद्रकांत और डॉ. शीतांशु त्रिपाठी मौजूद रहे।
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