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Kaithal News: रसूलपुर क्षेत्र में सरस्वती ड्रेन पर कमजोर बांध से ग्रामीणाें की बढ़ी चिंता
Sun, 07 Sep 2025 03:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 07 Sep 2025 03:05 AM IST
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कैथल। रसूलपुर क्षेत्र में बहने वाली सरस्वती ड्रेन की जर्जर हालत से ग्रामीणों में भारी रोष है। उनका कहना है कि ड्रेन का बांध काफी कमजोर है और बरसात या अतिरिक्त पानी आने पर कभी भी टूट सकता है। शिकायतें करने के बावजूद विभाग ने अब तक सफाई व पक्कीकरण का काम नहीं कराया, जिससे हजारों एकड़ फसल पर संकट मंडरा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि 2023 में भी यह ड्रेन टूटने से करीब एक दर्जन गांवों के किसानों की लगभग 1500 एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। इस बार भी समय पर मरम्मत नहीं हुई तो दोबारा भारी नुकसान की आशंका है। खतरे की जद में कक्योर माजरा, हिम्मतपुरा, रसूलपुर, माण्डी सादरा, ककराला इनायत, पबसर, ककराला कुचियां, पोलड़ सहित एक दर्जन से अधिक गांव आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका खेती प्रधान है, इसलिए किसी भी प्रकार का जलभराव सीधे-सीधे किसान की मेहनत पर चोट करता है।
ग्रामीणों ने चिंता जताई कि हाल ही में मारकंडा नदी की दीवार टूटने के बाद उसका पानी बीबीपुर के पास मस्तापुर झील से होते हुए बड़ी मात्रा में सरस्वती ड्रेन में आ रहा है। बढ़ते जलस्तर के चलते कमजोर बांध और दबाव सहन नहीं कर पाएगा, परिणामस्वरूप आसपास की जमीनें जलमग्न हो सकती हैं।
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गज्जन सिंह हिम्मतपुरा, नरेंद्र सिंह सीमा, करमजीत सिंह, गुरबाज सिंह, पूर्व सरपंच सविंद्र सिंह, हरविंदर सिंह, मालक सिंह, पंजाब सिंह, साहब सिंह समेत कई किसानों ने प्रशासन से तुरंत ड्रेन की सफाई, बांध की मजबूती और जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करने की अपील की।
उनका कहना है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विभागीय स्तर पर त्वरित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी फसलों को एक बार फिर डूबने नहीं देंगे। संवाद
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ग्रामीणों का कहना है कि 2023 में भी यह ड्रेन टूटने से करीब एक दर्जन गांवों के किसानों की लगभग 1500 एकड़ फसल जलमग्न हो गई थी। इस बार भी समय पर मरम्मत नहीं हुई तो दोबारा भारी नुकसान की आशंका है। खतरे की जद में कक्योर माजरा, हिम्मतपुरा, रसूलपुर, माण्डी सादरा, ककराला इनायत, पबसर, ककराला कुचियां, पोलड़ सहित एक दर्जन से अधिक गांव आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका खेती प्रधान है, इसलिए किसी भी प्रकार का जलभराव सीधे-सीधे किसान की मेहनत पर चोट करता है।
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ग्रामीणों ने चिंता जताई कि हाल ही में मारकंडा नदी की दीवार टूटने के बाद उसका पानी बीबीपुर के पास मस्तापुर झील से होते हुए बड़ी मात्रा में सरस्वती ड्रेन में आ रहा है। बढ़ते जलस्तर के चलते कमजोर बांध और दबाव सहन नहीं कर पाएगा, परिणामस्वरूप आसपास की जमीनें जलमग्न हो सकती हैं।
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गज्जन सिंह हिम्मतपुरा, नरेंद्र सिंह सीमा, करमजीत सिंह, गुरबाज सिंह, पूर्व सरपंच सविंद्र सिंह, हरविंदर सिंह, मालक सिंह, पंजाब सिंह, साहब सिंह समेत कई किसानों ने प्रशासन से तुरंत ड्रेन की सफाई, बांध की मजबूती और जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करने की अपील की।
उनका कहना है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विभागीय स्तर पर त्वरित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी फसलों को एक बार फिर डूबने नहीं देंगे। संवाद